
Business बिजनेस : केंद्र सरकार आने वाले महीनों में विनिवेश के बड़े कार्यक्रम की तैयारी कर रही है, जिसके तहत कई प्रमुख सरकारी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचकर राजस्व जुटाने की योजना बनाई गई है। इस कदम का उद्देश्य सरकारी खजाने को मजबूत करना और वित्तीय संसाधनों को बढ़ाना बताया जा रहा है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, इस सूची में देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC), हिंदुस्तान जिंक और कुछ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक शामिल हो सकते हैं। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि केवल LIC में हिस्सेदारी बिक्री से सरकार को लगभग 10,000 करोड़ रुपये (करीब 1.05 अरब डॉलर) तक की राशि प्राप्त हो सकती है। वहीं हिंदुस्तान जिंक से करीब 5,000 करोड़ रुपये जुटाए जाने की संभावना जताई गई है।सूत्रों के अनुसार, विनिवेश कार्यक्रम पर काम कर रहे अधिकारी लगातार निवेश बैंकरों के साथ बैठकें कर रहे हैं। इन बैठकों में बाजार की मौजूदा स्थिति, निवेशकों की मांग, शेयरों की कीमत और बिक्री के सही समय को लेकर रणनीति पर चर्चा की जा रही है।
सरकार की योजना के तहत भविष्य में और अधिक सरकारी कंपनियों की हिस्सेदारी बिक्री की संभावना भी जताई जा रही है। इसके लिए अतिरिक्त निवेश बैंकरों की नियुक्ति की प्रक्रिया भी चल रही है, ताकि विनिवेश कार्यक्रम को और प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाया जा सके।विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सरकार के वित्तीय घाटे को नियंत्रित करने और विकास परियोजनाओं के लिए संसाधन जुटाने में मदद कर सकता है। हालांकि, शेयर बाजार की स्थिति और निवेशकों की प्रतिक्रिया इस पूरी प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाएगीइस तरह केंद्र सरकार का यह विनिवेश कार्यक्रम आने वाले समय में आर्थिक नीति के दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।





