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S&P ग्लोबल ने भारत की ग्रोथ अनुमान घटाया, मिडिल ईस्ट संघर्ष से महंगाई बढ़ने की आशंका

Kavita2
7 May 2026 11:18 AM IST
S&P ग्लोबल ने भारत की ग्रोथ अनुमान घटाया, मिडिल ईस्ट संघर्ष से महंगाई बढ़ने की आशंका
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New Delhi नई दिल्ली : S&P ग्लोबल ने मौजूदा वित्त वर्ष के लिए भारत की आर्थिक विकास दर के अनुमान में कटौती की है। वेस्ट एशिया में जारी संघर्ष के कारण ट्रेड, एनर्जी फ्लो में बाधा और महंगाई के बढ़ते दबाव को देखते हुए यह संशोधन किया गया है। पहले जहां ग्रोथ अनुमान 7.1 प्रतिशत था, अब इसे घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया गया है।

S&P ग्लोबल ने क्रिसिल के साथ मिलकर जारी की गई अपनी ताजा ‘इंडिया फॉरवर्ड’ रिपोर्ट में कहा है कि मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध हाल के वर्षों में भारत की आर्थिक मजबूती के लिए सबसे बड़ी परीक्षा साबित हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, इस संघर्ष के कारण अब तक का सबसे बड़ा ऊर्जा झटका देखने को मिला है, जिसका असर वैश्विक सप्लाई चेन पर भी पड़ा है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि ऊर्जा संकट के कारण फ्रेट और इंश्योरेंस लागत बढ़ी है, साथ ही सप्लाई चेन और फर्टिलाइजर सेक्टर पर भी दबाव बढ़ा है। इससे भारत की आयात लागत और उत्पादन खर्च में वृद्धि हो रही है।

क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी ने कहा कि यदि ऊर्जा आपूर्ति में बाधा बनी रहती है तो वर्ष 2026-27 में भारत की खुदरा महंगाई दर पिछले वर्ष के लगभग 2 प्रतिशत से बढ़कर 5.1 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। उन्होंने कहा कि इसमें मुख्य योगदान खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों का होगा।

जोशी ने यह भी बताया कि आने वाले महीनों में होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) आधारित महंगाई दर, कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आधारित खुदरा महंगाई को पार कर सकती है। यह स्थिति इस बात का संकेत होगी कि कंपनियां लागत बढ़ने का अधिक बोझ उपभोक्ताओं पर डाल रही हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, 28 फरवरी को ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है। हालांकि इसके बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में ज्यादा बदलाव नहीं देखा गया है। लेकिन इसका असर आने वाले समय में महंगाई के आंकड़ों में दिखाई देने की संभावना है।

क्रिसिल का कहना है कि अप्रैल और उसके बाद के महीनों में महंगाई के दबाव में और बढ़ोतरी हो सकती है। ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अस्थिरता इसका प्रमुख कारण हो सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति भारत की आर्थिक नीतियों और विकास दर के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बन सकती है। हालांकि घरेलू मांग और निवेश गतिविधियों के चलते अर्थव्यवस्था में कुछ संतुलन बना रह सकता है, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों का असर स्पष्ट रूप से देखने को मिलेगा।

फिलहाल, S&P ग्लोबल की यह रिपोर्ट भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बाहरी जोखिमों की ओर संकेत करती है, जिससे आने वाले समय में नीति निर्माताओं की चुनौतियां बढ़ सकती हैं।

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