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NEW DELHI नई दिल्ली: 'काउंटरपॉइंट रिसर्च' की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की जुलाई-सितंबर तिमाही में भारत का स्मार्टफोन बाजार सालाना आधार पर 20 प्रतिशत गिरकर पिछले एक दशक के सबसे निचले स्तर पर आ गया है। इसका मुख्य कारण मेमोरी चिप की रिकॉर्ड-तोड़ कीमतें हैं, जिससे डिवाइस की लागत बढ़ गई और ग्राहकों की मांग कमजोर हो गई। 'काउंटरपॉइंट रिसर्च' के रिसर्च डायरेक्टर तरुण पाठक ने कहा कि 2026 में बाजार के लगभग 13 प्रतिशत तक सिकुड़ने की उम्मीद है। कीमतों का लगातार दबाव लोगों की खरीदने की क्षमता और फोन बदलने की मांग को प्रभावित कर रहा है।
मार्केट रिसर्च फर्म ने कहा, "2026 की तीसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में भारत में स्मार्टफोन की शिपमेंट सालाना आधार पर 20 प्रतिशत गिरकर पिछले एक दशक के सबसे निचले स्तर पर आ गई। मेमोरी की रिकॉर्ड कीमतों के कारण डिवाइस की लागत बढ़ गई, जिससे ज्यादातर ब्रांड्स की शिपमेंट में गिरावट आई। मांग लगातार कमजोर रहने के कारण, कंपनियों (OEMs) ने त्योहारी सीजन से पहले भी चैनल इन्वेंट्री (स्टॉक) को सीमित रखा।" बाजार में आई इस गिरावट ने ब्रांड रैंकिंग को बदल दिया है। नौ तिमाहियों के बाद सैमसंग ने फिर से शीर्ष स्थान हासिल कर लिया है, जबकि कई चीनी स्मार्टफोन कंपनियों के मार्केट शेयर में गिरावट दर्ज की गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, "2026 की तीसरी तिमाही में 17 प्रतिशत मार्केट शेयर के साथ, सैमसंग ने नौ तिमाहियों के बाद बाजार में फिर से पहला स्थान हासिल किया। गैलेक्सी A सीरीज की अच्छी बिक्री रही, जिसमें कंपनी की ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह की संतुलित रणनीति का बड़ा योगदान रहा। सैमसंग ने कीमतों में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी नहीं की और मेमोरी की बढ़ती लागत को बेहतर ढंग से मैनेज किया, जिससे वह पूरे बाजार के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन कर पाई।"
इस तिमाही के दौरान भारतीय स्मार्टफोन ब्रांड्स ने भी अपनी स्थिति मजबूत की है, जिसमें 'Ai+ स्मार्टफोन' सबसे आगे रहा। पिछले साल की इसी तिमाही में इनका कुल मार्केट शेयर 3 प्रतिशत था, जो 2026 की तीसरी तिमाही में बढ़कर 15 प्रतिशत हो गया। रिपोर्ट में कहा गया है, "2026 की तीसरी तिमाही में 'Ai+ स्मार्टफोन' सबसे तेजी से बढ़ने वाला ब्रांड रहा। इसने सालाना आधार पर शिपमेंट में 306 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। इसका श्रेय कंपनी के बड़े प्रोडक्ट पोर्टफोलियो और बाजार में बढ़ती मौजूदगी को जाता है।"
अन्य प्रमुख ब्रांड्स की बात करें तो, वीवो (Vivo) का मार्केट शेयर एक साल पहले के 20 प्रतिशत से घटकर 16 प्रतिशत रह गया, जबकि ओप्पो (Oppo) का मार्केट शेयर 13 प्रतिशत से गिरकर 12 प्रतिशत हो गया। Xiaomi की हिस्सेदारी 8 प्रतिशत बनी रही।
Apple का मार्केट शेयर भी साल-दर-साल 9 प्रतिशत से घटकर 8 प्रतिशत रह गया, जबकि उसके नए प्रीमियम डिवाइस की शुरुआती मांग काफी मजबूत थी। रिपोर्ट में कहा गया है, "भारत में iPhone 18 Pro सीरीज की शुरुआत काफी मजबूत रही है। इसकी शुरुआती बिक्री, iPhone 17 Pro सीरीज की तुलना में साल-दर-साल लगभग 20 प्रतिशत अधिक रही। iPhone 17 लाइनअप की लगातार मांग दिखाती है कि ग्राहकों की इसमें अच्छी दिलचस्पी है। यह तब हो रहा है जब Apple मेमोरी और कंपोनेंट की बढ़ती लागत के बीच अपने सभी प्रोडक्ट्स की कीमतों में बदलाव कर रहा है।"
काउंटरपॉइंट रिसर्च के रिसर्च एनालिस्ट शुभम सिंह ने कहा कि इस तिमाही में भारत के स्मार्टफोन बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला, जहां कंपोनेंट की बढ़ती लागत और ग्राहकों की कमजोर मांग ने मिलकर असर डाला। उन्होंने कहा, "कंपोनेंट की बढ़ती लागत के कारण डिवाइस की कीमतें बढ़ गईं, जिससे लोगों के लिए इन्हें खरीदना मुश्किल हो गया। इससे मास-मार्केट (खासकर 15,000 रुपये से कम कीमत वाले सेगमेंट) की बिक्री पर बुरा असर पड़ा। ग्राहक अब ज्यादा सोच-समझकर खरीदारी कर रहे हैं, अपने फोन को बदलने का समय आगे बढ़ा रहे हैं और नए फोन लेने को टाल रहे हैं। वहीं, कंपनियां (OEMs) दिवाली से पहले ज्यादा बिक्री बढ़ाने के बजाय अपने मुनाफे को बचाने, अपने प्रोडक्ट्स की संख्या को सही तरीके से सीमित करने और इन्वेंट्री को कम रखने पर ध्यान दे रही हैं।"
सिंह ने आगे बताया कि इस तिमाही में 20,000 रुपये से कम कीमत वाले सेगमेंट में शिपमेंट में भारी गिरावट आई, क्योंकि कीमतों में बढ़ोतरी के कारण कई डिवाइस अब महंगी कैटेगरी में चले गए हैं। उन्होंने कहा कि Q3 2026 में 20,000 रुपये से कम कीमत वाले सेगमेंट में शिपमेंट 47 प्रतिशत तक गिर गई, क्योंकि मॉडल्स की कीमतें बढ़ने से ये डिवाइस अब ज्यादा कीमत वाले बैंड में आ गए हैं।
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