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पहली बार आसियान के रंगों से रोशन हुआ कुतुब मीनार दिल्ली में दिखा ऐतिहासिक दृश्य

Ratna Netam
8 Aug 2026 9:50 PM IST
पहली बार आसियान के रंगों से रोशन हुआ कुतुब मीनार दिल्ली में दिखा ऐतिहासिक दृश्य
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नई दिल्ली : राजधानी दिल्ली में शुक्रवार शाम एक ऐतिहासिक नजारा देखने को मिला, जब देश की मशहूर ऐतिहासिक धरोहर कुतुब मीनार पहली बार एसोसिएशन ऑफ साउथईस्ट एशियन नेशंस यानी आसियान के रंगों से रोशन हुई। आसियान की 59वीं स्थापना वर्षगांठ के मौके पर कुतुब मीनार को संगठन के झंडे और रंगों की रोशनी से सजाया गया। इस खास आयोजन ने भारत और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के बीच मजबूत होते संबंधों और लंबे समय से चले आ रहे सभ्यतागत जुड़ाव को भी प्रदर्शित किया।
आसियान दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में नई दिल्ली स्थित आसियान देशों के राजनयिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। भारत में फिलीपींस के दूतावास के अनुसार, आसियान की स्थापना 8 अगस्त 1967 को पांच देशों ने मिलकर की थी। संगठन का उद्देश्य दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के बीच सहयोग, शांति, स्थिरता और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना था। समय के साथ इसका विस्तार हुआ और अब इसमें दक्षिण-पूर्व एशिया के 11 देश शामिल हैं।
आसियान के मौजूदा सदस्य देशों में ब्रुनेई दारुस्सलाम, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओ पीडीआर, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, तिमोर लेस्ते और वियतनाम शामिल हैं। 59वीं वर्षगांठ के अवसर पर इन देशों की साझा पहचान और क्षेत्रीय सहयोग को कुतुब मीनार की रोशनी के माध्यम से खास अंदाज में प्रदर्शित किया गया।
भारत में सिंगापुर के उच्चायुक्त साइमन वोंग ने भी आसियान नई दिल्ली कमेटी परिवार के साथ इस अवसर को मनाया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कार्यक्रम की तस्वीरें साझा करते हुए खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली में एएनडीसी परिवार के साथ कुतुब मीनार पर पहली बार आसियान झंडे की रोशनी के साथ आसियान दिवस मनाना बेहद खुशी की बात है। उन्होंने इस आयोजन के लिए फिलीपींस की चेयर को भी धन्यवाद दिया।
फिलीपींस के राजदूत जोसेल एफ. इग्नासियो ने इस पहल को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के लिए भारत सरकार के समर्थन से वह सम्मानित महसूस कर रहे हैं। उनके मुताबिक, यह आयोजन आसियान और भारत के बीच लंबे समय से चली आ रही दोस्ती, सभ्यताओं के बीच संबंध और मौजूदा रणनीतिक साझेदारी को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि भारत और आसियान के संबंध साझा मूल्यों और आपसी प्रतिबद्धता पर आधारित हैं, जिनका उद्देश्य दोनों समाजों में शांति और समृद्धि को बढ़ावा देना है।
भारत और आसियान के संबंधों का इतिहास भी काफी पुराना है। दोनों पक्षों ने वर्ष 1992 में सेक्टोरल डायलॉग रिलेशन की शुरुआत की थी। इसके बाद लगातार बढ़ते सहयोग के साथ भारत और आसियान के संबंध मजबूत होते गए। वर्ष 2022 में दोनों के बीच संबंध व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदल गए। इसके बाद विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और विस्तार मिला।
व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत भारत और आसियान व्यापार और निवेश, पर्यटन, कनेक्टिविटी, कृषि, ऊर्जा, संस्कृति, तकनीक और शिक्षा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग करते हैं। इसके अलावा दोनों पक्षों के बीच लोगों के बीच संपर्क और आदान-प्रदान को बढ़ाने पर भी जोर दिया जाता है।
कुतुब मीनार पर आसियान के रंगों की रोशनी इसी व्यापक साझेदारी की प्रतीकात्मक झलक के तौर पर देखी गई। आयोजन से जुड़े विवरण के मुताबिक, ऐतिहासिक स्मारक को आसियान के झंडे के रंगों में रोशन किया गया। इसे 8 अगस्त 2026 को संगठन की 59वीं स्थापना वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित किया गया।
आसियान को अगर एक आर्थिक इकाई के रूप में देखा जाए तो यह दुनिया के प्रमुख आर्थिक समूहों में शामिल है। संगठन के 11 सदस्य देशों की कुल आबादी 70 करोड़ से अधिक बताई गई है। इन देशों की संयुक्त अर्थव्यवस्था का आकार भी बेहद बड़ा है। ऐसे में भारत के लिए आसियान केवल एक क्षेत्रीय समूह नहीं, बल्कि व्यापार, निवेश, रणनीतिक सहयोग और कनेक्टिविटी के लिहाज से महत्वपूर्ण साझेदार है।
कुतुब मीनार पर आसियान के रंगों में रोशनी किए जाने के कार्यक्रम ने इसी बढ़ती साझेदारी को एक अलग और आकर्षक रूप में सामने रखा। ऐतिहासिक स्मारक पर आसियान के विशेष रंगों और प्रतीकों का प्रदर्शन भारत और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के बीच मजबूत होते संबंधों का संदेश देता नजर आया। आयोजन की तस्वीरों और वीडियो ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
कुल मिलाकर, आसियान की 59वीं स्थापना वर्षगांठ पर कुतुब मीनार का आसियान के रंगों में जगमगाना भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच बढ़ती दोस्ती, सांस्कृतिक जुड़ाव और रणनीतिक साझेदारी की एक खास तस्वीर पेश करता है। यह आयोजन ऐतिहासिक धरोहर और आधुनिक कूटनीति के मेल का भी उदाहरण बना, जिसने नई दिल्ली में आसियान दिवस समारोह को यादगार बना दिया।
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