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बिजनेस । त्योहारों के सीजन से पहले आम लोगों के लिए राहत की खबर है। पिछले कुछ दिनों से आसमान छू रही **चीनी की कीमतों में अब तेजी से नरमी** देखने को मिल रही है। दिल्ली, कानपुर, लखनऊ, मेरठ, रायपुर, मुंबई, रांची, कोलकाता और दूसरे बड़े बाजारों में चीनी के थोक और खुदरा भाव नीचे आए हैं। कुछ बाजारों में बीते करीब दो सप्ताह के दौरान खुदरा कीमतों में 10 रुपये प्रति किलो तक की गिरावट की खबर है। वहीं घरेलू थोक जिंस बाजार में भी एक सप्ताह के दौरान चीनी के भाव में बड़ी कमी दर्ज की गई है।
चीनी के दाम कम होने का समय भी महत्वपूर्ण है। आने वाले महीनों में दशहरा, दिवाली और छठ जैसे बड़े त्योहार हैं। इस दौरान घरों से लेकर मिठाई की दुकानों तक चीनी की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में कीमतों में गिरावट जारी रहती है तो आम परिवारों के साथ हलवाई और मिठाई कारोबारियों को भी राहत मिल सकती है।
हालांकि थोक बाजार में आई पूरी गिरावट अभी हर शहर के खुदरा बाजार तक नहीं पहुंची है। कई दुकानदारों के पास पहले ऊंची कीमत पर खरीदा गया पुराना स्टॉक मौजूद है। यही वजह है कि मिल गेट या थोक मंडी में चीनी सस्ती होने के बावजूद कई जगह ग्राहकों को उसका पूरा फायदा नहीं मिला है।
दिल्ली में चीनी हुई सस्ती
दिल्ली के बाजार में पिछले कुछ दिनों के दौरान चीनी की कीमत में बड़ी नरमी देखने को मिली है।
अगस्त के तीसरे सप्ताह में कुछ बाजार आंकड़ों में दिल्ली में चीनी करीब 68 रुपये प्रति किलो तक दर्ज की गई थी। इसके बाद महीने के अंत तक भाव करीब 60 रुपये प्रति किलो तक आ गया।
8 सितंबर के आसपास उपलब्ध बाजार आंकड़ों में दिल्ली में चीनी करीब **57 रुपये प्रति किलो** दर्ज की गई।
यानी ऊंचे स्तर से तुलना करें तो ग्राहकों को अच्छी राहत मिली है।
हालांकि दिल्ली जैसे बड़े शहर में अलग-अलग इलाकों और दुकानों पर कीमत में अंतर रह सकता है।
कानपुर में भी भाव नीचे
कानपुर में भी चीनी के थोक भाव में गिरावट दर्ज की गई है।
8 सितंबर के आसपास उपलब्ध आंकड़ों में खुदरा चीनी करीब 57 से 60 रुपये प्रति किलो के आसपास बताई गई।
कानपुर की थोक मंडी में चीनी का भाव करीब **5,500 रुपये प्रति क्विंटल** तक आने की रिपोर्ट भी सामने आई थी।
इस हिसाब से थोक कीमत करीब 55 रुपये प्रति किलो बैठती है।
हालांकि खुदरा बाजार में उस समय कई दुकानों पर ग्राहकों को करीब 60 रुपये प्रति किलो तक चुकाने पड़ रहे थे।
यानी थोक बाजार की गिरावट का पूरा फायदा तत्काल ग्राहक तक नहीं पहुंचा।
औरैया में 10 रुपये किलो तक राहत
औरैया से सामने आई बाजार रिपोर्ट में पिछले करीब 15 दिनों के दौरान चीनी की कीमत में **10 रुपये प्रति किलो तक गिरावट** दर्ज की गई।
यह गिरावट बताती है कि चीनी के बाजार में केवल बड़े महानगरों में ही नहीं बल्कि छोटे शहरों में भी नरमी पहुंचने लगी है।
दिलचस्प बात यह है कि चीनी सस्ती होने के बावजूद वहां बताशे की कीमत में बढ़ोतरी दर्ज की गई।
इससे पता चलता है कि कच्चे माल की कीमत कम होने का फायदा हर तैयार खाद्य उत्पाद में तुरंत मिलना जरूरी नहीं है।
रायपुर में भी कीमतों में नरमी
रायपुर के बाजार में भी चीनी की कीमत ऊंचे स्तर से नीचे आई है।
उपलब्ध बाजार आंकड़ों में अगस्त के दौरान रायपुर में चीनी 68-69 रुपये प्रति किलो के आसपास तक पहुंची थी।
महीने के आखिर में भाव घटकर करीब 58 रुपये प्रति किलो तक दिखाई दिया।
8 सितंबर के आसपास रायपुर में कीमत करीब **56 रुपये प्रति किलो** बताई गई।
यानी ऊंचे स्तर से तुलना करें तो ग्राहकों को अच्छी राहत मिली है।
हालांकि स्थानीय किराना दुकानों पर ब्रांडेड पैकेट और खुली चीनी की कीमत अलग-अलग हो सकती है।
मुंबई में भी सस्ती हुई चीनी
मुंबई में भी अगस्त के दौरान चीनी की कीमतों में तेजी देखने को मिली थी।
कुछ बाजार आंकड़ों में भाव 68 रुपये प्रति किलो के आसपास तक पहुंचा था।
इसके बाद कीमत धीरे-धीरे नीचे आने लगी।
सितंबर के शुरुआती दिनों में मुंबई में खुदरा भाव करीब **56 रुपये प्रति किलो** तक बताए गए।
अगर थोक कीमतों में गिरावट बनी रहती है तो आने वाले दिनों में खुदरा बाजार में और राहत मिल सकती है।
रांची में क्या है स्थिति?
