
Business बिजनेस: HDFC बैंक के बोर्ड ने बड़ा निर्णय लेते हुए पूर्व वित्त सचिव और भारत के 25वें मुख्य चुनाव आयुक्त रहे राजीव कुमार को बैंक का नया चेयरमैन नियुक्त किया है। बैंक की ओर से सोमवार को जारी फाइलिंग में इस नियुक्ति की आधिकारिक जानकारी दी गई।
फाइलिंग के अनुसार, बोर्ड ने राजीव कुमार को 30 जून 2026 से चार वर्षों के लिए बैंक का इंडिपेंडेंट डायरेक्टर नियुक्त करने को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही उन्हें बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन के रूप में भी जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मंजूरी पर आधारित होगी।
बोर्ड ने स्पष्ट किया कि आरबीआई द्वारा निर्धारित तारीख से राजीव कुमार की चेयरमैन के रूप में नियुक्ति तीन साल की अवधि के लिए प्रभावी होगी। इस दौरान उन्हें वेतन सहित अन्य निर्धारित सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी, जिनका विवरण नियामकीय मंजूरी के अनुसार तय किया जाएगा।
राजीव कुमार, जो भारत सरकार में पूर्व वित्त सचिव रह चुके हैं और बाद में देश के 25वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं, प्रशासनिक और नीति निर्माण के क्षेत्र में लंबा अनुभव रखते हैं। उनकी नियुक्ति को बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
यह नियुक्ति ऐसे समय में की गई है जब HDFC बैंक अपने शीर्ष नेतृत्व में बदलाव के दौर से गुजर रहा है। बोर्ड ने बताया कि यह निर्णय बैंक की दीर्घकालिक रणनीति और कॉर्पोरेट गवर्नेंस को मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया है।
राजीव कुमार, अतनु चक्रवर्ती की जगह लेंगे, जिन्होंने मार्च में अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया था। चक्रवर्ती ने इस्तीफे के पीछे नैतिक चिंताओं का हवाला दिया था, जिसके बाद बैंक में चेयरमैन पद खाली हो गया था।
बोर्ड के अनुसार, नई नियुक्ति से बैंक के नेतृत्व ढांचे में स्थिरता आएगी और रणनीतिक निर्णयों में निरंतरता बनी रहेगी। बैंक का मानना है कि राजीव कुमार का प्रशासनिक अनुभव और नीति निर्माण में उनकी विशेषज्ञता संस्थान के लिए लाभकारी साबित होगी।
HDFC बैंक ने अपनी फाइलिंग में यह भी कहा कि यह नियुक्ति भारतीय रिजर्व बैंक की मंजूरी पर निर्भर करेगी, जिसके बाद ही यह पूरी तरह प्रभावी होगी। बैंक ने नियामकीय प्रक्रिया का पालन करते हुए सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि एक अनुभवी प्रशासनिक अधिकारी और पूर्व चुनाव आयुक्त को बैंक के शीर्ष पद पर नियुक्त करना कॉर्पोरेट गवर्नेंस और नियामकीय अनुपालन के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण कदम है।
बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े जानकारों के अनुसार, इस नियुक्ति से HDFC बैंक की नेतृत्व संरचना को मजबूती मिलेगी और निवेशकों का भरोसा भी बढ़ सकता है। हालांकि, अंतिम प्रभाव RBI की मंजूरी और आगामी कार्यान्वयन पर निर्भर करेगा।
फिलहाल, बैंक की ओर से कहा गया है कि वह नियामकीय प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन करते हुए इस बदलाव को सुचारू रूप से लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आने वाले महीनों में इस नियुक्ति से जुड़े सभी औपचारिक कदम पूरे कर लिए जाएंगे।





