
New Delhi नई दिल्ली : OYO की मूल कंपनी प्रिज्म (PRISM) से जुड़ी एक नई फाइलिंग में कंपनी के वैश्विक विस्तार और वित्तीय ढांचे को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। पहले भारत में एक बजट होटल एग्रीगेटर के रूप में शुरू हुई यह कंपनी अब बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत कर चुकी है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, कंपनी के कुल राजस्व का लगभग 84 प्रतिशत हिस्सा अब विदेशी परिचालनों से आ रहा है।
कंपनी की यह वृद्धि हाल के वर्षों में किए गए व्यापक वैश्विक विस्तार का परिणाम बताई जा रही है। विभिन्न देशों में होटल नेटवर्क, हॉस्पिटैलिटी सेवाओं और डिजिटल प्लेटफॉर्म के विस्तार के चलते प्रिज्म का कारोबार तेजी से बढ़ा है। यह जानकारी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास दाखिल अद्यतन ड्राफ्ट पेपर्स में सामने आई है।
PRISM ने अपने नए पब्लिक इश्यू के माध्यम से 6,650 करोड़ रुपये तक जुटाने की योजना बनाई है। इसके साथ ही कंपनी 1,330 करोड़ रुपये तक का संभावित प्री-IPO प्लेसमेंट भी कर सकती है, जिसे अंतिम इश्यू साइज के खिलाफ समायोजित किया जाएगा। इस फंडरेजिंग का उद्देश्य कंपनी के विस्तार, कर्ज प्रबंधन और संचालन क्षमता को मजबूत करना बताया जा रहा है।
फाइलिंग के अनुसार, कंपनी का कारोबार अब केवल होटल बुकिंग तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों और हॉस्पिटैलिटी प्रारूपों में तेजी से विविध हो गया है। इसमें होटल्स के अलावा होमस्टे और अन्य लिस्टिंग सेवाएं भी शामिल हैं, जो कंपनी के डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से संचालित होती हैं।
कंपनी के परिचालन पैमाने को समझने के लिए सकल बुकिंग मूल्य (Gross Booking Value - GBV) को एक प्रमुख संकेतक माना जाता है। यह उन सभी बुकिंग्स का कुल मूल्य दर्शाता है, जो PRISM के प्लेटफॉर्म पर होटल्स, होम्स और अन्य लिस्टिंग के माध्यम से की जाती हैं। इससे कंपनी के व्यवसाय के विस्तार और बाजार पकड़ का आकलन किया जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी का बढ़ता वैश्विक राजस्व यह संकेत देता है कि भारतीय स्टार्टअप अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मजबूत उपस्थिति बना रहे हैं। OYO की मूल कंपनी के रूप में प्रिज्म ने कई देशों में अपनी सेवाओं का विस्तार किया है, जिससे उसके राजस्व का बड़ा हिस्सा अब भारत के बाहर से आ रहा है।
हालांकि, वैश्विक विस्तार के साथ-साथ कंपनी के सामने प्रतिस्पर्धा और संचालन से जुड़ी चुनौतियां भी बनी हुई हैं। विभिन्न देशों में अलग-अलग नियम, बाजार की स्थिति और उपभोक्ता व्यवहार को देखते हुए कंपनी को अपनी रणनीति लगातार बदलनी पड़ रही है।
SEBI में दाखिल दस्तावेजों से यह भी संकेत मिलता है कि कंपनी आने वाले समय में अपने IPO के जरिए पूंजी बाजार में बड़ी एंट्री की तैयारी कर रही है। इससे न केवल कंपनी को वित्तीय मजबूती मिलेगी, बल्कि इसके वैश्विक विस्तार योजनाओं को भी गति मिलेगी।
कुल मिलाकर, प्रिज्म की यह फाइलिंग दर्शाती है कि भारत से शुरू हुई यह कंपनी अब एक वैश्विक हॉस्पिटैलिटी ब्रांड के रूप में उभर रही है, जिसका बड़ा हिस्सा अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर निर्भर है।





