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100 लाख करोड़ का होगा पेंशन कोष PFRDA अध्यक्ष ने बताया भविष्य का प्लान
Ratna Netam
4 Nov 2026 5:18 PM IST

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नई दिल्ली। भारत में सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने और पेंशन व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में पेंशन निधि विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने बड़ा लक्ष्य सामने रखा है। प्राधिकरण के अध्यक्ष एस. रमन के अनुसार, देश में पेंशन कोष को वर्ष 2040 से पहले 100 लाख करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। यह महत्वाकांक्षी लक्ष्य भारत में बढ़ती पेंशन जरूरतों, दीर्घकालिक बचत और वृद्धावस्था में आर्थिक आत्मनिर्भरता को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।पेंशन क्षेत्र के विस्तार के लिए पीएफआरडीए का ध्यान राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) और अटल पेंशन योजना (APY) जैसी योजनाओं की पहुंच बढ़ाने पर है। प्राधिकरण विशेष रूप से निजी क्षेत्र के कर्मचारियों, स्वरोजगार करने वालों और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को पेंशन व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में काम कर रहा है। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को नियमित बचत के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
पेंशन कोष बढ़ाने के लिए व्यापक रणनीति
पीएफआरडीए अध्यक्ष एस. रमन ने हाल में पेंशन व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कई प्राथमिकताओं का उल्लेख किया है। इनमें औपचारिक रोजगार से बाहर काम करने वाले लोगों तक पेंशन योजनाओं का विस्तार, सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली आय में सुधार और दीर्घकालिक बचत को बढ़ावा देना शामिल है।अक्टूबर 2026 में आयोजित एक वित्तीय क्षेत्र सम्मेलन के दौरान रमन ने अटल पेंशन योजना को मजबूत करने और कॉर्पोरेट कंपनियों की वेतन प्रणाली के साथ एनपीएस को जोड़ने की संभावनाओं पर भी चर्चा की थी। इससे निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को पेंशन योजनाओं से जोड़ना आसान हो सकता है।पेंशन कोष में वृद्धि के लिए केवल निवेश पर मिलने वाला लाभ पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए नए अंशधारकों को जोड़ना, मौजूदा सदस्यों के नियमित योगदान को प्रोत्साहित करना और निवेश के बेहतर विकल्प उपलब्ध कराना भी जरूरी माना जा रहा है।
देश में लगातार बढ़ रहा पेंशन बाजार
भारत में पेंशन योजनाओं के अंतर्गत जमा राशि पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। केंद्र सरकार की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के अंतर्गत प्रबंधित संपत्ति लगभग 15.95 लाख करोड़ रुपये थी। वहीं, अटल पेंशन योजना के अंतर्गत करीब 51,400 करोड़ रुपये की संपत्ति जमा थी।इसी अवधि तक एनपीएस के 2.17 करोड़ से अधिक अंशधारक थे, जबकि अटल पेंशन योजना में कुल नामांकन लगभग 8.96 करोड़ तक पहुंच चुका था। ये आंकड़े देश में सेवानिवृत्ति के लिए बचत करने की बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाते हैं।अक्टूबर 2026 की एक रिपोर्ट के अनुसार, एनपीएस के अंतर्गत प्रबंधित संपत्ति बढ़कर लगभग 17.6 लाख करोड़ रुपये और अटल पेंशन योजना की संपत्ति करीब 58 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी थी। हालांकि, 100 लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य हासिल करने के लिए आने वाले वर्षों में निवेश और अंशधारकों की संख्या में लगातार वृद्धि की आवश्यकता होगी।
निजी और असंगठित क्षेत्र पर विशेष ध्यान
