
नई दिल्ली। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया सोमवार को कमजोर होकर बंद हुआ। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और घरेलू शेयर बाजार में गिरावट के कारण रुपये पर दबाव देखने को मिला। इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में रुपया 19 पैसे की गिरावट के साथ 95.61 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ।
शुक्रवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.42 के स्तर पर बंद हुआ था। सोमवार को कारोबार शुरू होने के साथ ही रुपये पर दबाव नजर आया और दिनभर सीमित दायरे में कारोबार करने के बाद यह गिरावट के साथ बंद हुआ।
शुरुआती कारोबार में रुपया 95.50 पर खुला
फॉरेक्स मार्केट में सोमवार को रुपया 95.50 के स्तर पर खुला। दिन के कारोबार के दौरान रुपया 95.49 से 95.62 के बीच रहा।
कारोबार के अंत में स्थानीय मुद्रा 95.61 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुई। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक परिस्थितियों और घरेलू बाजार की चाल का असर भारतीय मुद्रा पर लगातार बना हुआ है।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का दबाव
फॉरेक्स ट्रेडर्स के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी रुपये के लिए चिंता का कारण बनी हुई है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का आयात करता है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो देश का आयात बिल बढ़ जाता है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव आता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी जारी रहती है तो आने वाले दिनों में रुपये की चाल पर इसका असर दिखाई दे सकता है।
अमेरिका-ईरान स्थिति पर बाजार की नजर
बाजार विशेषज्ञों ने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर अनिश्चितता भी वैश्विक बाजारों को प्रभावित कर रही है।
यदि दोनों देशों के बीच बातचीत में देरी होती है या तनाव बढ़ता है तो इसका असर तेल बाजार पर पड़ सकता है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
ऐसी परिस्थितियों में निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करते हैं, जिससे अमेरिकी डॉलर को मजबूती मिलती है और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव बढ़ता है।
घरेलू शेयर बाजार में कमजोरी का असर
रुपये में गिरावट का एक कारण घरेलू शेयर बाजार में कमजोरी भी रही। सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में दबाव देखने को मिला, जिससे विदेशी निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई।
शेयर बाजार में गिरावट के दौरान विदेशी निवेशकों की ओर से बिकवाली बढ़ सकती है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ती है। इसका सीधा असर रुपये की कीमत पर पड़ता है।
डॉलर को मिला मजबूत समर्थन
फॉरेक्स विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी डॉलर को वैश्विक स्तर पर मजबूती मिल रही है। डॉलर की मजबूती के कारण दुनिया की कई अन्य मुद्राओं पर भी दबाव देखा जा रहा है।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े संकेतों और वैश्विक निवेशकों की बदलती रणनीति के कारण डॉलर की मांग बनी हुई है।
आगे कैसी रह सकती है रुपये की चाल?
फॉरेक्स ट्रेडर्स का मानना है कि आने वाले दिनों में रुपया कमजोर रुख के साथ कारोबार कर सकता है। हालांकि, बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच कई घरेलू और वैश्विक कारक रुपये की दिशा तय करेंगे।
विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी डॉलर की मजबूती, विदेशी निवेश का रुख और वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम रुपये के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।
यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और डॉलर मजबूत रहता है तो रुपये पर दबाव जारी रह सकता है।
रिजर्व बैंक की भूमिका अहम
भारतीय रिजर्व बैंक रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए बाजार पर नजर रखता है। जरूरत पड़ने पर केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है।
हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि रुपये की चाल मुख्य रूप से वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और बाजार की मांग-आपूर्ति पर निर्भर करेगी।
फिलहाल भारतीय मुद्रा पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, डॉलर की मजबूती और घरेलू बाजार की कमजोरी का असर देखने को मिल रहा है। आने वाले सत्रों में निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों और आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी।





