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JP Associates की तर्ज पर राहत, NCLT ने दिवालिया कार्रवाई पर 31 अगस्त तक लगाई रोक

Saba Naaz
24 July 2026 3:47 PM IST
JP Associates की तर्ज पर राहत, NCLT ने दिवालिया कार्रवाई पर 31 अगस्त तक लगाई रोक
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नई दिल्ली। भारत की प्रसिद्ध एडटेक कंपनी बायजू (Byju's) की पैरेंट कंपनी 'थिंक एंड लर्न' (Think & Learn) के खिलाफ चल रही दिवालिया समाधान प्रक्रिया में एक बड़ा नया मोड़ आया है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की बेंगलुरु बेंच ने कंपनी की कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) के तहत जारी बोली प्रक्रिया पर 31 अगस्त तक अंतरिम रोक लगा दी है। यह फैसला कंपनी के संस्थापक बायजू रवींद्रन और उनके भाई रिजू रवींद्रन द्वारा दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया गया है। इस आदेश के बाद फिलहाल बायजू को खरीदने के लिए नए निवेशकों से आवेदन मांगने की प्रक्रिया रुक गई है।

ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि समाधान पेशेवर (Resolution Professional-RP) मामले की अगली सुनवाई तक 'फॉर्म G' जारी नहीं करेंगे। 'फॉर्म G' एक ऐसा आधिकारिक दस्तावेज होता है जिसके माध्यम से दिवालिया हो चुकी कंपनी को खरीदने के इच्छुक निवेशकों से एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) यानी रुचि पत्र आमंत्रित किए जाते हैं। इसके साथ ही संभावित खरीदारों की अंतिम सूची तैयार करने पर भी रोक लगा दी गई है। हालांकि, NCLT ने यह भी साफ कर दिया है कि कंपनी के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है, बल्कि सिर्फ अगले चरण की बोली प्रक्रिया को अस्थायी रूप से स्थगित किया गया है।

इस पूरे विवाद की जड़ अमेरिकी कर्जदाताओं (TLB Lenders) का 11,433 करोड़ रुपये का एक विशाल दावा है। बायजू के संस्थापकों ने इस दावे की वैधता को अदालत में चुनौती दी है। फाउंडर्स का तर्क है कि इस भारी-भरकम दावे को बिना किसी उचित जांच के स्वीकार कर लिया गया है, जिससे पूरी दिवालिया प्रक्रिया निष्पक्ष रूप से संचालित नहीं हो पा रही है। उनका कहना है कि इस दावे के बने रहने से बोली लगाने वाली संभावित कंपनियों के फैसलों और कंपनी के वास्तविक मूल्यांकन पर गलत असर पड़ेगा। NCLT ने संस्थापकों की इस दलील को गंभीरता से लिया और माना कि मामले की विस्तार से जांच होना बेहद आवश्यक है।

अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को तय की गई है। उस दिन NCLT मुख्य रूप से अमेरिकी कर्जदाताओं के 11,433 करोड़ रुपये के इस विवादास्पद दावे की कानूनी वैधता और सही आंकड़ों पर विचार करेगा। ट्रिब्यूनल के इस निर्णय के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि बायजू की पैरेंट कंपनी थिंक एंड लर्न के लिए बोली प्रक्रिया को दोबारा शुरू किया जाएगा या फिर इसमें कोई बड़ा प्रशासनिक बदलाव होगा। तब तक बायजू के फाउंडर्स को कानूनी मोर्चे पर राहत जरूर मिल गई है।

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