
मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को शुरुआती कारोबार के दौरान गिरावट देखने को मिली। वैश्विक बाजारों में कमजोर संकेतों, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ। इसके चलते घरेलू बाजार के प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी दबाव में नजर आए।
शुरुआती कारोबार में बीएसई का 30 शेयरों वाला प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स 278.32 अंक की गिरावट के साथ 77,450.64 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का 50 शेयरों वाला निफ्टी भी 57.65 अंक टूटकर 24,230.45 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया।
बाजार में गिरावट की मुख्य वजहों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव शामिल रहा। निवेशकों को आशंका है कि तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है और कंपनियों की लागत प्रभावित हो सकती है। इसी चिंता के कारण बाजार में सतर्कता का माहौल बना हुआ है।
मंगलवार को शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स में शामिल कई बड़े शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। भारती एयरटेल, एशियन पेंट्स, इंटरग्लोब एविएशन, इंफोसिस, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और टेक महिंद्रा जैसे प्रमुख शेयरों में बिकवाली का दबाव देखने को मिला। इन कंपनियों के शेयर शुरुआती कारोबार में नुकसान के साथ कारोबार कर रहे थे।
दूसरी ओर, कुछ बड़े शेयरों ने बाजार को संभालने की कोशिश की। रिलायंस इंडस्ट्रीज, सन फार्मा, मारुति सुजुकी और एक्सिस बैंक जैसे शेयरों में शुरुआती कारोबार के दौरान तेजी देखने को मिली। इन कंपनियों में खरीदारी से बाजार में गिरावट कुछ हद तक सीमित रही।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा समय में निवेशक वैश्विक घटनाक्रमों पर नजर बनाए हुए हैं। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर अर्थव्यवस्था और कंपनियों के मुनाफे पर पड़ सकता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में भी तेजी दर्ज की गई। ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 0.63 प्रतिशत की बढ़त के साथ 91.46 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। तेल की कीमतों में यह उछाल निवेशकों की चिंता का एक बड़ा कारण बना हुआ है।
इसके अलावा विदेशी बाजारों के संकेत भी भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक नहीं रहे। वैश्विक स्तर पर निवेशक जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाते नजर आ रहे हैं। इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा और शुरुआती कारोबार में बिकवाली देखने को मिली।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम होता है और तेल की कीमतों में स्थिरता आती है तो बाजार में दोबारा मजबूती लौट सकती है।
भारतीय बाजार में घरेलू कारकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी। कंपनियों के तिमाही नतीजे, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और आर्थिक आंकड़े बाजार की चाल को प्रभावित कर सकते हैं। निवेशकों को फिलहाल जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय बाजार की स्थिति पर नजर रखने की सलाह दी जा रही है।
बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मजबूत कंपनियों के शेयर आकर्षक बने रह सकते हैं। हालांकि, वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए निवेशकों को जोखिम प्रबंधन पर ध्यान देने की जरूरत है।
फिलहाल मंगलवार के शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों दबाव में रहे। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया के तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। आने वाले कारोबारी सत्रों में वैश्विक घटनाक्रम बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।





