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नई दिल्ली : घरेलू सर्राफा बाजार में गुरुवार को चांदी की कीमतों में बेहद मामूली गिरावट दर्ज की गई। पिछले कारोबारी सत्र की तुलना में चांदी का भाव लगभग स्थिर रहा और केवल एक रुपये की कमी के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। हालांकि विभिन्न शहरों में स्थानीय मांग और बाजार की स्थिति के अनुसार कीमतों में थोड़ा-बहुत अंतर देखने को मिला। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां, औद्योगिक मांग और निवेशकों की रणनीति आने वाले दिनों में चांदी की कीमतों की दिशा तय करेंगी।
दिल्ली के बुलियन बाजार में एक किलोग्राम चांदी का भाव लगभग **2.27 लाख रुपये** पर दर्ज किया गया। यहां कीमतों में केवल एक रुपये की गिरावट देखने को मिली, जिससे यह साफ है कि बाजार में फिलहाल स्थिरता बनी हुई है। दिल्ली में 10 ग्राम चांदी का भाव लगभग **2,273 रुपये** और 100 ग्राम चांदी की कीमत **22,737 रुपये** रही। कारोबारियों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर मांग सामान्य बनी हुई है, इसलिए कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में चांदी की कीमतों में अपेक्षाकृत अधिक गिरावट दर्ज की गई। यहां एक किलोग्राम चांदी का भाव **2,28,955 रुपये** रहा, जो पिछले दिन की तुलना में करीब **238 रुपये** कम है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि स्थानीय खरीदारी और व्यापारिक गतिविधियों के कारण विभिन्न राज्यों में कीमतों में अंतर बना रहता है।
बिहार की राजधानी पटना में भी चांदी के दाम में हल्की नरमी रही। यहां एक किलोग्राम चांदी का भाव करीब **2.27 लाख रुपये** दर्ज किया गया। पिछले कारोबारी दिन की तुलना में यहां कीमतों में **79 रुपये** की गिरावट देखने को मिली। स्थानीय सर्राफा कारोबारियों के अनुसार त्योहारों और विवाह सीजन की मांग बढ़ने पर कीमतों में फिर तेजी आ सकती है।
राजस्थान की राजधानी जयपुर में चांदी की कीमतों में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई। यहां एक किलोग्राम चांदी का भाव **2,26,900 रुपये** रहा, जो पिछले दिन की तुलना में **471 रुपये** कम है। वहीं देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में चांदी का भाव **2,27,475 रुपये प्रति किलोग्राम** दर्ज किया गया, जहां कीमतों में **127 रुपये** की कमी आई।
विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी की कीमतें केवल घरेलू मांग से ही प्रभावित नहीं होतीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की गतिविधियां भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव तथा वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं का असर कीमती धातुओं के बाजार पर देखने को मिला है। ऐसे माहौल में निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं, जिससे सोने और चांदी दोनों की कीमतों में उतार-चढ़ाव आता रहता है।
हालांकि चांदी की एक बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल निवेश का माध्यम नहीं, बल्कि औद्योगिक धातु भी है। इलेक्ट्रिक वाहनों (EV), सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी निर्माण और विभिन्न तकनीकी उपकरणों में चांदी का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। इसी वजह से इसकी औद्योगिक मांग मजबूत बनी हुई है। यदि उद्योगों में मांग बढ़ती है तो चांदी की कीमतों को सहारा मिलता है, जबकि मांग में कमी आने पर कीमतों पर दबाव देखा जा सकता है।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में वैश्विक ब्याज दरों, डॉलर की चाल, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और औद्योगिक मांग पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनिश्चितता बढ़ती है तो चांदी की कीमतों में फिर तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं यदि वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता आती है और औद्योगिक मांग सामान्य रहती है तो कीमतें सीमित दायरे में कारोबार कर सकती हैं।
जो लोग चांदी खरीदने या इसमें निवेश करने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए बाजार की चाल और अंतरराष्ट्रीय संकेतों पर नजर रखना जरूरी है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निवेश से पहले अलग-अलग शहरों के ताजा भाव, मेकिंग चार्ज और बाजार की स्थिति की तुलना अवश्य करें। फिलहाल चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट नहीं आई है, लेकिन हल्की नरमी ने खरीदारों को राहत जरूर दी है। आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम और औद्योगिक मांग के आधार पर चांदी के भाव में नई दिशा देखने को मिल सकती है।
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