
व्यापार | भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध वित्तपोषण को रोकने के लिए नियम सख्त होने चाहिए, लेकिन इस दौरान यह भी ध्यान रखा जाए कि वित्तीय समावेशन पर असर न पड़े। उनका मानना है कि किसी भी नए नियम या नीति को इस तरह से बनाया जाना चाहिए कि ईमानदार उपभोक्ता और छोटे कारोबार प्रभावित न हों।
क्या बोले गवर्नर?
RBI गवर्नर ने वित्तीय क्षेत्र में बढ़ती धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि "टेक्नोलॉजी और डिजिटल बैंकिंग के विस्तार के साथ अवैध वित्तीय गतिविधियां भी बढ़ रही हैं। इसलिए सख्त नियम जरूरी हैं, लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि ये छोटे व्यवसायों और आम उपभोक्ताओं के वित्तीय समावेशन को बाधित न करें।"
वित्तीय समावेशन और सख्त नियमों के बीच संतुलन क्यों जरूरी?
डिजिटल ट्रांजैक्शन पर असर – बहुत ज्यादा सख्त नियम डिजिटल भुगतान और फिनटेक कंपनियों के संचालन को जटिल बना सकते हैं।
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छोटे कारोबारियों की परेशानी – अगर वित्तीय लेनदेन के नियम बेहद कड़े होंगे, तो छोटे व्यापारी और स्टार्टअप्स के लिए क्रेडिट और अन्य वित्तीय सेवाएं हासिल करना मुश्किल हो सकता है।
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बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच – RBI ने बीते वर्षों में बैंकिंग सेवाओं को गांवों और दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंचाने का काम किया है, ऐसे में नए नियमों से यह प्रयास कमजोर न हो।
मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध फंडिंग पर क्या रहेगा फोकस?
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कड़े KYC नियम – फर्जी खातों और संदिग्ध लेनदेन की पहचान के लिए सख्त ग्राहक पहचान (KYC) प्रक्रिया लागू की जाएगी।
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डिजिटल निगरानी – बैंकों और वित्तीय संस्थानों को संदिग्ध डिजिटल लेनदेन की रिपोर्टिंग को मजबूत करने का निर्देश दिया जा सकता है।
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फिनटेक कंपनियों की जांच – हाल ही में RBI ने कई डिजिटल लोन ऐप और फिनटेक प्लेटफॉर्म्स पर कार्रवाई की है, यह सख्ती आगे भी जारी रह सकती है।
क्या होगा आगे?
RBI गवर्नर के इस बयान से साफ है कि आने वाले समय में मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध फंडिंग पर और सख्ती होगी, लेकिन इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि आम जनता और छोटे व्यवसायों की वित्तीय पहुंच बनी रहे। नए नियमों को ऐसा बनाया जाएगा कि वे पारदर्शिता और सुरक्षा के साथ वित्तीय समावेशन को भी बढ़ावा दें।





