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नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से जुड़े करोड़ों नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए पीएफ खाते से पैसा निकालने की प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण है। नौकरी बदलने, सेवानिवृत्ति, बेरोजगारी या किसी जरूरी आर्थिक आवश्यकता के समय कर्मचारी अपने भविष्य निधि खाते से नियमानुसार पैसा निकाल सकते हैं। ऐसे में पीएफ निकासी से जुड़े फॉर्म और प्रक्रिया में होने वाले बदलावों की जानकारी रखना जरूरी है।
पीएफ निकासी के लिए पहले अलग-अलग परिस्थितियों में विभिन्न फॉर्म का इस्तेमाल किया जाता था। इनमें फॉर्म 19, फॉर्म 10C और फॉर्म 31 प्रमुख हैं। हालांकि, ईपीएफओ ने ऑनलाइन क्लेम प्रक्रिया में कंपोजिट क्लेम फॉर्म और डिजिटल सुविधाओं के जरिए कई प्रक्रियाओं को सरल बनाया है।
कर्मचारियों के लिए यह समझना जरूरी है कि किस परिस्थिति में कौन-सा दावा किया जा सकता है और आवेदन करने से पहले किन जानकारियों का अपडेट होना आवश्यक है।अब फॉर्म 15G और 15H की जगह फॉर्म 121
पीएफ निकासी से जुड़ा नया बदलाव टैक्स कटौती यानी टीडीएस से संबंधित है। वित्त वर्ष 2026-27 से पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 15G और फॉर्म 15H की जगह नया फॉर्म 121 लागू किया गया है। इसका उद्देश्य पात्र व्यक्तियों के लिए टीडीएस न काटने संबंधी घोषणा की प्रक्रिया को एकीकृत करना है।पहले निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले कर्मचारी पीएफ निकासी पर टीडीएस से राहत पाने के लिए फॉर्म 15G या 15H जमा करते थे। अब ऐसे मामलों में नए फॉर्म 121 का इस्तेमाल किया जाना है।
हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि पीएफ निकासी के सभी पुराने फॉर्म बंद हो गए हैं। फॉर्म 19, 10C और 31 का संबंध पीएफ तथा पेंशन संबंधी दावों से है, जबकि फॉर्म 121 टैक्स घोषणा से संबंधित है।
किन कर्मचारियों को भरना होगा नया फॉर्म?
नया फॉर्म 121 उन पात्र कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है, जो पीएफ निकासी के दौरान टीडीएस नहीं काटे जाने की घोषणा करना चाहते हैं।
पीएफ खाते से पैसा निकालने पर हर स्थिति में टीडीएस नहीं काटा जाता। यह कर्मचारी की कुल सेवा अवधि, निकासी राशि और लागू आयकर नियमों पर निर्भर करता है।
यदि कर्मचारी की लगातार सेवा अवधि पांच वर्ष से कम है और निकासी पर लागू शर्तों के अनुसार टीडीएस बनता है, तो टैक्स कटौती का प्रश्न सामने आ सकता है। ऐसी स्थिति में पात्र कर्मचारी निर्धारित नियमों के अनुसार फॉर्म 121 का इस्तेमाल कर सकते हैं।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि फॉर्म जमा करने से हर कर्मचारी को अपने आप टैक्स छूट नहीं मिल जाती। इसके लिए आयकर कानून के तहत निर्धारित पात्रता पूरी करना आवश्यक है।
फॉर्म 19, 10C और 31 का क्या होगा?
ईपीएफओ की दावा प्रक्रिया में अलग-अलग प्रकार की निकासी के लिए अलग विकल्प उपलब्ध हैं।फॉर्म 19 का इस्तेमाल पात्रता पूरी होने पर पीएफ खाते के अंतिम निपटान के लिए किया जाता है। फॉर्म 10C कर्मचारी पेंशन योजना के तहत निकासी लाभ या योजना प्रमाणपत्र से संबंधित है। वहीं फॉर्म 31 का इस्तेमाल निर्धारित परिस्थितियों में पीएफ खाते से आंशिक अग्रिम राशि निकालने के लिए किया जाता है।ईपीएफओ ने इन प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए कंपोजिट क्लेम फॉर्म की सुविधा पहले ही शुरू की थी। इस व्यवस्था में कर्मचारियों को कई प्रकार के दावों के लिए एकीकृत आवेदन की सुविधा मिलती है।
ऑनलाइन पीएफ निकालने के लिए क्या जरूरी है?
पीएफ निकासी के लिए कर्मचारियों का यूनिवर्सल अकाउंट नंबर यानी यूएएन सक्रिय होना चाहिए। इसके अलावा आधार और बैंक खाते की जानकारी ईपीएफओ रिकॉर्ड में सही तरीके से दर्ज होना आवश्यक है।ऑनलाइन दावा करने से पहले कर्मचारी को अपनी व्यक्तिगत जानकारी, बैंक खाता विवरण और सेवा संबंधी रिकॉर्ड की जांच करनी चाहिए।
इसके बाद ईपीएफओ के सदस्य पोर्टल पर लॉगिन करके उपलब्ध दावा विकल्पों में से अपनी पात्रता के अनुसार विकल्प चुना जा सकता है। आवेदन के दौरान आवश्यक जानकारी भरने और प्रमाणीकरण की प्रक्रिया पूरी करनी होती है।कर्मचारी आवेदन जमा करने के बाद अपने दावे की स्थिति भी ऑनलाइन देख सकते हैं।
गलत फॉर्म भरने से हो सकती है परेशानी
पीएफ निकासी के दौरान गलत दावा विकल्प चुनने या आवश्यक जानकारी अधूरी होने से आवेदन में देरी हो सकती है।कर्मचारियों को यह समझना चाहिए कि पीएफ की अंतिम निकासी, आंशिक निकासी, पेंशन लाभ और टीडीएस से संबंधित घोषणा अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं।
इसलिए आवेदन करने से पहले संबंधित नियमों और पात्रता की जानकारी लेना जरूरी है। खासकर फॉर्म 121 से जुड़े नए बदलाव को समझना उन कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है, जो पीएफ निकासी के दौरान टीडीएस से राहत पाने के पात्र हैं।
कर्मचारियों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
ईपीएफओ से जुड़े कर्मचारियों को पीएफ निकालने से पहले अपने यूएएन, आधार, पैन और बैंक खाते की जानकारी जांच लेनी चाहिए। यदि किसी विवरण में गलती है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ठीक कराना चाहिए।साथ ही यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि जिस प्रकार की निकासी के लिए आवेदन किया जा रहा है, उसकी पात्रता पूरी हो रही हो।
नए फॉर्म 121 को लेकर कर्मचारियों को आधिकारिक निर्देशों और पोर्टल पर उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी लेते रहना चाहिए। फॉर्म की ऑनलाइन उपलब्धता और उसे जमा करने की प्रक्रिया के लिए आधिकारिक सूचना देखना उचित रहेगा।
कुल मिलाकर, पीएफ निकासी में फॉर्म 121 से जुड़ा बदलाव मुख्य रूप से टीडीएस घोषणा की व्यवस्था से संबंधित है। कर्मचारियों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे पुराने फॉर्म 15G और 15H तथा नए फॉर्म 121 के अंतर को समझें और अपनी पात्रता के अनुसार सही प्रक्रिया अपनाएं।
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