व्यापार

सेबी की चेतावनी: CEO बनकर ठगी का नया ‘बॉस स्कैम’

Kavita2
18 July 2026 10:56 AM IST
सेबी की चेतावनी: CEO बनकर ठगी का नया ‘बॉस स्कैम’
x

नई दिल्ली : मार्केट रेगुलेटर भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने रेगुलेटेड संस्थाओं और लिस्टेड कंपनियों को एक नए साइबर फ्रॉड ‘बॉस स्कैम’ को लेकर सतर्क किया है। इस स्कैम में साइबर अपराधी कंपनियों के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO), मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) या अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की पहचान का इस्तेमाल कर कर्मचारियों और फाइनेंस टीमों को धोखा देते हैं और उनसे पैसे ट्रांसफर करवाने की कोशिश करते हैं।

सेबी ने शुक्रवार को जारी एडवाइजरी में कहा कि कंपनियों को इस तरह के साइबर हमलों से बचने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। रेगुलेटर ने बताया कि धोखेबाज अब पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो रहा है।

यह एडवाइजरी इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) की ओर से जारी चेतावनी के बाद सामने आई है। I4C ने संगठनों को निशाना बनाकर किए जा रहे ऐसे मामलों में बढ़ोतरी की ओर ध्यान दिलाया है, जिनमें साइबर अपराधी CEO या कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों का रूप धारण कर कर्मचारियों से वित्तीय लेनदेन करवाने की कोशिश करते हैं।

सेबी के अनुसार, इस तरह के मामलों में ठग कंपनी के किसी वरिष्ठ अधिकारी की तरह व्यवहार करते हैं। वे ईमेल, व्हाट्सऐप, माइक्रोसॉफ्ट Teams या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से कर्मचारियों से संपर्क करते हैं। इसके बाद वे तत्काल भुगतान या किसी खास बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करने का निर्देश देते हैं।

साइबर अपराधी अक्सर ऐसी परिस्थितियां बनाने की कोशिश करते हैं, जिससे कर्मचारी दबाव में आकर बिना जांच-पड़ताल के निर्देशों का पालन कर दें। वे जरूरी भुगतान, गोपनीय प्रोजेक्ट, आपात स्थिति या वरिष्ठ अधिकारी के निर्देश का हवाला देकर जल्द से जल्द पैसे भेजने के लिए कहते हैं।

सेबी ने बताया कि कुछ मामलों में ठग अपनी पहचान को विश्वसनीय दिखाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इनमें वॉयस क्लोनिंग और डीपफेक वीडियो कॉल जैसी तकनीकें शामिल हैं। इसके माध्यम से अपराधी किसी वरिष्ठ अधिकारी की आवाज या वीडियो जैसी नकली सामग्री तैयार कर कर्मचारियों को भ्रमित कर सकते हैं।

AI तकनीक के इस्तेमाल ने साइबर धोखाधड़ी के तरीकों को और जटिल बना दिया है। पहले जहां केवल फर्जी ईमेल या संदेशों के जरिए ठगी की जाती थी, वहीं अब अपराधी वास्तविक जैसी आवाज और वीडियो तैयार कर लोगों को विश्वास दिलाने की कोशिश कर रहे हैं।

सेबी ने कंपनियों को सलाह दी है कि वे वित्तीय लेनदेन से जुड़े अपने आंतरिक सुरक्षा उपायों को मजबूत करें। किसी भी बड़े भुगतान या संवेदनशील निर्देश को लागू करने से पहले उचित सत्यापन प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।

रेगुलेटर ने कहा कि कर्मचारियों को इस तरह के साइबर फ्रॉड के तरीकों के बारे में जागरूक करना जरूरी है। कंपनियों को नियमित रूप से साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण आयोजित करने चाहिए, ताकि कर्मचारी संदिग्ध संदेशों, कॉल और ईमेल की पहचान कर सकें।

विशेषज्ञों का कहना है कि ‘बॉस स्कैम’ जैसे फ्रॉड में अपराधी तकनीक के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक दबाव का भी इस्तेमाल करते हैं। वे वरिष्ठ अधिकारी की पहचान का फायदा उठाकर कर्मचारियों को जल्दी फैसला लेने के लिए मजबूर करते हैं। ऐसे में किसी भी वित्तीय निर्देश को लागू करने से पहले स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना बेहद जरूरी है।

सेबी ने यह भी संकेत दिया है कि कंपनियों को केवल तकनीकी सुरक्षा उपायों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि कर्मचारियों के बीच साइबर जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है। मजबूत पासवर्ड, दो-स्तरीय प्रमाणीकरण और भुगतान प्रक्रिया में कई स्तरों की मंजूरी जैसे कदम जोखिम को कम कर सकते हैं।

I4C की चेतावनी के अनुसार, ऐसे साइबर अपराधों में लगातार बदलाव आ रहा है और अपराधी नए तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसलिए संस्थानों को अपनी साइबर सुरक्षा रणनीति को समय के साथ अपडेट करते रहना होगा।

वित्तीय संस्थानों और सूचीबद्ध कंपनियों के लिए यह खतरा अधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि इनमें बड़े पैमाने पर धन का लेनदेन होता है। किसी एक गलत निर्देश के कारण कंपनी को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

सेबी की इस चेतावनी का उद्देश्य कंपनियों को समय रहते सतर्क करना और संभावित वित्तीय नुकसान से बचाना है। रेगुलेटर ने सभी संबंधित संस्थाओं से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध अनुरोध की तुरंत जांच करें और साइबर सुरक्षा नियमों का पालन करें।

बढ़ते डिजिटल लेनदेन और AI आधारित तकनीकों के दौर में साइबर सुरक्षा अब कंपनियों की प्राथमिक जरूरत बन गई है। ‘बॉस स्कैम’ जैसे नए खतरे यह संकेत देते हैं कि संगठनों को तकनीकी सुरक्षा के साथ-साथ कर्मचारियों की सतर्कता पर भी लगातार ध्यान देना होगा।

Next Story