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जुलाई के पहले पखवाड़े में पेट्रोल-डीजल की बिक्री में तेज उछाल, कम बारिश से बढ़ी मांग

Kavita2
16 July 2026 2:23 PM IST
जुलाई के पहले पखवाड़े में पेट्रोल-डीजल की बिक्री में तेज उछाल, कम बारिश से बढ़ी मांग
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नई दिल्ली: जुलाई के पहले पखवाड़े में देश की सरकारी तेल विपणन कंपनियों (ऑयल मार्केटिंग कंपनियों) की पेट्रोल और डीजल की बिक्री में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। शुरुआती बिक्री के आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में इस बार ईंधन की मांग में तेज वृद्धि देखने को मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि सामान्य से कम मानसूनी बारिश और परिवहन गतिविधियों में तेजी इस बढ़ोतरी की प्रमुख वजह रही है।

आंकड़ों के मुताबिक, 1 से 15 जुलाई के बीच पेट्रोल की बिक्री 22.9 प्रतिशत बढ़कर 1.64 मिलियन टन तक पहुंच गई। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 1.33 मिलियन टन था। बिक्री में यह वृद्धि देश में ईंधन की मांग के मजबूत बने रहने का संकेत देती है।

कम बारिश का दिखा असर

विशेषज्ञों के अनुसार, जुलाई के शुरुआती दिनों में कई राज्यों में सामान्य से कम बारिश होने के कारण परिवहन और कृषि गतिविधियां प्रभावित नहीं हुईं। आमतौर पर भारी बारिश के दौरान सड़क परिवहन और निजी वाहनों का उपयोग कुछ हद तक कम हो जाता है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ।

कम वर्षा के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि कार्यों के लिए ट्रैक्टर, पंपसेट और अन्य डीजल चालित उपकरणों का उपयोग बढ़ा। वहीं, शहरी क्षेत्रों में भी निजी वाहनों की आवाजाही सामान्य से अधिक बनी रही, जिससे पेट्रोल और डीजल दोनों की मांग में इजाफा हुआ।

पेट्रोल की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि

सरकारी तेल कंपनियों के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, 1 से 15 जुलाई के बीच पेट्रोल की बिक्री 1.64 मिलियन टन रही, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले करीब 22.9 प्रतिशत अधिक है।

यह वृद्धि बताती है कि देश में निजी वाहनों के उपयोग के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियां भी गति पकड़ रही हैं। छुट्टियों, व्यावसायिक यात्राओं और स्थानीय परिवहन की बढ़ती जरूरतों ने भी पेट्रोल की खपत बढ़ाने में योगदान दिया।

डीजल की मांग भी बढ़ी

पेट्रोल के साथ-साथ डीजल की मांग में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। डीजल का उपयोग माल परिवहन, कृषि, औद्योगिक गतिविधियों और सार्वजनिक परिवहन में बड़े पैमाने पर होता है।

कृषि सीजन के दौरान सिंचाई और खेतों में मशीनों के संचालन के लिए डीजल की खपत बढ़ जाती है। इसके अलावा, माल ढुलाई में वृद्धि के कारण भी डीजल की मांग मजबूत बनी हुई है।

आर्थिक गतिविधियों का सकारात्मक संकेत

ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि ईंधन की बढ़ती बिक्री देश की आर्थिक गतिविधियों में मजबूती का संकेत भी मानी जाती है। जब उद्योग, व्यापार और परिवहन क्षेत्र सक्रिय रहते हैं, तो पेट्रोल और डीजल की खपत स्वाभाविक रूप से बढ़ती है।

सरकारी तेल कंपनियों की बिक्री में आई तेजी से यह संकेत मिलता है कि उपभोक्ता मांग और व्यावसायिक गतिविधियां लगातार बनी हुई हैं।

सरकारी तेल कंपनियों की भूमिका

देश में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति मुख्य रूप से सरकारी तेल विपणन कंपनियां करती हैं। इनमें इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियां शामिल हैं।

इन कंपनियों के बिक्री आंकड़े देश में ईंधन की मांग और आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण संकेतक माने जाते हैं। शुरुआती आंकड़ों के आधार पर यह अनुमान लगाया जाता है कि पूरे महीने के दौरान मांग का रुख कैसा रह सकता है।

आगे भी बनी रह सकती है मांग

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून की स्थिति सामान्य रहती है और आर्थिक गतिविधियां इसी तरह जारी रहती हैं, तो जुलाई के शेष दिनों में भी पेट्रोल और डीजल की मांग मजबूत बनी रह सकती है।

हालांकि, आने वाले दिनों में बारिश की तीव्रता, कृषि गतिविधियों की रफ्तार और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें भी ईंधन की खपत को प्रभावित कर सकती हैं।

फिलहाल, जुलाई के पहले पंद्रह दिनों के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि देश में पेट्रोल और डीजल की मांग में उल्लेखनीय तेजी आई है। कम बारिश, कृषि कार्यों की निरंतरता और परिवहन क्षेत्र की सक्रियता ने सरकारी तेल कंपनियों की बिक्री को मजबूती प्रदान की है। आने वाले दिनों में भी बाजार की नजर ईंधन की मांग और मानसून की स्थिति पर बनी रहेगी।

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