
New Delhi नई दिल्ली : अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का असर अब भारत के विमानन ईंधन पर भी देखने को मिला है। बुधवार को जेट फ्यूल यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में 5 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई है। इस कटौती से एयरलाइन कंपनियों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
उद्योग सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में अब एविएशन टर्बाइन फ्यूल की नई कीमत 110 रुपये प्रति लीटर हो गई है। हाल के महीनों में लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों से जूझ रही विमानन कंपनियों के लिए यह बदलाव सकारात्मक माना जा रहा है।
बताया जा रहा है कि वेस्ट एशिया में तनाव और वैश्विक आपूर्ति में अनिश्चितता के चलते पिछले समय में जेट फ्यूल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी देखी गई थी, जो रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थी। अब अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में स्थिरता और कीमतों में गिरावट के कारण पहली बार इसमें कटौती दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जेट फ्यूल की कीमतें एयरलाइन उद्योग की कुल परिचालन लागत का बड़ा हिस्सा होती हैं। ऐसे में इसमें किसी भी तरह की बढ़ोतरी या कमी सीधे तौर पर हवाई किराए और कंपनियों के मुनाफे को प्रभावित करती है।
हालांकि इस कटौती के बावजूद उद्योग का मानना है कि ईंधन की कीमतें अभी भी अपेक्षाकृत ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। इसलिए एयरलाइंस को अभी पूरी तरह राहत मिलने में समय लग सकता है।
विमानन क्षेत्र के जानकारों के अनुसार, हाल के महीनों में ईंधन लागत बढ़ने के कारण कई एयरलाइंस कंपनियों पर वित्तीय दबाव बढ़ा था। इसके चलते टिकट की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखी गई थी। अब कीमतों में नरमी से परिचालन लागत में कुछ कमी आने की उम्मीद है।
उद्योग जगत का यह भी मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह स्थिर या नीचे बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में जेट फ्यूल की कीमतों में और भी राहत मिल सकती है।
सरकारी और तेल विपणन कंपनियां हर महीने की पहली और 16 तारीख को एटीएफ की कीमतों की समीक्षा करती हैं और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों के आधार पर इसमें संशोधन किया जाता है।
विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि यह कटौती एयरलाइन सेक्टर के लिए एक सकारात्मक संकेत है, खासकर ऐसे समय में जब यात्री यातायात में सुधार देखा जा रहा है।
कुल मिलाकर, अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में नरमी का सीधा लाभ अब भारत के विमानन उद्योग को मिलना शुरू हो गया है, जिससे आने वाले दिनों में हवाई यात्रा की लागत और किराए पर भी असर पड़ सकता है।





