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विदेशी बिकवाली का दबाव: हफ्ते भर लुढ़का शेयर बाजार

Tara Tandi
2 Oct 2026 11:41 AM IST
विदेशी बिकवाली का दबाव: हफ्ते भर लुढ़का शेयर बाजार
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मुंबई: गुरुवार को भारतीय शेयर बाज़ार में लगातार आठवें हफ़्ते गिरावट जारी रही। विदेशी फंड की लगातार निकासी, US बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और जियोपॉलिटिकल चिंताओं के बीच बेंचमार्क इंडेक्स में लगभग 3% की गिरावट आई।
निफ़्टी 50 इंडेक्स 22,421.95 पर बंद हुआ, जो पिछले शुक्रवार के 23,140.5 के क्लोजिंग लेवल से 3.1% कम है।
इसी तरह, सेंसेक्स में 2.7% की गिरावट आई और यह 71,909.7 पर बंद हुआ, जबकि एक हफ़्ते पहले यह 73,895.7 पर था।
मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी गिरावट देखी गई, जिनमें क्रमशः 3.5% और 3.3% की कमी आई।
सेक्टर के हिसाब से देखें तो BSE IT इंडेक्स एकमात्र ऐसा इंडेक्स था जिसमें बढ़त हुई; इसमें हफ़्ते के दौरान 0.2% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
इसके उलट, ऑटो सेक्टर का प्रदर्शन सबसे खराब रहा, जिसमें 5.5% की गिरावट आई। इसके बाद कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में 5.3% की गिरावट रही। FMCG और मेटल इंडेक्स में 4.2% की गिरावट आई, जबकि एनर्जी, हेल्थकेयर और रियल्टी इंडेक्स में 3.3% से 3.6% के बीच गिरावट देखी गई। वहीं, बैंकिंग, कैपिटल गुड्स और पावर इंडेक्स में क्रमशः 2.4%, 2.4% और 2.6% की गिरावट आई।
यह गिरावट बेंचमार्क इंडेक्स के लिए पिछले लगभग 25 सालों में लगातार हफ़्तों तक चली सबसे लंबी गिरावट का दौर है।
इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयरों की बिक्री जारी रखी, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने कुछ सहारा दिया, जिससे गिरावट का असर कुछ कम हुआ।
मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, लगातार जियोपॉलिटिकल तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, विदेशी फंड की बिकवाली और मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर चिंताओं के कारण निवेशकों का भरोसा कमजोर बना रहा।
लगातार जियोपॉलिटिकल तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल से ऊपर बनी रहीं, जबकि US 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड ऊंची बनी रही, जिससे उभरते बाजारों की एसेट्स पर दबाव बढ़ा।
उन्होंने यह भी बताया कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के दौरान बारिश में 13% की कमी रही, जिससे कृषि उत्पादन और खाने-पीने की चीजों की महंगाई (फूड इन्फ्लेशन) को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। जानकारों का कहना है कि रबी की मुख्य फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में हालिया बढ़ोतरी से भी सतर्क मॉनेटरी पॉलिसी अपनाने की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
इसके अलावा, रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी की बैठक अगले हफ़्ते होनी है और पॉलिसी से जुड़ा फ़ैसला 7 अक्टूबर को आएगा।
साथ ही, आने वाले हफ़्ते से दूसरी तिमाही के नतीजों का दौर भी शुरू हो जाएगा।
एनालिस्ट्स के मुताबिक, निकट भविष्य में बाज़ार का रुख ग्लोबल यील्ड, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी फंड के प्रवाह और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगा, जबकि आने वाला नतीजों का दौर इक्विटी को आगे की दिशा देगा।
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