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गूगल से जुड़ी वेमो की चीनी रोबोटैक्सी पर सवाल, डेटा सुरक्षा को लेकर अमेरिका में बहस

nidhi
22 Oct 2026 10:39 AM IST
गूगल से जुड़ी वेमो की चीनी रोबोटैक्सी पर सवाल, डेटा सुरक्षा को लेकर अमेरिका में बहस
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ऑटो डेस्क : गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट के स्वामित्व वाली वेमो अपने रोबोटैक्सी बेड़े में चीन की वाहन निर्माता जीकर की इलेक्ट्रिक वैन शामिल कर रही है। सवाल यह उठ रहा है कि अमेरिकी सड़कों पर चलने वाले इन वाहनों की तकनीक और डेटा तक किसकी पहुंच होगी। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इन गाड़ियों से चीन को जासूसी डेटा भेजे जाने का कोई पुष्ट प्रमाण सामने नहीं आया है।

वेमो ने इस वाहन को ‘ओहाई’ नाम दिया है। यह पूरी तरह स्वचालित टैक्सी सेवा के लिए तैयार किया गया प्लेटफॉर्म है। कंपनी ने मई 2026 में इसके जरिए शुरुआती सार्वजनिक यात्राएं शुरू करने की घोषणा की थी। शुरुआती चरण में सैन फ्रांसिस्को, फीनिक्स और लॉस एंजिलिस के चुनिंदा यात्रियों को शामिल करने की योजना थी। कंपनी का कहना है कि नया वाहन उसके चालक रहित परिवहन नेटवर्क के विस्तार में मदद करेगा।
विवाद की मुख्य वजह वाहन का चीन में निर्माण होना है। वेमो के मुताबिक, जीकर से आने वाले मूल वाहन में प्रतिबंधित चीनी कनेक्टेड-कार तकनीक नहीं होती। अमेरिका पहुंचने के बाद उसमें कंपनी के स्वचालित ड्राइविंग उपकरण, सेंसर और सॉफ्टवेयर लगाए जाते हैं। वेमो का दावा है कि यह काम एरिजोना में होता है और उसकी व्यवस्था अमेरिकी नियमों के अनुरूप है। लेकिन आलोचक पूरी आपूर्ति शृंखला की स्वतंत्र जांच की जरूरत बता रहे हैं। चिंता का आधार यह है कि आधुनिक कनेक्टेड वाहन केवल परिवहन साधन नहीं होते। उनमें बाहरी संचार, स्थान संबंधी जानकारी और स्वचालित संचालन से जुड़ी प्रणालियां होती हैं। अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने चीन और रूस से पर्याप्त संबंध रखने वाली कुछ वाहन तकनीकों को राष्ट्रीय सुरक्षा का जोखिम माना है। विभाग के नियम विशेष रूप से वाहन संचार प्रणाली और स्वचालित ड्राइविंग सॉफ्टवेयर जैसी तकनीकों को संबोधित करते हैं।
वेमो के मामले में पूर्व अमेरिकी वाहन सुरक्षा सलाहकार मिसी कमिंग्स ने सवाल उठाया कि वाहन के अंदर मौजूद सभी उपकरणों की स्वतंत्र जांच के बिना दावों की पुष्टि कैसे होगी। उन्होंने अतिरिक्त सेंसर के जरिए डेटा जुटाने की संभावना पर चिंता व्यक्त की। यह एक आशंका है, किसी छिपे उपकरण की बरामदगी का निष्कर्ष नहीं। कंपनी ने इसका विरोध करते हुए कहा कि उसके वाहन सुरक्षा परीक्षणों से गुजरते हैं।
कंपनी का यह भी कहना है कि वह जीकर को यात्रियों की जानकारी, वाहन से संबंधित परिचालन डेटा या अपने स्वचालित ड्राइविंग सिस्टम से जुटाई गई जानकारी नहीं देती। वेमो ने अपने सोर्स कोड और तकनीक साझा नहीं करने की बात भी कही है। इस तरह विवाद में दो पक्ष हैं—कंपनी अपनी तकनीकी सुरक्षा और अमेरिकी नियंत्रण का दावा कर रही है, जबकि आलोचक निर्माण से अंतिम संचालन तक सत्यापन चाहते हैं। अमेरिका में संबंधित नियम पहले से मौजूद हैं। कुछ सॉफ्टवेयर संबंधी प्रतिबंध मॉडल वर्ष 2027 से लागू होने हैं, जबकि निर्धारित कनेक्टेड हार्डवेयर पर प्रतिबंध मॉडल वर्ष 2030 से प्रभावी होंगे। इन नियमों का दायरा विशिष्ट तकनीक, उसके आपूर्तिकर्ता और चीन या रूस से संबंधों पर निर्भर करता है। इसलिए इन्हें बिना शर्त सभी चीनी वाहनों पर एक समान प्रतिबंध बताना अधूरी जानकारी होगी।
इसके साथ अमेरिकी सीनेटर एलिसा स्लॉटकिन और बर्नी मोरेनो ने ‘कनेक्टेड व्हीकल सिक्योरिटी एक्ट ऑफ 2026’ आगे बढ़ाया है। जुलाई में इसे संबंधित सीनेट समिति का समर्थन मिला था। प्रस्ताव का उद्देश्य चीन से जुड़े वाहनों, सॉफ्टवेयर और महत्वपूर्ण पुर्जों पर नियंत्रण मजबूत करना है। समर्थक इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ अमेरिकी वाहन उद्योग और रोजगार की रक्षा से भी जोड़ते हैं। समिति से मंजूरी को अंतिम कानून बन जाना नहीं माना जाना चाहिए। फिलहाल सवाल का सीधा जवाब यह है कि सुरक्षा संबंधी चिंताएं मौजूद हैं, लेकिन वेमो की इन गाड़ियों में किसी ‘छिपे बड़े खतरे’ की पुष्टि नहीं हुई है। आगे स्वतंत्र परीक्षण, नियामकीय निगरानी और डेटा तक पहुंच की स्पष्ट व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी। वाहन कहां बना है, इसके साथ यह देखना भी जरूरी है कि उसकी संवेदनशील प्रणालियां कौन नियंत्रित करता है।

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