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SEBI action : राजेश एक्सपोर्ट्स के प्रमोटर राजेश मेहता पर ट्रेडिंग बैन

Kavita2
4 Jun 2026 11:22 AM IST
SEBI action : राजेश एक्सपोर्ट्स के प्रमोटर राजेश मेहता पर ट्रेडिंग बैन
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Business बिजनेस: पूंजी बाजार नियामक सेबी ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए बेंगलुरु स्थित आभूषण निर्माता कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड के प्रमोटर और सीईओ राजेश मेहता को कंपनी की प्रतिभूतियों में लेनदेन करने से रोक दिया है। सेबी ने उन पर वित्तीय विवरणों में बड़े पैमाने पर गलत बयानी और धन के हेरफेर का आरोप लगाया है।

नियामक के अनुसार, कंपनी के समेकित राजस्व का लगभग 97 से 99 प्रतिशत हिस्सा विदेशी सहायक कंपनियों से आता है, विशेष रूप से स्विट्जरलैंड स्थित वालकैम्बी एसए से। हालांकि, सेबी ने आरोप लगाया कि कंपनी ने अपनी सहायक इकाइयों की वित्तीय स्थिति और गतिविधियों का सार्वजनिक रूप से पर्याप्त और पारदर्शी खुलासा नहीं किया।

सेबी की जांच में दावा किया गया है कि राजेश एक्सपोर्ट्स ने वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच लगभग 15.15 लाख करोड़ रुपये के राजस्व को गलत तरीके से प्रस्तुत किया। नियामक का कहना है कि यह आंकड़ा सहायक कंपनियों से आने वाले राजस्व का लगभग 99.80 प्रतिशत हिस्सा दर्शाता है, जिसे गलत और भ्रामक तरीके से दर्शाया गया है।

सेबी ने यह भी आरोप लगाया कि कंपनी की लेखा पुस्तकों में कुछ प्रविष्टियाँ वास्तविक आर्थिक गतिविधियों पर आधारित नहीं थीं। नियामक के अनुसार, ये एंट्रीज कथित तौर पर राजेश मेहता के व्यक्तिगत डेरिवेटिव ट्रेडों से जुड़ी थीं, जिनका उपयोग कंपनी के टर्नओवर को कृत्रिम रूप से बढ़ाने के लिए किया गया।

नियामक ने कहा कि इस तरह की गतिविधियों से निवेशकों को कंपनी की वास्तविक वित्तीय स्थिति के बारे में गलत जानकारी मिली और बाजार में पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। सेबी का मानना है कि इस प्रकार की वित्तीय गड़बड़ियाँ बाजार की विश्वसनीयता को प्रभावित करती हैं और निवेशकों के हितों के खिलाफ हैं।

इस कार्रवाई के तहत राजेश मेहता को तत्काल प्रभाव से कंपनी की प्रतिभूतियों में किसी भी प्रकार के लेनदेन से रोक दिया गया है। साथ ही सेबी ने मामले की आगे विस्तृत जांच शुरू कर दी है।

नियामक ने संकेत दिया है कि यदि आरोप साबित होते हैं तो कंपनी और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ और भी सख्त कानूनी और वित्तीय कार्रवाई की जा सकती है।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों से निवेशकों का भरोसा प्रभावित होता है और नियामक संस्थाओं की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। अब निवेशकों की नजर सेबी की आगे की जांच और संभावित कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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