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सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में लोन ग्रोथ तेज, लेकिन डिपॉजिट में सुस्ती से बढ़ा दबाव

Kavita2
5 July 2026 5:39 PM IST
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में लोन ग्रोथ तेज, लेकिन डिपॉजिट में सुस्ती से बढ़ा दबाव
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Sports स्पोर्ट्स: पब्लिक सेक्टर के बैंकों (PSBs) ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही की शुरुआत मजबूत प्रदर्शन के साथ की है। ज़्यादातर सरकारी बैंकों ने लोन बांटने में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की है, जिससे यह संकेत मिला है कि बाजार में क्रेडिट डिमांड अभी भी मजबूत बनी हुई है। खासकर रिटेल, एग्रीकल्चर और एमएसएमई सेक्टर में कर्ज की मांग में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है।

भारत के पब्लिक सेक्टर बैंकों ने शुरुआती तिमाही के बिजनेस अपडेट में बताया कि लोन बढ़ोतरी लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रों में पॉजिटिव रही।

हालांकि, इस मजबूत लोन बढ़ोतरी के मुकाबले भारतीयों की बढ़ोतरी तेजी से धीमी हो रही है, जिससे बैंकों के फिक्स्ड बेस पर दबाव बढ़ने की स्थिति बन रही है।

बैंकों के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 12 सरकारी बैंकों में से नौ के बिजनेस अपडेट में यह सामने आया है कि साल-दर-साल लोन बढ़ोतरी 12 प्रतिशत से लेकर 29 प्रतिशत के बीच दर्ज की गई है। इसके मुकाबले भारतीयों की बढ़ोतरी केवल 3.5 प्रतिशत से 16 प्रतिशत के बीच रही।

क्रेडिट डिमांड में बढ़ोतरी मुख्य रूप से खुदरा ऋण, कृषि क्षेत्र की फसलों और छोटे एवं मध्यम उद्योगों (MSME) की बढ़ती मांग के कारण देखी गई है।

बैंकिंग के अनुसार, लोन और संस्थागत वृद्धि के बीच यह अंतर बैंकिंग प्रणाली के लिए एक चुनौती बन सकता है, क्योंकि लोन देने के लिए आवश्यक संसाधन बढ़ने में दबाव बढ़ता है।

डिपॉजिट ग्रोथ की धीमी गति से यह संकेत मिलता है कि ग्राहक जमा करने की प्रवृत्ति धीमी कम रही है या फिर फंड अन्य निवेश ब्याज की ओर जा रहा है।

बैंकिंग सेक्टर के जानकारों का रुझान है कि अगर यही स्थिति आगे भी बनी रहती है, तो बैंकों को अपनी बढ़ती लागत और तरलता प्रबंधन पर अधिक ध्यान देना होगा। इसके अलावा, ब्याज दरों और संस्थागत आकर्षित करने वाली योजनाओं में बदलाव की संभावना भी बढ़ सकती है।

कुल मिलाकर, सरकारी बैंकों का शुरुआती प्रदर्शन मजबूत दिख रहा है, लेकिन लोन और संस्थागत के बीच बढ़ने अंतर आने वाले महीनों में नीतिगत और वित्तीय उन्नति पैदा कर सकता है।

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