व्यापार
सेंसेक्स 1,200 अंक से ज्यादा उछला, निफ्टी ने फिर पाया 23,800 का स्तर
Tara Tandi
3 Nov 2026 4:14 PM IST

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मुंबई: मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में जोरदार तेजी रही। लगातार चौथे कारोबारी सत्र में बाजार बढ़त के साथ बंद हुआ। निवेशकों ने कंपनियों के शानदार नतीजों का स्वागत किया और अपना ध्यान उन ग्लोबल AI-लिंक्ड शेयरों से हटा लिया, जो हाल ही में दबाव में थे।
सेंसेक्स 1,225.07 अंक (1.62%) उछलकर 76,917.85 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 370.05 अंक (1.58%) की बढ़त के साथ 23,810.85 पर बंद हुआ।
निफ्टी के तकनीकी आउटलुक पर विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा रिकवरी उत्साहजनक है, हालांकि 23,800–23,900 के दायरे में निफ्टी को रुकावट (रेजिस्टेंस) का सामना करना पड़ सकता है।
विश्लेषकों ने कहा, "अगर बाजार में थोड़ी गिरावट (पुलबैक) आती है, तो 23,200–23,500 का दायरा तुरंत सपोर्ट का काम कर सकता है। हमारी सलाह है कि उन शेयरों पर ध्यान दें जो मजबूत प्रदर्शन कर रहे हैं। साथ ही, ग्लोबल घटनाओं से जुड़ी अनिश्चितताओं को देखते हुए, ओवरनाइट रिस्क मैनेजमेंट को लेकर सतर्क रहना जरूरी है।"
घरेलू कंपनियों के अच्छे तिमाही नतीजों के कारण बाजार का सेंटिमेंट सकारात्मक बना रहा। वहीं, ग्लोबल टेक्नोलॉजी और AI-लिंक्ड शेयरों में कमजोरी के चलते निवेशक पारंपरिक क्षेत्रों और बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं।
निफ्टी में शामिल शेयरों में BSE, नेस्ले इंडिया और टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स सबसे ज्यादा बढ़त के साथ टॉप गेनर रहे, जिससे बेंचमार्क इंडेक्स को ऊपर जाने में मदद मिली।
व्यापक बाजार (ब्रॉडर मार्केट) भी सकारात्मक दायरे में बंद हुआ, हालांकि मुख्य सूचकांकों की तुलना में इसमें बढ़त थोड़ी कम रही। निफ्टी मिडकैप 100 में 1.06% और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.31% की तेजी आई।
सेक्टर के हिसाब से देखें तो FMCG शेयरों ने तेजी का नेतृत्व किया, और निफ्टी FMCG इंडेक्स में लगभग 3% का उछाल आया। कंपनियों की कमाई और मांग को लेकर सकारात्मक उम्मीदों के चलते निवेशकों ने कंज्यूमर गुड्स कंपनियों के शेयर खरीदे।
इसके विपरीत, निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स इस सत्र में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा। व्यापक बाजार में तेजी के बावजूद, यह इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि आज की बढ़त ने बेंचमार्क सूचकांकों को हालिया तेजी को और आगे बढ़ाने में मदद की है। बेहतर होती कॉर्पोरेट कमाई, स्थिर घरेलू मैक्रोइकॉनॉमिक हालात और वैश्विक निवेश प्रवाह में बदलाव, इन सभी कारकों से भारतीय शेयर बाजार को लगातार समर्थन मिल रहा है।
इस बीच, रुपया भी सकारात्मक रुख के साथ कारोबार कर रहा था और लगभग 0.15 प्रतिशत की बढ़त के साथ 94.74 पर पहुंच गया। कमोडिटी की कीमतों में नरमी आने से आयात बिल को लेकर चिंताएं कम हुईं, जिससे घरेलू मुद्रा को सहारा मिला।
विश्लेषकों का मानना है कि आगे चलकर रुपये की चाल कमोडिटी की कीमतों, डॉलर के वैश्विक रुझान और विदेशी फंड के प्रवाह पर निर्भर करेगी। साथ ही, पूंजी के बेहतर प्रवाह की उम्मीदें भी भारतीय मुद्रा को कुछ हद तक समर्थन दे सकती हैं।
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