रांची में भी चीनी के भाव में नरमी दर्ज की गई है।
अगस्त में कीमत करीब 70 रुपये प्रति किलो के स्तर तक दिखाई दी थी।
इसके बाद सितंबर के शुरुआती दिनों में भाव घटकर करीब **57 रुपये प्रति किलो** तक आने की रिपोर्ट है।
यानी ऊंचे स्तर की तुलना में कीमत में दोहरे अंक की गिरावट दिखाई देती है।
हालांकि किसी एक तारीख से तुलना करने पर गिरावट इससे कम या ज्यादा हो सकती है।
कोलकाता में भी भाव नीचे
कोलकाता के बाजार में भी चीनी की कीमतों में राहत देखने को मिली है।
अगस्त के तीसरे सप्ताह में भाव करीब 70 रुपये प्रति किलो तक दर्ज किए गए थे।
इसके बाद कीमत धीरे-धीरे नीचे आई।
अगस्त के आखिर तक खुदरा भाव करीब 60 रुपये प्रति किलो के आसपास पहुंच गया था।
सितंबर में थोक बाजार की नरमी जारी रहने पर इसका असर खुदरा कीमतों में भी दिखाई देने की उम्मीद है।
गुवाहाटी में भी राहत
गुवाहाटी में चीनी का भाव अगस्त में कई दूसरे शहरों की तुलना में ज्यादा दिखाई दिया था।
कुछ बाजार आंकड़ों में कीमत 71 रुपये प्रति किलो तक पहुंची थी।
इसके बाद भाव नीचे आए और महीने के अंत तक करीब 61 रुपये प्रति किलो के आसपास दर्ज किए गए।
यानी ऊंचे स्तर से लगभग 10 रुपये प्रति किलो की राहत दिखाई दी।
स्थानीय ट्रांसपोर्ट और सप्लाई लागत के कारण पूर्वोत्तर के बाजारों में चीनी की कीमत दूसरे शहरों से अलग हो सकती है।
हैदराबाद में कितना बदला भाव?
हैदराबाद में भी अगस्त के दौरान चीनी करीब 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंची थी।
इसके बाद बाजार में नरमी शुरू हुई।
अगस्त के आखिर में भाव करीब 59 रुपये प्रति किलो तक दर्ज किया गया।
इस तरह ऊंचे स्तर से कीमत में उल्लेखनीय गिरावट देखने को मिली।
हालांकि ब्रांडेड चीनी और खुले बाजार की चीनी के दाम में अंतर हो सकता है।
चेन्नई में भी ऊंचे स्तर से गिरावट
चेन्नई में अगस्त के दौरान चीनी के भाव कुछ आंकड़ों में करीब 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंचे थे।
इसके बाद कीमत में गिरावट शुरू हुई और महीने के आखिर तक करीब 62 रुपये प्रति किलो तक भाव दिखाई दिया।
यानी यहां भी ग्राहकों को ऊंचे स्तर की तुलना में राहत मिली।
लेकिन शहरों के बीच तुलना करते समय तारीख और स्रोत समान होना जरूरी है।
आखिर क्यों सस्ती हो रही है चीनी?
