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Shri Ram जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की भूमिका

Kanchan Paikara
18 Jun 2026 3:12 PM IST
Shri Ram जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की भूमिका
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सुरक्षा एजेंसियां मिलकर काम करती हैं।

Ram Mandir Donation: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में रोजाना लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। बड़ी संख्या में भक्त यहां नकद, चेक और ऑनलाइन माध्यम से दान और चढ़ावा अर्पित करते हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि इस करोड़ों रुपये के चढ़ावे की गिनती और उसका हिसाब-किताब कौन संभालता है और पूरी प्रक्रिया कैसे काम करती है।

राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे की पूरी व्यवस्था श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नियंत्रण में होती है। यह ट्रस्ट मंदिर निर्माण और संचालन से जुड़े सभी आर्थिक कार्यों की देखरेख करता है। मंदिर परिसर में स्थापित दान पेटियों से लेकर बैंक खातों तक, हर स्तर पर पारदर्शिता बनाए रखने के लिए एक व्यवस्थित प्रणाली अपनाई गई है।

मंदिर में रखी गई दान पेटियों को निश्चित समय अंतराल पर खोला जाता है। इस दौरान ट्रस्ट के सदस्य, बैंक प्रतिनिधि और सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी में पूरी गिनती की प्रक्रिया की जाती है। नकद राशि की गिनती विशेष मशीनों की मदद से की जाती है ताकि किसी प्रकार की त्रुटि या गड़बड़ी की संभावना न रहे।

राम मंदिर में दान राशि के प्रबंधन के लिए बैंकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) जैसी प्रमुख बैंकिंग संस्थाएं ट्रस्ट के साथ मिलकर इस पूरी प्रक्रिया को संभालती हैं। नकद राशि को गिनने के बाद उसे सीधे बैंक खातों में जमा किया जाता है और डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाता है। इससे हर लेन-देन का पूरा विवरण सुरक्षित रहता है।

इसके अलावा, ऑनलाइन दान की व्यवस्था भी उपलब्ध है, जिसमें श्रद्धालु सीधे बैंकिंग माध्यम से योगदान करते हैं। इस प्रक्रिया में पूरा पैसा सीधे ट्रस्ट के खाते में जाता है, जिससे पारदर्शिता और बढ़ जाती है। डिजिटल ट्रांजैक्शन के कारण अब बड़ी मात्रा में दान का रिकॉर्ड आसानी से सुरक्षित रखा जा रहा है।

ट्रस्ट की ओर से यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि हर दान का उपयोग मंदिर निर्माण, रखरखाव और सामाजिक कार्यों में ही किया जाए। समय-समय पर आय और खर्च का विवरण सार्वजनिक भी किया जाता है ताकि श्रद्धालुओं का भरोसा बना रहे।

राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गिनती और प्रबंधन एक अत्यंत व्यवस्थित और निगरानी युक्त प्रक्रिया है, जिसमें बैंक, ट्रस्ट और सुरक्षा एजेंसियां मिलकर काम करती हैं। इससे यह सुनिश्चित होता है कि श्रद्धालुओं द्वारा दिया गया हर योगदान सुरक्षित और सही तरीके से उपयोग में लाया जाए।

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