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MCL IPO का रास्ता साफ 10% हिस्सेदारी बेचेगी कोल इंडिया

Ratna Netam
2 Sept 2026 8:39 PM IST
MCL IPO का रास्ता साफ 10% हिस्सेदारी बेचेगी कोल इंडिया
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नई दिल्ली। सरकारी कोयला कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड की एक और बड़ी सब्सिडियरी शेयर बाजार में उतरने की तैयारी कर रही है। कोल इंडिया की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी **महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (MCL)** ने अपने प्रस्तावित इनिशियल पब्लिक ऑफर यानी IPO के लिए बाजार नियामक सेबी के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल कर दिया है। प्रस्तावित IPO में कोल इंडिया अपनी करीब **10 प्रतिशत हिस्सेदारी** बेचने की तैयारी में है।
इस IPO की खास बात यह है कि इसमें कोई नए शेयर जारी नहीं किए जाएंगे। पूरा इश्यू **ऑफर फॉर सेल (OFS)** होगा। इसके तहत प्रमोटर कोल इंडिया अधिकतम **66,18,36,300 इक्विटी शेयर** बेच सकती है। प्रत्येक शेयर की फेस वैल्यू 2 रुपये है। इसलिए IPO से जुटाई जाने वाली रकम महानदी कोलफील्ड्स को नहीं मिलेगी बल्कि शेयर बेचने वाली कोल इंडिया को प्राप्त होगी।
SEBI के पास दाखिल हुआ DRHP
कोल इंडिया ने 2 सितंबर 2026 को स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में बताया कि महानदी कोलफील्ड्स का 1 सितंबर की तारीख वाला DRHP सेबी, BSE और NSE के पास दाखिल किया गया है।
कंपनी ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित IPO अभी जरूरी नियामकीय मंजूरियों, बाजार की परिस्थितियों और अन्य संबंधित कारकों के अधीन है। यानी फिलहाल IPO की निश्चित तारीख या प्राइस बैंड घोषित नहीं किया गया है।
DRHP दाखिल होना IPO प्रक्रिया में महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। इसके बाद नियामकीय प्रक्रिया पूरी होगी और उचित समय पर कंपनी इश्यू की तारीख, प्राइस बैंड और लॉट साइज जैसी जानकारी सार्वजनिक करेगी।
कोल इंडिया बेचेगी 66.18 करोड़ शेयर
प्रस्तावित IPO में कोल इंडिया अधिकतम 661,836,300 शेयर यानी करीब **66.18 करोड़ शेयर** ऑफर करेगी। यह महानदी कोलफील्ड्स की लगभग 10 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर है।
अभी MCL कोल इंडिया की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। IPO के बाद सार्वजनिक निवेशकों की भी इसमें हिस्सेदारी हो जाएगी।
हालांकि यहां निवेशकों के लिए OFS और Fresh Issue का अंतर समझना महत्वपूर्ण है। Fresh Issue में कंपनी नए शेयर जारी करके रकम जुटाती है और उस रकम का इस्तेमाल कारोबार विस्तार, कर्ज भुगतान या दूसरी जरूरतों के लिए कर सकती है।
लेकिन OFS में मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा बेचता है। महानदी कोलफील्ड्स के मामले में शेयर बेचने वाली कंपनी कोल इंडिया है, इसलिए IPO से प्राप्त रकम MCL के बजाय कोल इंडिया के पास जाएगी।
रिटेल निवेशकों के लिए कितना हिस्सा?
महानदी कोलफील्ड्स का IPO **बुक-बिल्डिंग प्रक्रिया** के जरिए लाया जाएगा।
DRHP के मुताबिक नेट ऑफर में अधिकतम 50 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स यानी QIB के लिए उपलब्ध होगा। नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स के लिए अधिकतम 15 प्रतिशत और रिटेल इंडिविजुअल इन्वेस्टर्स के लिए अधिकतम 35 प्रतिशत हिस्सा उपलब्ध होगा।
IPO सफल होने के बाद महानदी कोलफील्ड्स के शेयरों को **BSE और NSE** दोनों पर सूचीबद्ध करने का प्रस्ताव है।
कौन संभालेगा IPO?
