
नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ताजा बुलेटिन रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक व्यापार नीतियों में बढ़ते टैरिफ और संरक्षणवाद के चलते अर्थव्यवस्था में मंदी और अस्थिरता का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, भारत अपनी मजबूत घरेलू मांग और आर्थिक सुधारों के चलते इस दबाव को झेलने में सक्षम है।
टैरिफ से क्यों बढ़ा मंदी का खतरा?
वैश्विक व्यापार नीतियों में सख्ती से एक्सपोर्ट पर असर
आयात शुल्क बढ़ने से महंगाई दर में इजाफा
औद्योगिक उत्पादन में गिरावट का खतरा
विदेशी निवेश पर असर
RBI ने संकेत दिए हैं कि अगर टैरिफ वॉर लंबा चलता है, तो इसका असर वैश्विक आपूर्ति शृंखला और भारतीय बाजार पर भी दिख सकता है।
भारत क्यों बना मजबूत?
घरेलू खपत और निवेश में वृद्धि
डिजिटल अर्थव्यवस्था और स्टार्टअप ग्रोथ
सरकार की आत्मनिर्भर भारत नीति से मजबूती
RBI की सख्त मौद्रिक नीति से महंगाई नियंत्रण
प्रवासी भारतीयों की रेमिटेंस में उछाल
RBI बुलेटिन के मुताबिक, प्रवासी भारतीयों द्वारा भेजी गई धनराशि (रेमिटेंस) में बड़ा उछाल आया है। खासतौर पर अमेरिका, यूके और यूरोपीय देशों में बसे भारतीयों से आने वाली रकम ने खाड़ी देशों से आने वाली राशि को पीछे छोड़ दिया है।
2023 में भारत को कुल रेमिटेंस – $125 बिलियन
अमेरिका और यूरोप से अधिक धनराशि आई
खाड़ी देशों में मंदी और नौकरी में कटौती का असर
आगे क्या?
RBI ने कहा कि भारत की स्थिर आर्थिक नीति, डिजिटल ट्रांजेक्शन में बढ़ोतरी और मजबूत प्रवासी नेटवर्क देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। हालांकि, वैश्विक मंदी और टैरिफ से जुड़े फैसलों पर सतर्क निगरानी जरूरी होगी।





