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8th Pay Commission से पहले OPS पर उठे सवाल, कर्मचारियों की चिंता बढ़ी

Saba Naaz
21 July 2026 3:29 PM IST
8th Pay Commission से पहले OPS पर उठे सवाल, कर्मचारियों की चिंता बढ़ी
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नई दिल्ली। 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्र सरकार के कर्मचारियों में वेतन बढ़ोतरी की उम्मीदों के बीच पेंशन व्यवस्था को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। वेतन आयोग की बैठकों के बाद अब सबसे ज्यादा चर्चा पुरानी पेंशन योजना (OPS), नई पेंशन योजना (NPS) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) को लेकर हो रही है। कर्मचारी संगठन सरकार के रुख से नाराज हैं और लगातार पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग उठा रहे हैं।

दरअसल, सरकार की ओर से जारी गजट नोटिफिकेशन में 8वें वेतन आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस में पेंशन से जुड़े कई मुद्दों को शामिल किया गया है। इसी को लेकर कर्मचारी संगठनों और सरकार के बीच बहस शुरू हो गई है। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार NPS और UPS की समीक्षा पर ज्यादा जोर दे रही है, जबकि उनकी मांग पुरानी पेंशन योजना लागू करने की है।

सरकार के गजट नोटिफिकेशन के अनुसार, 8वें वेतन आयोग को नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) के अंतर्गत आने वाले कर्मचारियों के डेथ-कम-रिटायरमेंट ग्रेच्युटी (DCRG) की समीक्षा करने और इस संबंध में सुझाव देने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा उन कर्मचारियों और पेंशनर्स की ग्रेच्युटी और पेंशन की समीक्षा भी आयोग के दायरे में रखी गई है, जो NPS के तहत नहीं आते हैं।

नोटिफिकेशन में गैर-अंशदायी (Non-Contributory) पेंशन योजनाओं से सरकारी खजाने पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ को भी ध्यान में रखने की बात कही गई है। इसी बिंदु को लेकर कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सरकार OPS की जगह नई पेंशन व्यवस्था को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

कर्मचारी यूनियनों की मांग है कि NPS और UPS दोनों को समाप्त कर 1972 के पेंशन नियमों के आधार पर पुरानी पेंशन योजना को दोबारा लागू किया जाए। कर्मचारियों का तर्क है कि रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा के लिए निश्चित पेंशन जरूरी है। उनका कहना है कि पेंशन किसी कर्मचारी पर सरकार की कृपा नहीं बल्कि वर्षों की सेवा का अधिकार है।

कई कर्मचारी संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा है कि पेंशन सामाजिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनका मानना है कि 1 जनवरी 2004 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को NPS के दायरे में लाना उचित नहीं है, क्योंकि इसमें बाजार आधारित जोखिम जुड़ा हुआ है।

कर्मचारी संगठनों ने यह भी दावा किया है कि अप्रैल 2025 में UPS लागू होने के बावजूद बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने इसे स्वीकार नहीं किया। उनके अनुसार लगभग 26 लाख NPS सब्सक्राइबर्स में से करीब 1.22 लाख कर्मचारियों ने ही UPS को चुना है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि यह आंकड़ा बताता है कि नई पेंशन व्यवस्था को लेकर कर्मचारियों में भरोसे की कमी है।

वहीं पेंशनर्स संगठनों का कहना है कि बुजुर्ग अवस्था में आर्थिक स्थिरता के लिए निश्चित और गारंटीकृत पेंशन बेहद जरूरी है। उनका सुझाव है कि अगर सरकार OPS लागू नहीं करती है तो कम से कम न्यूनतम पेंशन की गारंटी, सरकारी योगदान में बढ़ोतरी और सुरक्षित आय का प्रावधान किया जाना चाहिए।

8वें वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया था। आयोग को अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए सरकार की ओर से समय दिया गया है। शुरुआती बैठकों के बाद अब आयोग आगे की प्रक्रिया में जुटा है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि वेतन आयोग उनकी पेंशन संबंधी मांगों पर भी सकारात्मक विचार करेगा।

फिलहाल सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच OPS, NPS और UPS को लेकर सहमति नहीं बन पाई है। आने वाले समय में 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों में पेंशन व्यवस्था को लेकर क्या बदलाव आते हैं, इस पर देशभर के लाखों केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनर्स की नजर बनी हुई है।

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