इतने बड़े सार्वजनिक इश्यू को संभालने के लिए कई प्रमुख इन्वेस्टमेंट बैंक और वित्तीय संस्थानों को जिम्मेदारी दी गई है।
SBI Capital Markets, Axis Capital, BOB Capital Markets, IDBI Capital Markets & Securities और IIFL Capital Services** को इस IPO के लिए बुक रनिंग लीड मैनेजर नियुक्त किया गया है।
वहीं **KFin Technologies** इश्यू की रजिस्ट्रार होगी।
कितनी बड़ी कंपनी है महानदी कोलफील्ड्स?
महानदी कोलफील्ड्स कोल इंडिया की सबसे महत्वपूर्ण सहायक कंपनियों में से एक है। इसकी स्थापना **3 अप्रैल 1992** को हुई थी। इसे साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स से अलग करके बनाया गया था ताकि ओडिशा के तालचेर और आईबी वैली कोलफील्ड्स से कोयला उत्पादन बढ़ाया जा सके।
कंपनी मुख्य रूप से नॉन-कोकिंग कोयले का उत्पादन करती है। इसके ग्राहकों में बिजली कंपनियां, कैप्टिव पावर प्लांट, इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर और सीमेंट तथा स्पंज आयरन जैसे उद्योग शामिल हैं।
दिसंबर 2019 में MCL को **मिनीरत्न कैटेगरी-I** का दर्जा दिया गया था।
FY26 में 218.31 मिलियन टन कोयला उत्पादन
महानदी कोलफील्ड्स के ऑपरेशनल आंकड़े इसके आकार को दिखाते हैं।
वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी ने **218.31 मिलियन टन कोयले का उत्पादन** किया। CRISIL रिपोर्ट के अनुसार यह भारत के कुल नॉन-कोकिंग कोयला उत्पादन का करीब **22.40 प्रतिशत** था।
इसी दौरान MCL ने कोल इंडिया के कुल उत्पादन में लगभग **28.3 प्रतिशत** योगदान दिया।
FY2024 में कंपनी का कोयला उत्पादन 206.10 मिलियन टन था, जो FY2026 में बढ़कर 218.31 मिलियन टन हो गया। इस अवधि में उत्पादन करीब 5.92 प्रतिशत बढ़ा।
कंपनी के पास 17 खदानें
30 जून 2026 तक महानदी कोलफील्ड्स **17 खदानों** का संचालन कर रही थी। इनमें 14 ओपनकास्ट और तीन अंडरग्राउंड माइंस शामिल थीं।
कंपनी के उत्पादन का 99 प्रतिशत से अधिक हिस्सा ओपनकास्ट खदानों से आता रहा है।
MCL ने माइनिंग में बड़े पैमाने पर मशीनों का भी इस्तेमाल किया है। जून 2026 तक कंपनी के पास खुद के और कॉन्ट्रैक्ट पर लिए गए करीब 70 सरफेस माइनर थे।
मार्च 2026 तक कंपनी के अपने 22 सरफेस माइनर थे, जो कोल इंडिया की सहायक कंपनियों में सबसे बड़ा बेड़ा था।
करीब 45 साल तक उत्पादन के लिए रिजर्व
महानदी कोलफील्ड्स की सबसे बड़ी ताकत इसके विशाल कोयला संसाधन हैं।
1 अप्रैल 2026 तक ओडिशा के **तालचेर और आईबी वैली कोलफील्ड्स** में अनुमानित कुल कोयला संसाधन करीब **106.76 अरब टन** था।
वहीं कंपनी के ऑडिटेड कोयला भंडार करीब **9,840.31 मिलियन टन** थे। मौजूदा FY2026 उत्पादन स्तर को आधार माना जाए तो ये रिजर्व करीब **45 वर्षों** तक उत्पादन बनाए रखने के लिए पर्याप्त हो सकते हैं।
DRHP में उद्धृत रिपोर्ट के अनुसार अगर भविष्य में अतिरिक्त संसाधनों को रिजर्व में बदला जाता है और उत्पादन का स्तर लगभग समान रहता है तो कंपनी की परिचालन अवधि और काफी लंबी हो सकती है।
जून तिमाही में बढ़ा रेवेन्यू
कंपनी का हालिया वित्तीय प्रदर्शन भी मजबूत रहा है, हालांकि मुनाफे में मामूली गिरावट दर्ज की गई।
जून 2026 तिमाही में MCL का ऑपरेशंस से रेवेन्यू बढ़कर करीब **8,033.7 करोड़ रुपये** हो गया। पिछले साल की समान तिमाही में यह करीब 7,548.3 करोड़ रुपये था।
