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पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच RBI सतर्क, FY27 के लिए महंगाई अनुमान बढ़ाया

nidhi
5 Jun 2026 11:11 AM IST
पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच RBI सतर्क, FY27 के लिए महंगाई अनुमान बढ़ाया
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पश्चिम एशिया युद्ध के असर से बढ़ी महंगाई की चिंता, RBI ने FY27 का अनुमान 5.1% किया
New Delhi : भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर का अनुमान बढ़ाकर 5.1% कर दिया है. पहले आरबीआई ने इसके 4.6% रहने का अनुमान लगाया था, लेकिन अब इसमें बढ़ोतरी कर दी गई है. आरबीआई की तीन दिवसीय मौद्रिक नीति समिति की बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए गवर्नर संजय मल्‍होत्रा ने कहा कि आगे महंगाई में वृद्धि हो सकती है. चालू वित्‍त वर्ष के लिए कोर इंफ्लेशन 4.7 फीसदी रहने का अनुमान केंद्रीय बैंक ने जताया है.
आरबीआई गवर्नर के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजारों में कच्चे माल की कीमतों में लगातार तेजी आ रही है. इस वजह से देश में महंगाई बढ़ सकती है. आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) की चारों तिमाहियों के लिए भी महंगाई का जो अनुमान लगाया है, उसके अनुसार, साल के आखिरी महीनों में महंगाई चरम पर होगी. आरबीआई ने पहली तिमाही (Q1) में महंगाई दर 4.2 फीसदी रहने का अनुमान जताया है. दूसरी तिमाही (Q2) में यह 5.1% और तीसरी तिमाही (Q3) में यह 5.9% को छू सकती है. यह त्योहारी सीजन होता है. चौथी तिमाही (Q4) में भी महंगाई दर के 5.9% फीसदी रहने का अनुमान केंद्रीय बैंक ने जताया है.
डरने की जरूरत नहीं, जोखिम अभी संतुलित
महंगाई का ग्राफ भले ही ऊपर जाता दिख रहा हो, लेकिन आरबीआई का कहना है कि डरने की जरूरत नहीं है. गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि महंगाई से जुड़े जोखिम फिलहाल “संतुलित स्थिति” में हैं. यानी सरकार और आरबीआई मिलकर इसे काबू में रखने के लिए जरूरी कदम उठा रहे हैं, ताकि स्थिति हाथ से बाहर न निकले.
किन चीजों के रेट में वृद्धि का ज्‍यादा खतरा
कच्‍चे तेल के दाम बढ़ने से देश में पेट्रोल, डीजल और गैस के दामों में वृद्धि हुई है. कमर्शियल सिलेंडर की कीमतें बढ़ने से रेस्टोरेंट का बिल महंगा हो सकता है. कुछ जगह पर चीजों के रेट बढ़ भी गए हैं. डीजल महंगा होने से माल ढुलाई की लागत बढ़ गई है. इससे भी फल-सब्‍जी से लेकर जरूरत की हर चीज के दाम बढ़ने की आशंका है. इसी तरह लोहा, एल्युमिनियम और कॉपर जैसे बेस मेटल्स की बढ़ती कीमतों के कारण इलेक्ट्रॉनिक्स, गाड़ियां और घर बनाने का खर्च बढ़ सकता है.
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