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आरबीएल बैंक का लाभ 170 प्रतिशत बढ़ा
आरबीएल बैंक के सितंबर तिमाही के नतीजों में मुनाफे की तेज बढ़ोतरी के बावजूद शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में बैंक का शुद्ध लाभ सालाना आधार पर करीब 170 प्रतिशत बढ़कर 482 करोड़ रुपये रहा। पिछले वर्ष की समान तिमाही में यह लगभग 179 करोड़ रुपये था। लेकिन 13 अक्टूबर के शुरुआती कारोबार में शेयर करीब सात प्रतिशत गिरकर 388 रुपये तक पहुंच गया। यह कारोबार के दौरान का स्तर है, दिन का अंतिम बंद भाव नहीं। ndtvprofit.com
नतीजों में बैंक की शुद्ध ब्याज आय भी बढ़ी है। सितंबर तिमाही में यह लगभग 37.5 प्रतिशत बढ़कर 2,131 करोड़ रुपये रही, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में करीब 1,550 करोड़ रुपये थी। शुद्ध ब्याज आय बैंक को ब्याज से होने वाली कमाई और उसके द्वारा चुकाए गए ब्याज के बीच का अंतर है। बैंक का ऑपरेटिंग प्रॉफिट भी सालाना आधार पर 92 प्रतिशत बढ़कर लगभग 1,396 करोड़ रुपये बताया गया है।
इसके बावजूद बाजार की प्रतिक्रिया कमजोर रहने की एक वजह बढ़े प्रावधान हैं। बैंक ने संभावित नुकसान और अन्य जोखिमों के लिए सितंबर तिमाही में करीब 767 करोड़ रुपये के प्रावधान किए। यह पिछली तिमाही के 599 करोड़ रुपये और एक वर्ष पहले के लगभग 500 करोड़ रुपये से अधिक है। यानी मुनाफे तथा ब्याज आय में सुधार के साथ जोखिमों के लिए अलग रखी गई राशि भी बढ़ी है।
बाजार विश्लेषण में ऊंची क्रेडिट कॉस्ट, क्रेडिट कार्ड कारोबार में दबाव और मानक ऋणों पर प्रावधान को निवेशकों की चिंता से जोड़ा गया है। विश्लेषकों के अनुसार, नतीजों की कुछ बारीकियां उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहीं। इसलिए केवल कुल मुनाफे में बढ़ोतरी देखकर शेयर की प्रतिक्रिया समझना पर्याप्त नहीं है। हालांकि, किसी एक कारण को सभी निवेशकों की बिकवाली की निश्चित वजह नहीं कहा जा सकता। ये प्रकाशित विश्लेषण में बताए गए प्रमुख कारक हैं।
प्रति शेयर आय यानी ईपीएस का आंकड़ा भी महत्वपूर्ण है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, बैंक की ईपीएस पिछले वर्ष की समान तिमाही के 2.92 रुपये से बढ़कर 3.11 रुपये हुई। यह लगभग 6.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। कुल शुद्ध लाभ में करीब 170 प्रतिशत वृद्धि के मुकाबले प्रति शेयर आय की बढ़ोतरी काफी कम रही। ईपीएस बताती है कि प्रत्येक शेयर के हिस्से में कितनी कमाई आती है।
इसे एक सामान्य उदाहरण से समझें तो किसी कंपनी का कुल लाभ बढ़ने के साथ उसके शेयरों की संख्या भी बढ़ जाए, तो प्रति शेयर मिलने वाली कमाई उसी अनुपात में नहीं बढ़ती। आरबीएल बैंक के नतीजों पर प्रकाशित विश्लेषण में नई इक्विटी पूंजी के असर का भी उल्लेख है। अधिक पूंजी से ब्याज आय और कारोबार को सहारा मिल सकता है, लेकिन शेयरधारक प्रति शेयर कमाई और आगे की लाभप्रदता भी देखते हैं।
बैंक की परिसंपत्ति गुणवत्ता के कुछ आंकड़ों में सुधार आया है। ग्रॉस एनपीए अनुपात पिछली तिमाही के 1.30 प्रतिशत से घटकर 1.02 प्रतिशत रहा। नेट एनपीए भी 0.37 प्रतिशत से घटकर 0.29 प्रतिशत हुआ। एनपीए उन ऋणों से संबंधित आंकड़ा है, जिनका भुगतान निर्धारित नियमों के अनुसार नहीं हो रहा। इन अनुपातों में कमी सकारात्मक संकेत है, लेकिन बढ़े प्रावधानों को भी साथ देखना जरूरी है।
शेयर बाजार कंपनी के बीते नतीजों के साथ भविष्य की कमाई और पहले से बनी उम्मीदों का भी आकलन करता है। इसलिए लाभ बढ़ने पर भी शेयर गिर सकता है। आरबीएल बैंक के मामले में मजबूत मुनाफे और ब्याज आय के साथ बढ़े प्रावधान, सीमित ईपीएस वृद्धि तथा पूंजी जुटाने के असर पर ध्यान गया। उपलब्ध नतीजे सुधार और चुनौतियां, दोनों दिखाते हैं; शुरुआती कारोबार की गिरावट को आगे की शेयर चाल की गारंटी नहीं माना जा सकता।
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