
Mumbai मुंबई : भारतीय शेयर बाजार में बुधवार के शुरुआती कारोबार में मजबूती देखने को मिली। सेंसेक्स 657.22 अंकों की बढ़त के साथ 77,675.01 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 218 अंकों की तेजी के साथ 24,250.85 पर कारोबार करता दिखाई दिया। यह तेजी पिछले सत्र में आई गिरावट के बाद एक मजबूत रिकवरी के रूप में देखी जा रही है।
मंगलवार को भारतीय इक्विटी बाजारों में गिरावट दर्ज की गई थी। उस समय पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर निवेशकों की भावना पर पड़ा था, जिसके चलते बैंकिंग, रियल्टी और तेल एवं गैस सेक्टर में भारी बिकवाली देखने को मिली थी। निफ्टी 86.50 अंक या 0.36 प्रतिशत गिरकर 24,032.80 पर बंद हुआ था, जबकि सेंसेक्स 251.61 अंक या 0.33 प्रतिशत टूटकर 77,017.79 पर बंद हुआ था।
बाजार में पूरे दिन दबाव बना रहा और पिछले सत्र की बढ़त खत्म हो गई थी। सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो बैंकिंग, रियल एस्टेट और तेल एवं गैस सेक्टर सबसे अधिक दबाव में रहे, जो वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और ऊर्जा बाजार में अस्थिरता को दर्शाता है। हालांकि, ऑटो और FMCG सेक्टर ने मजबूती दिखाई और बाजार को कुछ सहारा दिया।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में हल्की तेजी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.17 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.28 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए। इससे संकेत मिला कि व्यापक बाजार में भी चुनिंदा खरीदारी जारी रही।
विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण बाजार में सतर्कता बनी हुई है। रिपोर्ट्स में बताया गया है कि अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज स्ट्रेट के पास गोलीबारी जैसी घटनाएं सामने आई हैं, जिससे क्षेत्रीय अस्थिरता को लेकर चिंता बढ़ी है। यह इलाका वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, और किसी भी तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ता है।
रुपये में भी कमजोरी जारी रही और यह 95.30 के स्तर के आसपास कारोबार करता दिखा। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, जो 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई है, ने मुद्रा पर अतिरिक्त दबाव डाला है।
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले समय में बाजार की दिशा मुख्य रूप से भू-राजनीतिक घटनाक्रम और कॉर्पोरेट अर्निंग्स पर निर्भर करेगी। साथ ही इस सप्ताह आने वाले अमेरिकी रोजगार आंकड़े, विशेषकर नॉन-फार्म पेरोल और बेरोजगारी डेटा, भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कुल मिलाकर, बाजार में फिलहाल उतार-चढ़ाव और सतर्कता का माहौल बना हुआ है, जहां निवेशक वैश्विक संकेतों और आर्थिक डेटा पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।





