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400 रुपये लेकर निकले गुजरमल मोदी ने बसाया मोदीनगर बनाया उद्योग साम्राज्य

nidhi
19 Aug 2026 9:20 AM IST
400 रुपये लेकर निकले गुजरमल मोदी ने बसाया मोदीनगर बनाया उद्योग साम्राज्य
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कैशियर की नौकरी से करोड़ों के कारोबार तक पहुंचा गुजरमल मोदी का सफर

गाजियाबाद: आज उत्तर प्रदेश का मोदीनगर एक बड़े औद्योगिक शहर के रूप में पहचाना जाता है, लेकिन इसके पीछे एक ऐसे शख्स की संघर्ष और सफलता की कहानी छिपी है, जिसने महज 400 रुपये से अपना सफर शुरू किया था। यह कहानी है मशहूर उद्योगपति गुजरमल मोदी की, जिन्होंने मेहनत, दूरदृष्टि और साहस के दम पर न केवल बड़ा कारोबारी साम्राज्य खड़ा किया, बल्कि एक पूरे शहर को पहचान दी।

पिता के कारोबार में कैशियर से शुरू हुआ सफर
गुजरमल मोदी का जन्म 9 अगस्त 1902 को महेंद्रगढ़ (वर्तमान हरियाणा) में हुआ था। युवावस्था में उन्होंने अपने पिता के अनाज कारोबार में कैशियर के रूप में काम करना शुरू किया। कारोबार की बारीकियां सीखने के बाद उनके मन में कुछ नया करने और अपना अलग मुकाम बनाने की इच्छा पैदा हुई।
साल 1932 में उन्होंने बड़ा फैसला लिया। जेब में सिर्फ 400 रुपये लेकर वह नए अवसर की तलाश में निकल पड़े। इसी सफर ने आगे चलकर उन्हें देश के बड़े उद्योगपतियों में शामिल कर दिया।
बेगमाबाद से शुरू हुई मोदीनगर की कहानी
गुजरमल मोदी ने दिल्ली के पास स्थित बेगमाबाद गांव को अपने उद्योग के लिए चुना। साल 1933 में उन्होंने यहां चीनी मिल की स्थापना की। यही शुरुआत आगे चलकर मोदी समूह के विस्तार और मोदीनगर शहर के विकास का आधार बनी। चीनी मिल की सफलता के बाद उन्होंने कारोबार का विस्तार किया और वनस्पति, साबुन, तेल, कपड़ा, पेंट, स्टील, रबर और कई अन्य क्षेत्रों में कदम रखा। धीरे-धीरे उनका कारोबार एक बड़े औद्योगिक समूह में बदल गया।
उद्योग के साथ बसाया पूरा शहर
गुजरमल मोदी की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मोदीनगर का विकास माना जाता है। उन्होंने उद्योगों के साथ-साथ कर्मचारियों और स्थानीय लोगों के लिए आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी ध्यान दिया। मोदीनगर आज गाजियाबाद जिले का प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र है और इसकी पहचान मोदी समूह के इतिहास से जुड़ी हुई है।
मेहनत और नवाचार से मिली सफलता
गुजरमल मोदी ने उस दौर में उद्योग शुरू किया जब देश आजादी से पहले आर्थिक चुनौतियों से गुजर रहा था। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने नए प्रयोग किए और भारतीय उद्योग जगत में अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी सोच केवल कारोबार तक सीमित नहीं थी। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास के क्षेत्र में भी योगदान दिया। उनके प्रयासों के लिए भारत सरकार ने उन्हें 1968 में पद्म भूषण से सम्मानित किया।
₹400 से खड़ा किया बड़ा साम्राज्य
गुजरमल मोदी की कहानी इस बात का उदाहरण है कि बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए शुरुआत छोटी हो सकती है। 400 रुपये लेकर निकला एक युवा आगे चलकर हजारों लोगों को रोजगार देने वाला उद्योगपति बना और एक पूरे शहर की पहचान बन गया। आज भी मोदीनगर का नाम गुजरमल मोदी की दूरदृष्टि और संघर्ष की याद दिलाता है। उनकी जीवन यात्रा उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो सीमित साधनों के बावजूद कुछ बड़ा करने का सपना देखते हैं।
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