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महंगाई से राहत अधूरी! प्याज, दाल और खाद्य तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता

Ratna Netam
6 Aug 2026 4:38 PM IST
महंगाई से राहत अधूरी! प्याज, दाल और खाद्य तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
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नई दिल्ली : देश में खुदरा महंगाई (रिटेल इंफ्लेशन) को लेकर जुलाई 2026 के लिए जारी एक नई रिपोर्ट ने राहत और चिंता, दोनों तरह के संकेत दिए हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट के अनुसार जुलाई 2026 में खुदरा महंगाई दर लगभग 4.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। हालांकि यह दर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के तय दायरे के भीतर मानी जा रही है, लेकिन खाद्य वस्तुओं की लगातार बढ़ती कीमतों के कारण महंगाई पर दबाव बना हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि आवश्यक खाद्य पदार्थों के दाम इसी तरह ऊंचे बने रहे तो आने वाले महीनों में महंगाई का स्तर बढ़ भी सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक प्याज, खाद्य तेल, चावल और दाल जैसी रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। इन वस्तुओं की महंगाई का असर सीधे आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है। हालांकि कुछ राहत सब्जियों की बेहतर आवक और सामान्य मानसून से मिली है। टमाटर, आलू और अन्य प्रमुख सब्जियों की पर्याप्त आपूर्ति होने से उनके दाम नियंत्रित रहने की संभावना जताई गई है, जिससे खाद्य महंगाई को कुछ हद तक संतुलित रखने में मदद मिल सकती है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मुख्य महंगाई, जिसमें खाद्य पदार्थ और ईंधन शामिल नहीं होते, वह लगभग 4 से 4.1 प्रतिशत के बीच रह सकती है। इसकी एक बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में आई गिरावट को माना गया है। सोने की कीमतों में नरमी आने से व्यक्तिगत उपयोग की कई वस्तुओं की लागत पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है, जिससे मुख्य महंगाई पर दबाव कम रहने की उम्मीद है।
हालांकि रिपोर्ट ने आगाह किया है कि आने वाले समय में उत्पादन लागत बढ़ने की आशंका बनी हुई है। यदि कच्चे माल, परिवहन या अन्य इनपुट लागत में वृद्धि होती है तो उसका असर उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। इससे महंगाई दोबारा तेज होने का खतरा बना रहेगा।
बैंक ऑफ बड़ौदा के ‘एसेंशियल कमोडिटीज इंडेक्स’ (BOB ECI) के अनुसार जुलाई 2026 में आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में सालाना आधार पर 4.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो इस इंडेक्स के इतिहास में सबसे तेज बढ़ोतरी मानी जा रही है। इतना ही नहीं, अगस्त 2026 के शुरुआती पांच दिनों के आंकड़ों में यह वृद्धि बढ़कर 5.4 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इससे संकेत मिलता है कि जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर अभी भी दबाव बना हुआ है।
रिपोर्ट में सब्जियों की स्थिति को लेकर कुछ सकारात्मक संकेत भी दिए गए हैं। टमाटर, प्याज और आलू यानी ‘टीओपी’ (TOP) श्रेणी की सब्जियों की पर्याप्त आवक दर्ज की गई है। हालांकि प्याज की कीमतों में अभी भी उतार-चढ़ाव बना हुआ है, लेकिन कुल मिलाकर सब्जियों की उपलब्धता बेहतर होने से बाजार में कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर भी भारतीय महंगाई पर देखने को मिल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों में महीने-दर-महीने आधार पर 3.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इससे आभूषण और व्यक्तिगत उपयोग की कुछ वस्तुओं की कीमतों में राहत मिल सकती है। वहीं कीमती धातुओं को छोड़कर अन्य वस्तुओं की मुख्य महंगाई फिलहाल नियंत्रित रहने की संभावना जताई गई है।
रिपोर्ट में मानसून की स्थिति को भी महंगाई के लिए सकारात्मक बताया गया है। देश के लगभग 63 प्रतिशत राज्यों में सामान्य बारिश दर्ज की गई है। 31 जुलाई 2026 तक खरीफ फसलों की बुवाई भी पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर रही है। तिलहन और गन्ने को छोड़कर अधिकांश प्रमुख खरीफ फसलों का रकबा सामान्य स्तर से अधिक बताया गया है। अच्छी बुवाई और सामान्य वर्षा से आने वाले महीनों में कृषि उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है, जिससे खाद्य पदार्थों की आपूर्ति बेहतर होगी और महंगाई पर नियंत्रण रखने में मदद मिल सकती है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेलों समेत कई खाद्य वस्तुओं की कीमतों में नरमी आई है। यदि यह रुझान आगे भी जारी रहता है तो भारत में खाद्य महंगाई पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल विशेषज्ञों का मानना है कि खुदरा महंगाई नियंत्रित दायरे में बनी हुई है, लेकिन खाद्य वस्तुओं की कीमतों और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर लगातार नजर बनाए रखने की आवश्यकता होगी। आने वाले महीनों में मानसून, कृषि उत्पादन और अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति यह तय करेगी कि महंगाई आम लोगों को राहत देगी या फिर जेब पर अतिरिक्त बोझ बढ़ाएगी।
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