
नई दिल्ली। अचानक पैसों की जरूरत, मेडिकल इमरजेंसी, क्रेडिट कार्ड बिल या किसी अन्य खर्च को पूरा करने के लिए आजकल लोग तेजी से इंस्टेंट डिजिटल लोन ऐप्स का सहारा ले रहे हैं। कुछ ही मिनटों में लोन मिल जाने की सुविधा के कारण यह तरीका युवाओं में काफी लोकप्रिय हो गया है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि बिना जानकारी के लिया गया डिजिटल लोन कई बार आर्थिक, मानसिक और कानूनी परेशानी का कारण बन जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, डिजिटल लोन लेने से पहले ऐप की वैधता, ब्याज दर और नियमों की जांच करना बेहद जरूरी है। एक रिपोर्ट के अनुसार, नौकरी छूटने के बाद लोन लेने वाली एक महिला को किस्त में देरी होने पर रिकवरी एजेंटों द्वारा लगातार मानसिक दबाव और धमकियों का सामना करना पड़ा, जिससे उसे मजबूरी में कर्ज चुकाना पड़ा। एक सर्वे में सामने आया है कि करीब 72% लोगों ने लोन रिकवरी एजेंटों द्वारा उत्पीड़न की शिकायत की है। वहीं, डिजिटल लोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में युवा शामिल हैं।
डिजिटल लोन की लोकप्रियता का मुख्य कारण है आसान प्रक्रिया, कम दस्तावेज और तुरंत पैसा मिलना। लेकिन यही तेजी कई बार लोगों को बिना शर्त पढ़े लोन लेने के लिए प्रेरित कर देती है। विशेषज्ञों का कहना है कि खतरा तब बढ़ता है जब कुछ अनधिकृत ऐप्स यूजर्स से कॉन्टैक्ट लिस्ट, गैलरी, लोकेशन, कैमरा और मैसेज जैसी अनुमति मांगते हैं। बाद में भुगतान में देरी होने पर इसी डेटा का दुरुपयोग कर दबाव बनाया जा सकता है। शिकायतों में यह भी सामने आया है कि कई रिकवरी एजेंट लगातार फोन कॉल, मैसेज और परिवार या दोस्तों को संपर्क करने की धमकी देकर मानसिक दबाव बनाते हैं। हालांकि, RBI से रेगुलेटेड बैंक और NBFC तय नियमों के अनुसार ही वसूली प्रक्रिया अपनाते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी लोन ऐप से पहले यह जांचना जरूरी है कि वह RBI से मान्यता प्राप्त बैंक या NBFC से जुड़ा है या नहीं। साथ ही ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस और सभी शर्तों को ध्यान से पढ़ना चाहिए। अगर कोई ऐप बहुत कम समय में लोन चुकाने का दबाव डाले, अधिक ब्याज वसूले या अनावश्यक परमिशन मांगे तो उससे सावधान रहना चाहिए। RBI से अधिकृत लोन ऐप की पहचान के लिए उपयोगकर्ताओं को यह देखना चाहिए कि संस्था रेगुलेटेड है या नहीं, सभी चार्ज लिखित में दिए गए हैं या नहीं और प्राइवेसी पॉलिसी स्पष्ट है या नहीं। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल लोन सुविधा जितनी आसान दिखती है, उतनी ही सावधानी की जरूरत भी होती है। थोड़ी सी लापरवाही भविष्य में बड़े वित्तीय संकट का कारण बन सकती है।





