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बड़े UPI लेनदेन पर बढ़ सकता है खर्च दो हफ्ते में लागू हो सकता है MDR
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ₹2,000 या उससे अधिक के कुछ मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने की प्रक्रिया अगले दो हफ्तों में शुरू हो सकती है। हालांकि, यह चार्ज सीधे आम ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा, बल्कि व्यापारियों और पेमेंट सिस्टम से जुड़े पक्षों पर लागू होने की संभावना है।
MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क होता है, जो डिजिटल भुगतान को प्रोसेस करने के लिए बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर व्यापारियों से लेते हैं। अभी तक UPI पर जीरो MDR व्यवस्था लागू थी, जिसके कारण दुकानदारों और ग्राहकों को डिजिटल भुगतान के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना पड़ता था।
रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार की ओर से जल्द ही इस संबंध में अधिसूचना जारी की जा सकती है। इसके बाद नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) से जुड़ी समिति MDR की दर, दायरा और लागू होने वाले नियमों को तय कर सकती है।
इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य UPI इकोसिस्टम को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना बताया जा रहा है। UPI के इस्तेमाल में पिछले कुछ वर्षों में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है और इसके संचालन, सुरक्षा और तकनीकी ढांचे को बनाए रखने के लिए राजस्व मॉडल पर चर्चा की जा रही है। सरकार ने साफ किया है कि आम लोगों के लिए UPI भुगतान मुफ्त रहेगा। व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) ट्रांसफर और रोजमर्रा के छोटे डिजिटल भुगतान पर शुल्क लगाने की योजना नहीं है। MDR लागू होने की स्थिति में भी यह सीमित श्रेणी के व्यापारी लेनदेन तक ही सीमित रहने की बात कही गई है।
₹2,000 की सीमा को लेकर अभी भी अंतिम आधिकारिक नियमों का इंतजार है। कुछ रिपोर्ट्स में इसे संभावित सीमा बताया गया है, जबकि सरकार की ओर से अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद ही पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी। अगर MDR लागू होता है तो छोटे दुकानदारों और आम ग्राहकों पर इसका कितना असर पड़ेगा, यह तय नियमों और शुल्क की दर पर निर्भर करेगा। फिलहाल डिजिटल भुगतान करने वाले यूजर्स के लिए राहत की बात यह है कि UPI को आम जनता के लिए मुफ्त रखने का आश्वासन दिया गया है।
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