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New Delhi नई दिल्ली, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने शुक्रवार को अपनी बोर्ड बैठक के बाद कई नियामकीय बदलावों की घोषणा की, जिसमें आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) की योजना बना रही बड़ी कंपनियों के लिए न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (एमपीएस) मानदंडों में बड़ी ढील शामिल है। सेबी की विज्ञप्ति के अनुसार, 50,000 करोड़ रुपये से 1 लाख करोड़ रुपये के बाजार पूंजीकरण वाली कंपनियों को अब सार्वजनिक शेयरधारिता की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अधिक समय मिलेगा।
उन्हें सूचीबद्ध होने के पाँच वर्षों के भीतर 15 प्रतिशत एमपीएस और 10 वर्षों के भीतर 25 प्रतिशत एमपीएस हासिल करना होगा। वर्तमान में, कंपनियों को तीन वर्षों के भीतर 25 प्रतिशत की सीमा पूरी करनी होती है। इस कदम से धन उगाहना आसान होने और कंपनियों पर बड़ी हिस्सेदारी तुरंत बेचने का दबाव कम होने की उम्मीद है, जो अक्सर शेयर कीमतों को प्रभावित करता है।
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