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GST लागू होने के नौ साल बाद सिस्टम की समीक्षा, ‘वन नेशन वन टैक्स’ मॉडल पर उठे सवाल

Kavita2
29 Jun 2026 12:01 PM IST
GST लागू होने के नौ साल बाद सिस्टम की समीक्षा, ‘वन नेशन वन टैक्स’ मॉडल पर उठे सवाल
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Business बिजनेस: नौ साल पहले आधी रात को भारतीय संसद के सेंट्रल हॉल में देश में एक बड़े टैक्स सुधार के रूप में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) की शुरुआत की गई थी। पुराने टैक्स सिस्टम की जटिलताओं, अलग-अलग राज्यों और केंद्र के कई तरह के कर ढांचे, और टैक्स पर टैक्स की समस्या को खत्म करने के उद्देश्य से इसे “वन नेशन, वन टैक्स, वन मार्केट” के विचार के साथ लागू किया गया था।

अब जब GST अपने दसवें वर्ष की ओर बढ़ रहा है, तो इसके प्रभाव और परिणामों को लेकर फिर से बहस तेज हो गई है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या GST अपने मूल उद्देश्यों में सफल रहा है, क्या इससे उपभोक्ताओं को वास्तविक लाभ मिला है और क्या यह भारतीय अर्थव्यवस्था को सरल बनाने में पूरी तरह सक्षम हो पाया है।

सरकार की ओर से GST को देश की कर प्रणाली में सबसे बड़ा सुधार बताया गया था, जिसका मकसद टैक्स ढांचे को सरल और पारदर्शी बनाना था। इसके लागू होने से पहले देश में अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग टैक्स दरें और नियम लागू थे, जिससे व्यापारियों और कंपनियों को कई स्तरों पर कर अनुपालन करना पड़ता था।

GST लागू होने के बाद देश में एकीकृत कर प्रणाली की शुरुआत हुई, जिससे कई तरह के करों को एक साथ जोड़ दिया गया। इससे वस्तुओं और सेवाओं पर टैक्स लगाने की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हुई और अंतरराज्यीय व्यापार में भी कुछ हद तक सरलता आई।

हालांकि, समय के साथ GST को लेकर कई चुनौतियां भी सामने आई हैं। छोटे व्यापारियों और कुछ उद्योगों का कहना है कि कंप्लायंस प्रक्रिया अभी भी जटिल है और रिटर्न फाइलिंग जैसी प्रक्रियाएं कई बार बोझिल हो जाती हैं। इसके अलावा, अलग-अलग स्लैब और दरों को लेकर भी समय-समय पर विवाद उठते रहे हैं।

उपभोक्ताओं के स्तर पर GST का प्रभाव मिला-जुला रहा है। कुछ वस्तुओं और सेवाओं पर टैक्स दरों में कमी से लाभ मिला है, जबकि कुछ क्षेत्रों में कीमतों में अपेक्षित कमी नहीं देखी गई है। इससे यह बहस भी जारी है कि क्या GST का पूरा लाभ अंतिम उपभोक्ता तक पहुंच पाया है या नहीं।

राज्यों और केंद्र के बीच राजस्व वितरण को लेकर भी समय-समय पर चर्चा होती रही है। कई राज्यों ने GST मुआवजे और राजस्व हिस्सेदारी को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं, जिससे संघीय ढांचे पर भी इसका प्रभाव देखा गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि GST ने देश की टैक्स प्रणाली को एक दिशा दी है, लेकिन अभी भी इसमें सुधार की गुंजाइश मौजूद है। डिजिटल सिस्टम और तकनीकी सुधारों के बावजूद कुछ क्षेत्रों में अनुपालन और सरलीकरण की आवश्यकता बनी हुई है।

आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, GST ने भारत में एकीकृत बाजार बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन इसे पूरी तरह “परफेक्ट सिस्टम” कहना अभी जल्दबाजी होगी। छोटे उद्योगों, ई-कॉमर्स और सेवा क्षेत्र में इसके प्रभाव को लेकर अलग-अलग राय मौजूद हैं।

जैसे-जैसे GST अपने दसवें वर्ष में प्रवेश कर रहा है, सरकार और नीति निर्माता इसके प्रदर्शन की समीक्षा कर रहे हैं और आगे के सुधारों पर विचार किया जा रहा है। उम्मीद है कि आने वाले समय में इसे और सरल और प्रभावी बनाने के लिए नए कदम उठाए जाएंगे।

कुल मिलाकर GST ने भारतीय टैक्स सिस्टम में एक बड़ा बदलाव जरूर लाया है, लेकिन इसके पूरे प्रभाव और लाभ को लेकर बहस अभी भी जारी है।

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