चीनी की कीमत में गिरावट के पीछे सबसे महत्वपूर्ण कारण सप्लाई की स्थिति में सुधार है।
हालिया बाजार रिपोर्टों के मुताबिक एक्स-मिल कीमतें घटकर करीब **44 से 45 रुपये प्रति किलो** तक आ गई हैं।
एक्स-मिल कीमत वह भाव है जिस पर चीनी मिलों से माल बाजार में निकलता है।
अगर मिल स्तर पर कीमत घटती है तो उसका असर कुछ समय बाद थोक और फिर खुदरा बाजार में दिखाई देता है।
यही प्रक्रिया फिलहाल बाजार में देखने को मिल रही है।
सरकारी कदमों का भी असर
बाजार रिपोर्टों में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए उठाए गए सरकारी कदमों को भी कीमत में गिरावट की वजह बताया गया है।
स्टॉक पर सख्ती और अतिरिक्त सप्लाई की उम्मीद से बाजार में जमाखोरी की आशंका कम होती है।
जब व्यापारियों को लगता है कि आने वाले दिनों में बाजार में पर्याप्त माल उपलब्ध रहेगा तो वे बहुत ऊंची कीमत पर स्टॉक जमा करने से बचते हैं।
इससे भाव पर नीचे की ओर दबाव बन सकता है।
थोक बाजार में एक सप्ताह में बड़ी गिरावट
घरेलू थोक जिंस बाजार में भी चीनी की कीमत में महत्वपूर्ण गिरावट दर्ज की गई है।
6 सितंबर को सामने आई बाजार रिपोर्ट के मुताबिक बीते एक सप्ताह में चीनी के थोक भाव में करीब **287 रुपये** की गिरावट दर्ज हुई।
थोक बाजार की यह कमजोरी आगे चलकर खुदरा ग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।
अगर मिल और थोक स्तर पर कम कीमत लंबे समय तक बनी रहती है तो दुकानदारों को भी नया स्टॉक कम कीमत पर मिलने लगेगा।
इसके बाद रिटेल रेट में और गिरावट संभव है।
दुकानों पर उतनी सस्ती क्यों नहीं?
यह सबसे बड़ा सवाल है।
अगर एक्स-मिल और थोक बाजार में चीनी सस्ती हो गई है तो किराना दुकान पर भाव तुरंत क्यों नहीं गिरता?
इसका एक बड़ा कारण **पुराना स्टॉक** है।
मान लीजिए किसी दुकानदार ने चीनी 58 या 60 रुपये प्रति किलो की लागत पर खरीदी थी।
अगले दिन थोक भाव घटकर 53 रुपये हो गया तो वह पुराने माल को तुरंत 53 रुपये में बेचने से बच सकता है क्योंकि इससे उसे नुकसान होगा।
पुराना स्टॉक खत्म होने और नई कम कीमत वाली खेप आने के बाद खुदरा भाव में गिरावट ज्यादा स्पष्ट दिखाई देती है।
अगले 7 से 10 दिन महत्वपूर्ण
कारोबारियों और बाजार विशेषज्ञों की रिपोर्टों के मुताबिक अगले **7 से 10 दिनों** में थोक कीमतों की गिरावट का असर खुदरा बाजार में ज्यादा दिखाई दे सकता है।
अगर इस दौरान एक्स-मिल कीमत फिर नहीं बढ़ती और बाजार में सप्लाई पर्याप्त बनी रहती है तो ग्राहकों को और राहत मिल सकती है।
लेकिन त्योहारों के करीब आते ही चीनी की मांग भी बढ़ेगी।
इसलिए आगे की कीमत सप्लाई और मांग दोनों पर निर्भर करेगी।
त्योहारों से पहले बड़ी राहत
सितंबर से देश में त्योहारों का लंबा सीजन शुरू हो जाता है।
दशहरा, दिवाली और छठ पूजा जैसे त्योहारों में मिठाइयों की खपत बढ़ जाती है।
घर पर भी मिठाई और दूसरे पकवान बनाने के लिए चीनी की मांग बढ़ती है।
इसलिए त्योहारों से ठीक पहले चीनी की कीमत में गिरावट आम परिवारों के बजट के लिए अच्छी खबर है।
अगर भाव इसी स्तर पर बने रहते हैं तो मिठाई कारोबारियों की लागत पर भी कुछ दबाव कम हो सकता है।
क्या मिठाई भी सस्ती होगी?
