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RBI ने बदले EMI रिकवरी के नियम जानें असर

Ratna Netam
10 Aug 2026 9:29 PM IST
RBI ने बदले EMI रिकवरी के नियम जानें असर
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नई दिल्ली : अगर आपने ईएमआई पर मोबाइल, लैपटॉप या टैबलेट खरीदा है और किसी वजह से समय पर किस्त नहीं भर पा रहे हैं, तो डिवाइस के अचानक लॉक होने का डर अब काफी हद तक कम होने वाला है। भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने डिजिटल तरीके से वित्तपोषित डिवाइस और लोन रिकवरी से जुड़े नियमों को लेकर नए प्रावधान किए हैं। ये नए नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे। नए प्रावधानों के तहत बैंक या वित्तीय संस्थान हर तरह के लोन की ईएमआई बकाया होने पर ग्राहक के मोबाइल, लैपटॉप या टैबलेट को मनमाने तरीके से रिमोट से लॉक या बंद नहीं कर सकेंगे।
नए नियमों का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि डिवाइस पर तकनीकी पाबंदी लगाने का अधिकार हर तरह के कर्ज के मामले में इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। अगर किसी व्यक्ति ने पर्सनल लोन लिया है और उसकी किस्त समय पर जमा नहीं हो पाई, तो बैंक उस व्यक्ति के मोबाइल या लैपटॉप को रिमोट से लॉक नहीं कर सकेगा। इसी तरह कार लोन, होम लोन या किसी अन्य प्रकार के कर्ज की ईएमआई बकाया होने पर भी ग्राहक के निजी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को बंद करने की अनुमति नहीं होगी।
हालांकि, अगर ग्राहक ने उसी मोबाइल, टैबलेट या लैपटॉप को खरीदने के लिए लोन या वित्तीय सुविधा ली है, तो कुछ निर्धारित परिस्थितियों में डिवाइस पर तकनीकी पाबंदी लगाने का प्रावधान हो सकता है। इसका मतलब यह है कि डिवाइस लॉक करने की व्यवस्था को सीधे तौर पर हर लोन की वसूली का हथियार नहीं बनाया जा सकेगा। यह केवल उस डिवाइस से जुड़े वित्तपोषण के मामले में लागू हो सकती है, जिसकी खरीद के लिए संबंधित कर्ज दिया गया है।
ईएमआई मिस होते ही डिवाइस तुरंत लॉक करने की भी खुली छूट बैंक या वित्तीय संस्थान को नहीं होगी। ग्राहक के खाते में किस्त बकाया होने के बाद रिकवरी की निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। यानी केवल एक ईएमआई छूट जाने के कारण ग्राहक का मोबाइल या लैपटॉप तत्काल बंद कर देना उचित नहीं माना जाएगा। वित्तीय संस्थानों को ग्राहकों के साथ पारदर्शी तरीके से रिकवरी प्रक्रिया अपनानी होगी और तकनीकी पाबंदी लगाने से पहले निर्धारित नियमों का पालन करना होगा।
आरबीआई ने जरूरी सेवाओं को लेकर भी सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। अगर किसी वित्तपोषित डिवाइस पर किसी स्थिति में तकनीकी प्रतिबंध लगाया जाता है, तब भी आने वाली कॉल, एसएमएस और इमरजेंसी कॉल जैसी जरूरी सुविधाओं को पूरी तरह बंद नहीं किया जा सकेगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वित्तीय विवाद या ईएमआई बकाया होने की स्थिति में भी ग्राहक जरूरी संचार और आपातकालीन सेवाओं से पूरी तरह कट न जाए।
डिवाइस लॉक करने वाली तकनीक के इस्तेमाल को लेकर भी नए नियमों में सख्ती की गई है। डिवाइस पर किसी तरह की तकनीकी पाबंदी लगाने के लिए इस्तेमाल होने वाला सॉफ्टवेयर या सिस्टम मनमाने तरीके से नहीं लगाया जा सकेगा। ऐसी तकनीक के लिए डिवाइस निर्माता यानी OEM या संबंधित ऑपरेटिंग सिस्टम प्लेटफॉर्म से जरूरी प्रमाणन की आवश्यकता होगी। इसके अलावा बैंक और तकनीकी सेवा उपलब्ध कराने वाले थर्ड पार्टी सर्विस प्रोवाइडर को भी निर्धारित आवश्यकताओं और प्रमाणन का पालन करना होगा।
RBI ने लोन रिकवरी एजेंट्स के कामकाज को लेकर भी सख्ती की है। बैंक और वित्तीय संस्थान रिकवरी एजेंट को ग्राहक या गारंटर की वही जानकारी उपलब्ध करा सकेंगे, जो वसूली की प्रक्रिया के लिए जरूरी हो। इसका उद्देश्य ग्राहकों की निजी जानकारी के अनावश्यक इस्तेमाल को रोकना है। रिकवरी एजेंट्स को ग्राहक को परेशान करने, धमकाने, अनुचित भाषा का इस्तेमाल करने या सोशल मीडिया के जरिए दबाव बनाने जैसी गतिविधियों से भी बचना होगा।
नए नियमों का उद्देश्य एक तरफ वित्तीय संस्थानों के वैध रिकवरी अधिकारों को बनाए रखना है, तो दूसरी तरफ ग्राहकों को अनुचित या अत्यधिक तकनीकी दबाव से सुरक्षा देना भी है। खासकर ऐसे समय में जब मोबाइल और लैपटॉप लोगों के लिए सिर्फ मनोरंजन के साधन नहीं, बल्कि पढ़ाई, नौकरी, बैंकिंग, कारोबार और जरूरी संचार का हिस्सा बन चुके हैं।
इसलिए 1 जनवरी 2027 से लागू होने वाले ये प्रावधान ग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। हालांकि इसका यह मतलब नहीं है कि ईएमआई नहीं भरने पर बैंक कोई कार्रवाई नहीं कर सकते। बकाया रकम की वसूली के लिए बैंक और वित्तीय संस्थान निर्धारित कानूनी और नियामकीय प्रक्रिया अपना सकेंगे। फर्क इतना होगा कि ग्राहक के डिवाइस को मनमाने तरीके से लॉक करना हर लोन की वसूली का सामान्य तरीका नहीं बनाया जा सकेगा।
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