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टेक्नोलॉजी निवेश पर सीतारमण का बड़ा बयान

Ratna Netam
26 Sept 2026 7:03 PM IST
टेक्नोलॉजी निवेश पर सीतारमण का बड़ा बयान
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बेंगलुरु। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश का अगला बड़ा क्षेत्र आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर चिप्स और क्वांटम टेक्नोलॉजी हो सकता है। उन्होंने इन उभरती तकनीकों में देश की क्षमता बढ़ाने के साथ AI हार्डवेयर, ट्रेनिंग और स्किल डेवलपमेंट में अधिक निवेश की जरूरत पर जोर दिया।बेंगलुरु में IIT मद्रास एलुमनाई एसोसिएशन के ‘संगम 2026’ कार्यक्रम में आयोजित एक इंटरैक्टिव सेशन के दौरान वित्त मंत्री ने तकनीक और इंफ्रास्ट्रक्चर के भविष्य को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भारत को मौजूदा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि अलग-अलग क्षेत्रों में AI के इस्तेमाल को तेजी से बढ़ाया जा सके।
सीतारमण ने कहा, “मुझे लगता है कि इंफ्रास्ट्रक्चर में अगला बड़ा निवेश AI, सेमीकंडक्टर चिप्स और उन पर आधारित क्वांटम टेक्नोलॉजी में होगा।” उनके मुताबिक, इन क्षेत्रों में केवल तकनीक विकसित करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि इसके लिए जरूरी हार्डवेयर, प्रशिक्षित मानव संसाधन और मजबूत डिजिटल व्यवस्था तैयार करना भी जरूरी है।वित्त मंत्री ने AI को लेकर कहा कि आने वाले समय में इसका इस्तेमाल अलग-अलग सेक्टर में और तेजी से बढ़ सकता है। ऐसे में देश को AI आधारित सेवाओं और तकनीकों के इस्तेमाल के लिए जरूरी कंप्यूटिंग क्षमता विकसित करनी होगी। इसके साथ ही AI से जुड़े हार्डवेयर और प्रशिक्षण पर भी ध्यान देना होगा।उन्होंने स्किल डेवलपमेंट को इस तकनीकी बदलाव का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। AI, सेमीकंडक्टर और क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में काम करने के लिए विशेष तकनीकी कौशल की जरूरत होती है। इसलिए इन क्षेत्रों के विस्तार के साथ प्रशिक्षित लोगों की संख्या बढ़ाना भी जरूरी होगा।
भारत में AI इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए पहले से कई स्तर पर काम चल रहा है। सरकार की IndiaAI Mission पहल के तहत कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, हाई-एंड GPU तक पहुंच, AI रिसर्च, स्टार्टअप, स्किलिंग और सार्वजनिक सेवाओं में AI के इस्तेमाल पर काम किया जा रहा है। सरकारी जानकारी के अनुसार, AI के लिए साझा कंप्यूटिंग सुविधा में 38 हजार से अधिक GPU की क्षमता विकसित की जा रही है।सेमीकंडक्टर क्षेत्र भी भारत की तकनीकी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। चिप्स का इस्तेमाल AI, दूरसंचार, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, रक्षा, डेटा सेंटर और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग जैसे कई क्षेत्रों में होता है। सरकार ने जुलाई 2026 में Semicon 2.0 को मंजूरी दी, जिसमें रिसर्च एंड डेवलपमेंट, चिप डिजाइन, मशीन और मैटेरियल, नए फैब, टैलेंट डेवलपमेंट और पैकेजिंग से जुड़े क्षेत्रों को शामिल किया गया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 तक भारत में सेमीकंडक्टर मिशन के तहत करीब 1.64 लाख करोड़ रुपये के 12 प्रोजेक्ट मंजूर किए जा चुके थे। इनमें सेमीकंडक्टर फैब, कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब और पैकेजिंग यूनिट शामिल हैं। इससे देश में चिप निर्माण से जुड़ा घरेलू इकोसिस्टम तैयार करने की दिशा में काम आगे बढ़ा है।वित्त मंत्री की टिप्पणी ऐसे समय सामने आई है जब देश में सेमीकंडक्टर, AI और क्वांटम टेक्नोलॉजी को एक-दूसरे से जुड़े भविष्य के महत्वपूर्ण क्षेत्रों के रूप में देखा जा रहा है। हाल ही में आयोजित SEMICON India 2026 में भी AI, क्वांटम प्लेटफॉर्म, चिप डिजाइन, फैब्रिकेशन, स्टार्टअप और वर्कफोर्स डेवलपमेंट पर जोर दिया गया था।