चीनी सस्ती होने से मिठाई की कीमत तुरंत कम हो जाएगी, यह जरूरी नहीं है।
मिठाई की लागत में चीनी के अलावा दूध, खोया, घी, ड्राई फ्रूट्स, गैस, बिजली, दुकान का किराया और कर्मचारियों की मजदूरी भी शामिल होती है।
इनमें से कई चीजों की कीमत ऊंची बनी रह सकती है।
इसलिए चीनी में 5 या 10 रुपये प्रति किलो की गिरावट का मतलब मिठाई में उसी अनुपात में कमी नहीं है।
हालांकि इससे मिठाई निर्माताओं की लागत जरूर कुछ कम हो सकती है।
होटल और रेस्टोरेंट को भी फायदा
चीनी का इस्तेमाल केवल घर और मिठाई की दुकानों तक सीमित नहीं है।
होटल, रेस्टोरेंट, बेकरी, चाय की दुकानें और पेय पदार्थ बनाने वाले छोटे कारोबारी भी बड़ी मात्रा में चीनी खरीदते हैं।
थोक कीमत में गिरावट से इनके रोजमर्रा के खर्च में कमी आ सकती है।
विशेष रूप से बेकरी और मिठाई उद्योग के लिए त्योहारों से पहले कम कीमत पर चीनी मिलना महत्वपूर्ण है।
क्या और गिरेंगे दाम?
फिलहाल बाजार में कीमतों का रुझान नीचे की तरफ है, लेकिन आगे भी लगातार गिरावट होगी इसकी गारंटी नहीं है।
त्योहारी मांग बढ़ने पर भाव को समर्थन मिल सकता है।
चीनी उत्पादन के अनुमान, गन्ने की उपलब्धता, सरकारी नीति और अंतरराष्ट्रीय बाजार भी कीमत को प्रभावित करते हैं।
अगर सप्लाई मजबूत बनी रहती है तो खुदरा बाजार में और राहत संभव है।
लेकिन मांग अचानक बढ़ने पर गिरावट रुक सकती है।
ग्राहक क्या करें?
अगर घर के लिए सामान्य मात्रा में चीनी चाहिए तो केवल कीमत और गिरने की उम्मीद में खरीदारी टालने की जरूरत नहीं है।
लेकिन बहुत बड़ी मात्रा में स्टॉक करने से भी बचा जा सकता है।
बाजार में भाव अलग-अलग होने के कारण आसपास की दो-तीन दुकानों पर कीमत पूछना फायदेमंद हो सकता है।
ब्रांडेड पैकेट और खुली चीनी के भाव में भी अंतर रहेगा।
खुली चीनी खरीदते समय उसकी गुणवत्ता और साफ-सफाई जरूर देखें।
शहरवार कीमतों में अंतर क्यों?
चीनी का भाव पूरे देश में एक जैसा नहीं होता।
उत्पादन केंद्र से दूरी, ट्रांसपोर्ट लागत, स्थानीय मांग, थोक मंडी की कीमत और खुदरा मार्जिन जैसे कारण शहरवार भाव बदल देते हैं।
यही वजह है कि दिल्ली में 57 रुपये प्रति किलो बिकने वाली चीनी किसी दूसरे शहर में 55 या 60 रुपये हो सकती है।
यहां तक कि एक ही शहर के अलग-अलग बाजारों में भी 2 से 5 रुपये प्रति किलो तक अंतर दिखाई दे सकता है।
आम आदमी के लिए मीठी राहत
पिछले कुछ सप्ताह में चीनी की कीमतों में आई गिरावट आम लोगों के लिए राहत लेकर आई है।
दिल्ली और कानपुर जैसे बाजारों में भाव ऊंचे स्तर से नीचे आए हैं, जबकि रायपुर, रांची, मुंबई, कोलकाता और दूसरे शहरों में भी नरमी दर्ज की गई है।
सबसे महत्वपूर्ण संकेत मिल गेट और थोक बाजार से मिल रहा है, जहां कीमतों में स्पष्ट गिरावट आई है।
अगर कम एक्स-मिल कीमत का असर अगले कुछ दिनों में पूरी तरह खुदरा बाजार तक पहुंचता है तो त्योहारों से पहले ग्राहकों को चीनी और सस्ती मिल सकती है।
हालांकि अलग-अलग शहरों में गिरावट की मात्रा अलग है, इसलिए **'हर जगह 8.50 रुपये प्रति किलो सस्ती'** मानना सही नहीं होगा।
फिलहाल इतना जरूर है कि अगस्त की तेजी के बाद सितंबर में चीनी बाजार का रुख बदला है और **दशहरा-दिवाली से पहले आम लोगों के लिए मिठास थोड़ी सस्ती होती दिखाई दे रही है।
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