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विदेश यात्रा पर PM की अपील का असर, गर्मियों में आउटबाउंड टूरिज्म की मांग में गिरावट की आशंका

Kavita2
13 May 2026 12:13 PM IST
विदेश यात्रा पर PM की अपील का असर, गर्मियों में आउटबाउंड टूरिज्म की मांग में गिरावट की आशंका
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Business बिजनेस: भारत की ट्रैवल और टूरिज्म इंडस्ट्री में इस गर्मी के सीजन को लेकर चिंता बढ़ गई है। इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की गैर-ज़रूरी विदेश यात्राओं से बचने की अपील का असर लोगों की यात्रा योजनाओं पर पड़ सकता है, जिससे नई बुकिंग में कमी आने की संभावना है।

एनालिस्ट्स के अनुसार, पहले से ही महंगाई के दबाव और बढ़ते खर्चों के कारण विदेश यात्रा की पूछताछ में लगभग 10 से 15 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई है। यह गिरावट उस समय सामने आ रही है जब आमतौर पर आउटबाउंड टूरिज्म अपने पीक सीजन में होता है।

अप्रैल से जून के बीच भारत में स्कूलों की छुट्टियों के दौरान अमीर और मध्यम वर्गीय परिवार यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और अन्य ठंडी जगहों की यात्रा की योजना बनाते हैं। लेकिन इस बार आर्थिक दबाव और अनिश्चितता के कारण कई लोग अपनी ट्रैवल योजनाओं को टाल सकते हैं।

इंडियन एसोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर्स (Indian Association of Tour Operators), जिसके 2,000 से अधिक सदस्य हैं, के अध्यक्ष रवि गोसाईं (Ravi Gosain) ने इस स्थिति पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के लाखों फॉलोअर्स हैं और लोग उनकी सलाह को गंभीरता से लेते हैं, जिससे ट्रैवल डिमांड प्रभावित हो सकती है।

रवि गोसाईं ने यह भी बताया कि इस गर्मी के सीजन में ही पूछताछ और बुकिंग में पहले से 10 से 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि कई लोग अपनी विदेश यात्रा की योजना को आगे के लिए टाल सकते हैं, जिससे टूरिज्म सेक्टर पर और असर पड़ सकता है।

इंडस्ट्री विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती लागत, फ्लाइट टिकटों की कीमतें और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता पहले से ही यात्रा मांग को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में किसी भी तरह की अतिरिक्त अपील या संदेश का मनोवैज्ञानिक असर यात्रियों के फैसलों पर पड़ सकता है।

ट्रैवल कंपनियों का मानना है कि अगर यह रुझान जारी रहा, तो आउटबाउंड टूरिज्म सेक्टर को इस साल के सबसे महत्वपूर्ण सीजन में नुकसान उठाना पड़ सकता है। खासकर वे सेक्टर जो यूरोप और ऑस्ट्रेलिया जैसे लंबी दूरी के पर्यटन पर निर्भर हैं, उन्हें ज्यादा असर देखने को मिल सकता है।

हालांकि कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यह प्रभाव अस्थायी हो सकता है और यात्रा की मांग लंबे समय में स्थिर रह सकती है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय यात्रा भारतीय मध्यम वर्ग की जीवनशैली का हिस्सा बन चुकी है।

फिलहाल इंडस्ट्री सरकार और ट्रैवल एजेंसियों से इस स्थिति पर नजर बनाए रखने की उम्मीद कर रही है, ताकि पर्यटन क्षेत्र में किसी बड़े नुकसान से बचा जा सके।

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