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RERA Rules: बिल्डर्स की मनमानी खत्म, नहीं वसूल पाएंगे भारी मेंटेनेंस

Saba Naaz
15 July 2026 4:53 PM IST
RERA Rules: बिल्डर्स की मनमानी खत्म, नहीं वसूल पाएंगे भारी मेंटेनेंस
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नई दिल्ली: अपना खुद का घर या दुकान खरीदने का सपना देखने वाले आम नागरिकों के लिए रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) की तरफ से एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। रेरा ने उन मनमाने बिल्डर्स पर पूरी तरह नकेल कस दी है, जो फ्लैट या कमर्शियल शॉप की बुकिंग और पजेशन के समय 'इंटरेस्ट फ्री मेंटेनेंस सिक्योरिटी' (IFMS) यानी मेंटेनेंस फंड के नाम पर ग्राहकों से लाखों रुपये जमा करा लेते थे और बाद में उस पैसे का कोई हिसाब-किताब नहीं देते थे।

रेरा ने आईएफएमएस (IFMS) को लेकर नए और बेहद कड़े नियम तुरंत प्रभाव से लागू कर दिए हैं। इन नए दिशानिर्देशों के आने के बाद अब कोई भी बिल्डर ग्राहकों के गाढ़ी कमाई के पैसे का दुरुपयोग या उसमें हेराफेरी नहीं कर पाएगा। यह फैसला रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता लाने और घर खरीदारों (Home Buyers) को वित्तीय सुरक्षा देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

क्या है यह पूरा मामला और कैसे होती थी धोखाधड़ी?

आमतौर पर जब भी कोई व्यक्ति किसी हाउसिंग सोसाइटी या कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में फ्लैट या दुकान खरीदता है, तो बिल्डर पजेशन सौंपने से पहले उससे मेंटेनेंस सिक्योरिटी के रूप में एक बड़ी रकम एडवांस जमा कराता है। इस फंड का उद्देश्य यह होता है कि भविष्य में जब तक सोसाइटी पूरी तरह से हैंडओवर नहीं हो जाती, तब तक वहां के रख-रखाव, लिफ्ट, बिजली और पानी जैसी सुविधाओं का खर्च इस पैसे से चलाया जा सके।

लेकिन लंबे समय से यह शिकायतें आ रही थीं कि बिल्डर्स ग्राहकों से लाखों रुपये वसूलने के बाद उस फंड को अपने निजी बिजनेस या दूसरे प्रोजेक्ट्स में लगा देते थे। जब सोसाइटी का काम पूरा हो जाता था और रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) को सोसाइटी सौंपी जाती थी, तो बिल्डर्स मेंटेनेंस फंड ट्रांसफर करने में आनाकानी करते थे या फिर पूरा पैसा हड़प जाते थे।

रेरा के नए नियमों की 3 सबसे बड़ी बातें

बिल्डर्स की इसी मनमानी को रोकने के लिए रेरा ने अब तीन मुख्य मोर्चों पर नए नियम तय किए हैं:

1. मेंटेनेंस फंड के लिए खुलेगा अलग बैंक खाता:

अब बिल्डर्स ग्राहकों से लिए गए मेंटेनेंस सिक्योरिटी के पैसे को अपने सामान्य या चालू व्यावसायिक खाते (Current Account) में नहीं रख सकते। उन्हें हर एक प्रोजेक्ट के लिए बैंक में एक पूरी तरह से अलग और समर्पित खाता (Escrow Account) खोलना होगा। ग्राहकों से मिलने वाला मेंटेनेंस का एक-एक रुपया इसी खाते में जमा किया जाएगा, जिससे फंड की ट्रैकिंग आसान होगी।

2. सबसे ज्यादा ब्याज देने वाले बैंक में करानी होगी FD:

रेरा ने यह भी अनिवार्य कर दिया है कि अलग खाते में जमा की गई इस भारी-भरकम राशि को बिल्डर को ऐसे शेड्यूल्ड बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के रूप में रखना होगा, जो सबसे अधिक ब्याज दर दे रहा हो। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि ग्राहकों का पैसा बैंक में सुरक्षित रहे और उस पर लगातार ब्याज के रूप में कमाई भी होती रहे।

3. ब्याज सहित RWA को सौंपना होगा पूरा हिसाब:

जब प्रोजेक्ट पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगा और बिल्डर वहां के प्रबंधन की जिम्मेदारी स्थानीय निवासियों की संस्था यानी रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) को सौंपेगा, तो उसे केवल मूलधन नहीं, बल्कि बैंक से मिला पूरा ब्याज सहित (With Interest) पैसा आरडब्ल्यूए के खाते में ट्रांसफर करना होगा। इसके साथ ही, बिल्डर को पिछले सालों में मेंटेनेंस पर खर्च हुए एक-एक पैसे का चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) द्वारा ऑडिटेड पूरा हिसाब-किताब भी आरडब्ल्यूए को देना होगा।

घर खरीदारों को कैसे मिलेगी बड़ी राहत?

रेरा के इस सख्त कदम से उन खरीदारों को सबसे ज्यादा फायदा होगा, जो बिल्डर्स द्वारा पजेशन के बाद भी सालों तक मेंटेनेंस फंड के लिए चक्कर काटते रहते थे। अब फ्लैट या दुकान के मालिकों को यह मानसिक शांति रहेगी कि उनका पैसा सुरक्षित है और सोसाइटी का रख-रखाव बेहतर तरीके से हो सकेगा। इसके अलावा, नए नियमों के तहत अब सुपर बिल्ट-अप एरिया के बजाय केवल कारपेट एरिया या रेरा द्वारा निर्धारित मापदंडों के आधार पर ही उचित मेंटेनेंस शुल्क तय किया जा सकेगा, जिससे प्रति वर्ग फुट लगने वाले चार्ज में भी पारदर्शिता आएगी। यह नियम रियल एस्टेट मार्केट में बिल्डर्स और ग्राहकों के बीच भरोसे को एक नए स्तर पर ले जाएगा।

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