भारत की बड़ी आबादी निजी कंपनियों, छोटे व्यवसायों, कृषि, निर्माण और असंगठित क्षेत्रों में काम करती है। इनमें से अनेक लोगों के पास नियमित पेंशन की व्यवस्था नहीं है। ऐसे कर्मचारियों को भविष्य के लिए बचत करने का अवसर उपलब्ध कराना पेंशन क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियों में शामिल है।पीएफआरडीए की रणनीति में इन वर्गों की भागीदारी बढ़ाना महत्वपूर्ण है। इसके लिए सरल डिजिटल पंजीकरण, सुविधाजनक योगदान व्यवस्था और अलग-अलग आय वर्गों की जरूरतों के अनुरूप पेंशन उत्पाद विकसित किए जा सकते हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि कम आय वाले लोगों के लिए छोटी-छोटी नियमित बचत भी लंबे समय में महत्वपूर्ण पेंशन कोष तैयार कर सकती है। हालांकि, इसके लिए वित्तीय जागरूकता, निवेश में निरंतरता और योजनाओं के प्रति भरोसा बनाए रखना जरूरी होगा।
बुजुर्ग आबादी बढ़ने से पेंशन की जरूरत
भारत की जनसंख्या संरचना में आने वाले दशकों में महत्वपूर्ण बदलाव होने की संभावना है। देश में बुजुर्गों की संख्या बढ़ने के साथ स्वास्थ्य सुविधाओं, दैनिक जीवन के खर्च और सेवानिवृत्ति के बाद नियमित आय की जरूरत भी बढ़ेगी।ऐसी स्थिति में मजबूत पेंशन प्रणाली सामाजिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार बन सकती है। यदि कामकाजी उम्र में ही लोग व्यवस्थित रूप से बचत शुरू करते हैं, तो भविष्य में उनकी आर्थिक निर्भरता कम हो सकती है।पीएफआरडीए का मानना है कि पेंशन योजनाओं की पहुंच बढ़ाने से लोगों की व्यक्तिगत आर्थिक सुरक्षा मजबूत होने के साथ देश में दीर्घकालिक घरेलू बचत को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
बुनियादी ढांचे के विकास में भी मदद
पेंशन कोष का महत्व केवल सेवानिवृत्ति के बाद आय उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। पेंशन फंड दीर्घकालिक निवेश का बड़ा स्रोत भी होते हैं। इनसे जुटाई गई राशि को निर्धारित नियमों और जोखिम प्रबंधन के अंतर्गत विभिन्न निवेश साधनों में लगाया जाता है।पीएफआरडीए अध्यक्ष ने देश की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए पेंशन कोष की संभावनाओं पर भी जोर दिया है। लंबे समय के निवेश से सड़क, परिवहन, ऊर्जा और अन्य आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए पूंजी उपलब्ध हो सकती है।हालांकि, ऐसे निवेशों में अंशधारकों के हितों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहती है। इसलिए निवेश से जुड़े जोखिम, संभावित प्रतिफल और नियामकीय शर्तों को ध्यान में रखना आवश्यक है।
नए पेंशन उत्पादों पर भी काम
पीएफआरडीए पेंशन योजनाओं को अधिक लचीला और जरूरतों के अनुरूप बनाने की दिशा में भी प्रयास कर रहा है। अलग-अलग आयु वर्गों और पेशों से जुड़े लोगों की वित्तीय जरूरतें अलग होती हैं। इसलिए निवेश तथा सेवानिवृत्ति के बाद राशि प्राप्त करने के अधिक विकल्प उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।इन सुधारों से पेंशन योजनाओं के प्रति लोगों की रुचि बढ़ सकती है। हालांकि, एनपीएस जैसे बाजार से जुड़े निवेशों में मिलने वाला प्रतिफल बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करता है और सभी योजनाओं में निश्चित लाभ की गारंटी नहीं होती।
2040 से पहले लक्ष्य हासिल करना बड़ी चुनौती
पेंशन कोष को 100 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाना महत्वाकांक्षी लक्ष्य है। इसके लिए देश में पेंशन कवरेज का व्यापक विस्तार, नियमित योगदान और दीर्घकालिक निवेश में निरंतर वृद्धि जरूरी होगी।पेंशन क्षेत्र में डिजिटल सुविधाओं का विस्तार, वित्तीय साक्षरता और निजी कंपनियों की भागीदारी इस लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।आने वाले वर्षों में पीएफआरडीए के सामने दोहरी जिम्मेदारी होगी। एक ओर पेंशन कोष का आकार बढ़ाना होगा, वहीं दूसरी ओर यह सुनिश्चित करना होगा कि सेवानिवृत्ति के बाद लोगों को पर्याप्त और टिकाऊ आय उपलब्ध हो सके।
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