
Mumbai मुंबई : शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 19 पैसे की मजबूती के साथ 95.16 के स्तर पर पहुंच गया। विदेशी मुद्रा बाजार में यह बढ़त उस समय दर्ज की गई जब डॉलर इंडेक्स अपने हाल के 15 महीने के उच्चतम स्तर से नीचे आ गया। हालांकि इसके बावजूद रुपये पर दबाव बना हुआ है, जिसका मुख्य कारण आयातकों और कॉरपोरेट हेजर्स की ओर से लगातार बनी मजबूत डॉलर मांग को बताया जा रहा है।
इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 95.20 पर खुला और कारोबार के दौरान यह 95.16 के स्तर तक पहुंच गया। यह पिछले बंद स्तर 95.35 की तुलना में 19 पैसे की बढ़त को दर्शाता है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक संकेतों में हल्की कमजोरी के बावजूद घरेलू मांग रुपये पर असर डाल रही है।
गुरुवार के कारोबारी सत्र में रुपया शुरुआती बढ़त बनाए रखने में असफल रहा और अंततः अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 19 पैसे की गिरावट के साथ 95.35 पर बंद हुआ था। लगातार उतार-चढ़ाव के बीच मुद्रा बाजार में अस्थिरता बनी हुई है और निवेशक वैश्विक संकेतों पर नजर बनाए हुए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, डॉलर इंडेक्स में गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आमतौर पर रुपये को समर्थन देती है, लेकिन मौजूदा स्थिति में मजबूत आयात मांग इस लाभ को सीमित कर रही है। इसके चलते रुपये की मजबूती अपेक्षाकृत कमजोर दिखाई दे रही है।
फॉरेक्स ट्रेडर्स का कहना है कि बाजार में दो विपरीत कारक काम कर रहे हैं। एक ओर कमजोर डॉलर इंडेक्स और कच्चे तेल की कम कीमतें रुपये के लिए सहायक हैं, वहीं दूसरी ओर आयातकों की लगातार डॉलर खरीद और कॉरपोरेट हेजिंग गतिविधियां इसे दबाव में रख रही हैं।
सीआर फॉरेक्स एडवाइजर्स के मैनेजिंग डायरेक्टर अमित पाबारी ने कहा कि यदि सकारात्मक वैश्विक संकेतों के बावजूद रुपया मजबूती नहीं दिखाता है, तो किसी भी नकारात्मक विकास की स्थिति में USD/INR जोड़ी 95.80 से 96.00 के दायरे की ओर तेजी से बढ़ सकती है। उनके अनुसार बाजार में फिलहाल असंतुलन की स्थिति बनी हुई है।
डॉलर इंडेक्स में हाल की गिरावट के बावजूद भारतीय मुद्रा बाजार में स्थिरता नहीं बन पा रही है, क्योंकि घरेलू स्तर पर डॉलर की मांग काफी मजबूत बनी हुई है। आयात बिल और अंतरराष्ट्रीय भुगतान की जरूरतों के चलते कंपनियां लगातार डॉलर की खरीद कर रही हैं, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक संकेतों के साथ-साथ घरेलू मांग में संतुलन नहीं आता, तब तक रुपये में बड़ी मजबूती की संभावना सीमित रहेगी। बाजार प्रतिभागी अब आने वाले आर्थिक आंकड़ों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतिगत टिप्पणियों पर नजर बनाए हुए हैं।
वर्तमान स्थिति में मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है और निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं। रुपये की दिशा आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों पर काफी हद तक निर्भर करेगी।





