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विवाद खत्म होने के संकेत, कंपनी के शेयर रॉकेट बने

Ratna Netam
4 Aug 2026 3:11 PM IST
विवाद खत्म होने के संकेत, कंपनी के शेयर रॉकेट बने
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बिजनेस : शेयर बाजार में मंगलवार को जहां अधिकांश सेक्टरों में बिकवाली का दबाव देखने को मिला, वहीं सिगरेट निर्माता कंपनी गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया के शेयरों ने शानदार प्रदर्शन कर निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। कारोबार के दौरान कंपनी के शेयर में करीब 8 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह लगभग 2,409 रुपये के स्तर तक पहुंच गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस तेजी की सबसे बड़ी वजह मोदी परिवार में लंबे समय से चल रहे उत्तराधिकार विवाद के सुलझने के संकेत हैं, जिससे कंपनी के भविष्य को लेकर निवेशकों का विश्वास मजबूत हुआ है।

दरअसल, कंपनी के निदेशक मंडल और मालिकाना ढांचे से जुड़े लंबे विवाद के बीच समीर मोदी ने अपनी मां और कंपनी की चेयरपर्सन बीना मोदी के खिलाफ दायर सभी कानूनी मामले और शिकायतें वापस लेने की घोषणा की है। इस फैसले को परिवार के भीतर सुलह की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। निवेशकों ने इसे सकारात्मक संकेत के रूप में लिया, जिसके बाद कंपनी के शेयरों में जोरदार खरीदारी देखने को मिली।

मोदी परिवार में उत्तराधिकार को लेकर विवाद नवंबर 2019 में परिवार के मुखिया के.के. मोदी के निधन के बाद शुरू हुआ था। यह विवाद परिवार के ट्रस्ट के नियंत्रण और संपत्तियों के बंटवारे को लेकर था। इसी ट्रस्ट के पास गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया में नियंत्रक हिस्सेदारी है। कंपनी भारत में अंतरराष्ट्रीय ब्रांड मार्लबोरो सहित कई प्रमुख सिगरेट ब्रांडों के निर्माण और विपणन से जुड़ी हुई है।

विवाद के दौरान समीर मोदी और पूर्व आईपीएल कमिश्नर ललित मोदी ने ट्रस्ट की प्रमुख बीना मोदी के नेतृत्व पर सवाल उठाए थे। उनका आरोप था कि परिवार के मुखिया के.के. मोदी द्वारा तय की गई ट्रस्ट डीड की शर्तों का सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा है। ट्रस्ट डीड में यह व्यवस्था थी कि परिवार का कारोबार आपसी सहमति से संचालित होगा और यदि सहमति नहीं बनती है तो संपत्तियों के निपटान की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसी मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के बीच कई वर्षों तक कानूनी लड़ाई चली।

यह विवाद मई 2024 में उस समय और अधिक सुर्खियों में आ गया था, जब कंपनी की बोर्ड बैठक के दौरान समीर मोदी ने अपने साथ मारपीट किए जाने का आरोप लगाया था। इसके बाद इस मामले में आपराधिक शिकायत भी दर्ज कराई गई। बाद में समीर मोदी को कंपनी के बोर्ड से हटा दिया गया था। अब उन्होंने स्पष्ट किया है कि उन्होंने अपनी मां के खिलाफ दर्ज सभी मुकदमे और शिकायतें वापस ले ली हैं और परिवार के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध स्थापित करना चाहते हैं।

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि परिवार के बीच विवाद पूरी तरह समाप्त हो जाता है तो कंपनी को लंबे समय तक कानूनी अनिश्चितता, बोर्ड स्तर की अस्थिरता और संभावित संपत्ति बिक्री जैसी चिंताओं से राहत मिल सकती है। यही वजह है कि इस घटनाक्रम के बाद निवेशकों का भरोसा बढ़ा और शेयरों में तेज खरीदारी देखने को मिली।

हालांकि कंपनी के हालिया वित्तीय नतीजे मिश्रित रहे हैं। गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के परिणामों में बताया कि अप्रैल-जून अवधि में उसका शुद्ध लाभ 44.3 प्रतिशत घटकर 198.39 करोड़ रुपये रह गया। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी का मुनाफा 356.28 करोड़ रुपये था। कंपनी ने मुनाफे में गिरावट का मुख्य कारण करों और उत्पाद शुल्क में बढ़ोतरी को बताया है।

इसके बावजूद कंपनी के कारोबार में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। जून तिमाही में परिचालन से होने वाला राजस्व बढ़कर 3,819.56 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 1,813.26 करोड़ रुपये था। समीक्षा अवधि के दौरान कंपनी ने लगभग 2,614 करोड़ रुपये का उत्पाद शुल्क भी जमा किया, जिससे राजस्व पर दबाव पड़ा और लाभ में कमी आई।

यदि शेयर के प्रदर्शन की बात करें तो गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया का शेयर फिलहाल अपने 52 सप्ताह के उच्च स्तर 3,945 रुपये से काफी नीचे कारोबार कर रहा है। हालांकि यह अपने 52 सप्ताह के निचले स्तर 1,832 रुपये से काफी ऊपर बना हुआ है, जो शेयर में बनी हुई मजबूती का संकेत देता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परिवार के भीतर विवाद का स्थायी समाधान निकलता है और कंपनी अपने परिचालन प्रदर्शन में सुधार बनाए रखती है, तो आने वाले समय में निवेशकों का भरोसा और मजबूत हो सकता है। फिलहाल बाजार की नजर कंपनी के प्रबंधन, भविष्य की रणनीति और आगामी तिमाहियों के वित्तीय प्रदर्शन पर बनी हुई है।

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