क्वांटम टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी भारत अपनी क्षमता बढ़ा रहा है। National Quantum Mission के तहत क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम कम्युनिकेशन, क्वांटम सेंसिंग और मेट्रोलॉजी तथा क्वांटम मैटेरियल और डिवाइस जैसे क्षेत्रों पर काम किया जा रहा है। इसके लिए देश में चार प्रमुख थीमैटिक हब स्थापित किए गए हैं।इनमें क्वांटम कंप्यूटिंग के लिए IISc बेंगलुरु, क्वांटम कम्युनिकेशन के लिए IIT मद्रास और C-DOT, क्वांटम सेंसिंग एवं मेट्रोलॉजी के लिए IIT बॉम्बे तथा क्वांटम मैटेरियल और डिवाइस के लिए IIT दिल्ली से जुड़े हब शामिल हैं। इसके साथ क्वांटम तकनीक में शिक्षा और कौशल विकास के लिए शिक्षण प्रयोगशालाएं भी स्थापित की जा रही हैं।
सीतारमण की बात का प्रमुख फोकस भविष्य की तकनीकों के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा तैयार करने पर रहा। AI का व्यापक इस्तेमाल बढ़ाने के लिए केवल सॉफ्टवेयर या एप्लिकेशन पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए कंप्यूटिंग पावर, चिप्स, डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी रूप से प्रशिक्षित कर्मचारियों की भी जरूरत होती हैसेमीकंडक्टर इस पूरी व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। AI सिस्टम और एडवांस कंप्यूटिंग के लिए उच्च क्षमता वाली चिप्स की जरूरत होती है। इसी तरह क्वांटम टेक्नोलॉजी के विकास में भी अत्याधुनिक हार्डवेयर, रिसर्च सुविधाओं और विशेष तकनीकी विशेषज्ञता की भूमिका रहती है।
भारत में इन तीनों क्षेत्रों में निवेश बढ़ने से तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर के स्वरूप में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अब तक इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश का बड़ा हिस्सा सड़क, रेलवे, बंदरगाह, बिजली और शहरी सुविधाओं जैसे क्षेत्रों में दिखाई देता रहा है। आने वाले दौर में डिजिटल और डीप-टेक इंफ्रास्ट्रक्चर भी निवेश का महत्वपूर्ण क्षेत्र बन सकता है।वित्त मंत्री ने इसी बदलाव की ओर संकेत करते हुए AI, सेमीकंडक्टर और क्वांटम टेक्नोलॉजी को अगले बड़े निवेश क्षेत्रों के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने साफ किया कि भारत को तकनीक के इस्तेमाल के साथ उसे विकसित करने और उसके लिए जरूरी क्षमता तैयार करने पर भी ध्यान देना होगा।
AI हार्डवेयर और स्किलिंग पर अधिक निवेश का उनका जोर इसी जरूरत से जुड़ा है। देश में प्रशिक्षित मानव संसाधन और मजबूत तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध होने पर विभिन्न उद्योगों और सेवाओं में नई तकनीकों को अपनाने की क्षमता बढ़ सकती है।इस तरह ‘संगम 2026’ में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भविष्य के इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश की दिशा बताते हुए AI, सेमीकंडक्टर और क्वांटम टेक्नोलॉजी को महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया। उन्होंने मौजूदा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने, AI हार्डवेयर में निवेश बढ़ाने और नई तकनीकों के लिए जरूरी स्किल्स विकसित करने पर जोर दिया।
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