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बिजली सचिव: कोयले की मौजूदा कमी से महंगी नहीं होगी Electricity

Kunti
7 Oct 2021 4:28 PM GMT
बिजली सचिव: कोयले की मौजूदा कमी से महंगी नहीं होगी Electricity
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कोयले की कमी के कारण बिजली संयंत्रों के समक्ष पैदा हो रही मुश्किलों ने चिंता भी बढ़ाई है.

नई दिल्ली, कोयले की कमी के कारण बिजली संयंत्रों के समक्ष पैदा हो रही मुश्किलों ने चिंता भी बढ़ाई है और आशंका भी। चिंता यह है कि बिजली संकट की जैसी स्थिति चीन में है, वैसी ही भारत में तो उत्पन्न नहीं होने वाली है। आशंका यह है कि अगर ऐसा हुआ तो क्या बिजली कटौती और उसकी दरों में बढ़ोतरी का दौर लंबे समय बाद फिर शुरू हो सकता है। केंद्रीय बिजली सचिव आलोक कुमार इन सभी अटकलों और आशंकाओं को खारिज करते हुए कहते हैं कि इस समस्या का दीर्घकालिक समाधान खोजने की कोशिश हो रही है। फिलहाल न तो बिजली महंगी होगी और न ही इसकी किल्लत। पेश हैं दैनिक जागरण के विशेष संवाददाता जयप्रकाश रंजन से कुमार की हुई बातचीत के प्रमुख अंश :


प्रश्न : कोयले की किल्लत कब तक दूर होगी?

- सारे संसाधन लगे हुए हैं। हमें लगता है कि इस महीने के अंत तक कोयले की दिक्कत काफी हद तक दूर हो जाएगी। स्थिति की उच्च-स्तरीय समीक्षा हो रही है और हम लगातार नजर रखे हुए हैं। स्थिति में सुधार भी हो रहा है। ताप बिजली संयंत्रों को स्टाक के मुताबिक कोयले की आपूर्ति बढ़ रही है। कई राज्यों ने पूर्व में कोयले के दाम समय पर नहीं दिए। महाराष्ट्र और राजस्थान उनमें शामिल हैं। जब उत्पादकों ने कोयला देना बंद कर दिया तो अब ये राज्य कोयले की किल्लत का रोना रो रहे हैं। हालांकि हम कोयला दिक्कत की मूल वजह का समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं।
प्रश्न : सरकार आगे क्या कदम उठाने जा रही है?

- हमारी योजना यह है कि अक्टूबर से मार्च के दौरान कोयला उत्पादन में इतनी वृद्धि हो कि मानसून के दौरान खनन में जो कमी होती है उसकी भरपाई हो जाए। हमने अब कोयला मंत्रालय को कहा है कि मार्च, 2022 तक हमारे पास चार करोड़ टन कोयला का अतिरिक्त स्टाक होना चाहिए। अभी यह 75 लाख टन का है। इसके लिए उन्हें अगले चार-पांच महीने काफी कोयला खनन करना होगा। कोयले का स्टाक घटने से ही बिजली प्लांट के पास रो¨लग स्टाक के तौर पर कोयले की कमी हो जाती है क्योंकि उन्हें कम कोयले की आपूर्ति होती है। यह देखा जाता है कि गर्मियों में बिजली की मांग बढ़ जाती है और दूसरी तरफ कोयले की आपूर्ति भी घट जाती है। इसलिए हर वर्ष मार्च-अप्रैल तक हमारे पर अगले चार-पांच महीने के हिसाब से अतिरिक्त स्टाक होना चाहिए।


प्रश्न : क्या मौजूदा संकट से देश में बिजली की किल्लत पैदा हो सकती है?

- बिल्कुल नहीं। बिजली का जो संकट देश के कुछ हिस्सों में अभी दिख रहा है, उसकी वजह स्थानीय है। बिजली आपूर्ति की कोई दिक्कत नहीं है। देश को जितनी बिजली चाहिए उससे ज्यादा बिजली उपलब्ध है। केंद्र सरकार का आश्वासन है कि बिजली आपूर्ति की कोई समस्या नहीं आने वाली है। जो राज्य जितनी बिजली खरीदना चाहते हैं उन्हें बाजार से बिजली दी जा रही है। लेकिन राज्यों को यह याद रखना होगा कि उन्हें कोयले की कीमत अदा करनी होगी। आखिरकार कोयला निकालने वाली कंपनियों के भी अपने खर्चे हैं।

प्रश्न : क्या इस संकट से बिजली महंगी हो सकती है?

- बिजली की कीमत निर्धारित करने में केंद्र सरकार की कोई भूमिका नहीं होती है। लेकिन इतना निश्चित है कि वर्तमान कोयला संकट से बिजली महंगी नहीं होगी। बिजली की कीमत सामान्य रूप से जिस गणित से बढ़ती है, उसी हिसाब से बढ़ेगी। यह सही है कि बिजली की कीमत तय करने में कोयले की भी भूमिका होती है, लेकिन कोयला कंपनियां दो-तीन वर्षो में ही कीमत बढ़ाती हैं जिसका असर उस वक्त दरों पर दिखता है। बिजली की दरों के बारे में राज्यों की नियामक एजेंसियां फैसला करती हैं।

प्रश्न : भारत के बिजली क्षेत्र में कोयले पर निर्भरता कब तक बनी रहेगी?

- कम से कम अगले 10 वर्षो तक तक तो बिजली उत्पादन में ताप बिजली संयंत्रों की अहम भूमिका बनी रहेगी। देश की मौजूदा आर्थिक विकास की स्थिति को देखते हुए हमारा अनुमान है कि वर्ष 2030 तक सर्वाधिक मांग के वक्त 3,40,000 मेगावाट बिजली की मांग रहेगी। उस वक्त तक सालाना बिजली खपत मौजूदा 1,500 अरब यूनिट से बढ़ कर 3,000 अरब यूनिट हो जाएगी। इसका 60 फीसद उत्पादन कोयला चालित संयंत्रों से होता रहेगा। इस हिसाब से कोयले का घरेलू उत्पादन मौजूदा 70-72 करोड़ टन से बढ़कर 100 करोड़ टन करना होगा। यह क्षमता हासिल करना पूरी तरह संभव है, क्योंकि देश में कोयला खदानों का अभी भी ठीक से दोहन नहीं हुआ है।


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