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लोन की EMI बढ़ने का खतरा इन 2 बैंकों ने महंगा किया कर्ज

Ratna Netam
12 Aug 2026 5:43 PM IST
लोन की EMI बढ़ने का खतरा इन 2 बैंकों ने महंगा किया कर्ज
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नई दिल्ली : बैंक से लोन लेने वाले ग्राहकों के लिए अहम खबर है। बैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक ने अपनी मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट यानी MCLR में बदलाव किया है। दोनों बैंकों ने कुछ चुनिंदा अवधि के लोन के लिए MCLR में बढ़ोतरी की है। नई दरें 12 अगस्त 2026 से लागू होने की जानकारी दी गई है। इस बदलाव का असर उन ग्राहकों पर पड़ सकता है, जिनका लोन MCLR से जुड़ा हुआ है। ऐसे ग्राहकों की ब्याज दर बढ़ने पर EMI बढ़ सकती है या फिर लोन की अवधि लंबी हो सकती है।
MCLR वह न्यूनतम ब्याज दर है, जिसके आधार पर बैंक कुछ तरह के फ्लोटिंग रेट वाले लोन की ब्याज दर तय करते हैं। इसे भारतीय रिजर्व बैंक की व्यवस्था के तहत लागू किया गया था। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि MCLR में बदलाव का असर हर लोन ग्राहक पर एक जैसा नहीं होता। यह इस बात पर निर्भर करता है कि ग्राहक का लोन किस बेंचमार्क से जुड़ा है और उसका रीसेट कब होता है।
केनरा बैंक ने कुछ चुनिंदा अवधि के MCLR में 5 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की है। रिपोर्ट के मुताबिक, एक महीने की MCLR दर 8 प्रतिशत से बढ़कर 8.05 प्रतिशत हो गई है। इसी तरह तीन महीने की MCLR 8.25 प्रतिशत से बढ़कर 8.30 प्रतिशत कर दी गई है। एक साल की MCLR में भी 5 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी के बाद दर 8.75 प्रतिशत से बढ़कर 8.80 प्रतिशत हो गई है। दो साल की MCLR 9.05 प्रतिशत से बढ़कर 9.10 प्रतिशत हो गई है।
MCLR में बदलाव का सीधा असर उन उधारकर्ताओं पर पड़ सकता है, जिनके लोन की ब्याज दर इसी बेंचमार्क से जुड़ी है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी ग्राहक का होम लोन या अन्य फ्लोटिंग रेट लोन MCLR से लिंक है और उसकी रीसेट डेट के समय नई दर लागू होती है, तो बैंक ब्याज दर में बदलाव कर सकता है। इससे ग्राहक की मासिक EMI बढ़ सकती है या समान EMI बनाए रखने पर लोन चुकाने की अवधि बढ़ सकती है।
वहीं बैंक ऑफ बड़ौदा ने भी चुनिंदा अवधि के लिए MCLR में बदलाव किया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक बैंक ने तीन महीने की अवधि वाली MCLR में 10 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की है। अन्य अवधि की दरों में इस बदलाव के दौरान कोई समान वृद्धि नहीं की गई है। बैंक ऑफ बड़ौदा की आधिकारिक MCLR व्यवस्था में अलग-अलग अवधि के लिए अलग दरें निर्धारित की जाती हैं। ([Bank of Baroda][1])
यहां यह समझना भी जरूरी है कि MCLR बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि बैंक से लोन लेने वाले हर ग्राहक की EMI तुरंत बढ़ जाएगी। जिन ग्राहकों का लोन किसी दूसरे बेंचमार्क, जैसे बाहरी बेंचमार्क आधारित लेंडिंग रेट या रेपो लिंक्ड लेंडिंग रेट से जुड़ा है, उन पर MCLR में इस तरह के बदलाव का सीधा असर नहीं पड़ता। इसलिए ग्राहकों को अपने लोन दस्तावेज और बैंक की ओर से जारी ब्याज दर की जानकारी जरूर जांचनी चाहिए।
MCLR की व्यवस्था में बैंक की फंडिंग लागत, ऑपरेटिंग कॉस्ट और अन्य कारकों को ध्यान में रखा जाता है। बैंक समय-समय पर इन दरों की समीक्षा करते हैं। जब MCLR बढ़ती है तो उससे जुड़े नए या रीसेट होने वाले फ्लोटिंग रेट लोन की ब्याज दर बढ़ सकती है। इसी वजह से लंबे समय के होम लोन, पर्सनल लोन या अन्य कर्ज लेने वाले ग्राहकों के लिए MCLR में बदलाव महत्वपूर्ण माना जाता है।
ग्राहकों को अपनी EMI पर संभावित असर जानने के लिए सबसे पहले यह देखना चाहिए कि उनका लोन किस रेट से लिंक है। इसके बाद लोन की रीसेट तारीख और वर्तमान ब्याज दर की जानकारी बैंक से लेनी चाहिए। यदि ब्याज दर बढ़ती है तो ग्राहक बैंक से EMI बढ़ाने या लोन की अवधि बढ़ाने के विकल्प के बारे में जानकारी ले सकते हैं।
इस बदलाव के बीच मौजूदा उधारकर्ताओं के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे केवल MCLR बढ़ने की खबर देखकर यह निष्कर्ष न निकालें कि उनकी EMI तुरंत बढ़ जाएगी। वास्तविक असर उनके लोन के प्रकार, ब्याज दर के बेंचमार्क और रीसेट नियमों पर निर्भर करेगा।
बैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक के इस कदम के बाद अब MCLR आधारित लोन लेने वाले ग्राहकों को अपनी ब्याज दर और EMI पर नजर रखनी होगी। खासकर उन लोगों को, जिनकी रीसेट तारीख जल्द आने वाली है, बैंक से नई दर की पुष्टि कर लेनी चाहिए। इससे उन्हें आने वाले महीनों में अपने बजट और EMI भुगतान की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी।
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