इस तरह सालाना आधार पर कंपनी के राजस्व में करीब 6.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
वहीं जून 2026 तिमाही में नेट प्रॉफिट करीब **2,398.7 करोड़ रुपये** रहा, जबकि जून 2025 तिमाही में यह लगभग 2,448.3 करोड़ रुपये था।
पूरे FY2026 में कंपनी का मुनाफा करीब 10,698.1 करोड़ रुपये और ऑपरेशनल रेवेन्यू करीब 30,549.6 करोड़ रुपये रहा।
कोल इंडिया के शेयरों में दिखा असर
MCL के IPO की खबर का असर बुधवार को कोल इंडिया के शेयरों पर भी दिखाई दिया। कारोबार के दौरान Coal India का शेयर BSE पर करीब **4.93 प्रतिशत चढ़कर 422.35 रुपये** तक पहुंच गया था।
NSE पर बुधवार को कोल इंडिया का शेयर 3.66 प्रतिशत की तेजी के साथ करीब **416.30 रुपये पर बंद** हुआ।
बाजार की इस प्रतिक्रिया से संकेत मिला कि निवेशक कोल इंडिया की सहायक कंपनियों में हिस्सेदारी बेचकर वैल्यू अनलॉक करने की रणनीति पर नजर बनाए हुए हैं।
पहले भी शेयर बाजार में उतरी हैं सब्सिडियरी
MCL को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराने की तैयारी कोल इंडिया की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
इससे पहले 2026 में **भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL)** और **सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट (CMPDI)** भी IPO के जरिए बाजार में उतर चुकी हैं। दोनों IPO भी पूरी तरह OFS थे।
अगर MCL का IPO पूरा होकर इसकी लिस्टिंग होती है तो यह कोल इंडिया की शेयर बाजार में कारोबार करने वाली एक और प्रमुख सहायक कंपनी बन जाएगी।
इसके अलावा कोल इंडिया की **साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL)** को भी बाजार में सूचीबद्ध कराने की योजना पर काम चल रहा है। कंपनी प्रबंधन पहले संकेत दे चुका है कि MCL और SECL की लिस्टिंग चालू वित्त वर्ष के दौरान पूरी करने का लक्ष्य है, हालांकि अंतिम समय बाजार परिस्थितियों और सरकारी मंजूरियों पर निर्भर करेगा।
IPO का प्राइस बैंड अभी घोषित नहीं
निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि फिलहाल महानदी कोलफील्ड्स IPO का **प्राइस बैंड, लॉट साइज, ओपनिंग डेट और क्लोजिंग डेट घोषित नहीं हुई है।**
DRHP दाखिल होने के बाद नियामकीय प्रक्रिया पूरी होगी। इसके बाद कंपनी और बुक रनिंग लीड मैनेजर बाजार की परिस्थितियों को देखते हुए IPO की अंतिम शर्तें तय करेंगे।
कुछ मीडिया रिपोर्टों में प्रस्तावित IPO का आकार करीब 10,000 करोड़ रुपये होने का अनुमान लगाया गया है, लेकिन यह आधिकारिक अंतिम आकार नहीं है। वास्तविक इश्यू साइज शेयरों के अंतिम ऑफर प्राइस पर निर्भर करेगा।
महानदी कोलफील्ड्स का IPO इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कंपनी देश की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनियों में शामिल है, उसके पास विशाल कोयला भंडार है और बिजली क्षेत्र में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। दूसरी ओर यह पूरा IPO OFS है, इसलिए इससे जुटाई जाने वाली पूंजी सीधे MCL के कारोबार में नहीं जाएगी।
निवेशकों के लिए अगला बड़ा अपडेट सेबी की प्रक्रिया पूरी होने और **प्राइस बैंड तथा IPO तारीखों की घोषणा** का होगा। तभी यह स्पष्ट होगा कि कोल इंडिया अपनी 10 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचकर वास्तव में कितनी रकम जुटाने जा रही है।
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