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Mumbai मुंबई। बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने मंगलवार को एजुकेशनल कंटेट के लिए लिस्टेड कंपनियों का मार्केट डेटा जैसे स्टॉक की कीमत को 30 दिनों की देरी के साथ साझा करने का प्रस्ताव दिया है। इसके नए नियम के जरिए सेबी की कोशिश निवेशकों को सुरक्षित रखते हुए क्रिएटर्स और मार्केट ट्रेनर्स को एजुकेशनल के लिए सही डेटा उपलब्ध कराना है। एक परामर्श पत्र में, बाजार नियामक ने कहा कि यह प्रस्ताव शिक्षा के लिए शेयर मूल्य डेटा के उपयोग संबंधी मौजूदा नियमों से उत्पन्न भ्रम को दूर करने का प्रयास करता है।
सेबी ने कहा, "यह प्रस्ताव है कि शैक्षिक और जागरूकता गतिविधियों के लिए मूल्य डेटा साझा करने और उपयोग करने दोनों के लिए 30 दिनों की देरी की एकसमान समयावधि लागू की जाए। बाजार नियामक ने आगे कहा,“केवल शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत व्यक्ति जनवरी 2025 के परिपत्र में उल्लिखित निषिद्ध गतिविधियों के प्रावधानों का पालन करना जारी रखेंगे और उपर्युक्त परिपत्रों के अन्य सभी प्रावधान अपरिवर्तित रहेंगे। नियामक ने इस प्रस्ताव पर 27 जनवरी, 2026 तक जनता से टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।
वर्तमान में, शैक्षिक उद्देश्यों के लिए मूल्य डेटा के उपयोग को लेकर सेबी के दो अलग-अलग परिपत्र लागू हैं। मई 2024 में जारी एक परिपत्र के अनुसार, शेयर बाजार कम से कम एक दिन की देरी से शैक्षिक और जागरूकता गतिविधियों के लिए मूल्य डेटा साझा कर सकते हैं। हालांकि, जनवरी 2025 में जारी एक अन्य परिपत्र में कहा गया है कि विशुद्ध रूप से शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाएं मूल्य डेटा का उपयोग तभी कर सकती हैं जब वह कम से कम तीन महीने पुराना हो।
सेबी ने स्वीकार किया कि यद्यपि दोनों परिपत्र अलग-अलग कारणों से जारी किए गए थे, लेकिन उनके समानांतर जारी होने से बाजार प्रतिभागियों और शिक्षकों के बीच अनिश्चितता पैदा हो गई है। सेबी ने स्पष्ट किया कि शैक्षिक सामग्री के लिए लाइव या लगभग वास्तविक समय के मूल्य डेटा के उपयोग की अनुमति देने से निवेशक शिक्षा और निवेश सलाहकार या अनुसंधान जैसी विनियमित गतिविधियों के बीच की रेखा धुंधली हो सकती है। नियामक ने कहा कि भविष्य के उतार-चढ़ाव का अनुमान लगाने के लिए वर्तमान बाजार मूल्यों का विश्लेषण करना सलाहकार कार्यों के अंतर्गत आता है, जिसके लिए नियामक निगरानी आवश्यक है।
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