
व्यापार | भारत सरकार ने डिजिटल विज्ञापनों पर लगाए जाने वाले 6% बराबरी शुल्क (Equalization Levy) को खत्म करने का फैसला लिया है। यह फैसला खासतौर पर उन ऑनलाइन विज्ञापन सेवाओं पर लागू होगा, जो विदेशी डिजिटल कंपनियों से ली जाती थीं। इस कदम से न केवल विज्ञापनदाताओं को आर्थिक राहत मिलेगी, बल्कि डिजिटल क्षेत्र में निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा।
क्या है बराबरी शुल्क?
बराबरी शुल्क 2016 में लागू किया गया था, जिसका उद्देश्य उन विदेशी डिजिटल कंपनियों से कर वसूलना था, जो भारत में विज्ञापन सेवाएं देती थीं लेकिन यहां की टैक्स व्यवस्था में नहीं आती थीं। इसका सीधा असर गूगल, फेसबुक, अमेज़न जैसी कंपनियों के विज्ञापन मॉडल पर पड़ता था।
छूट से क्या होंगे फायदे?
विज्ञापनदाता होंगे लाभान्वित – भारतीय कंपनियों और स्टार्टअप्स को डिजिटल विज्ञापन पर अतिरिक्त टैक्स नहीं देना पड़ेगा, जिससे उनकी लागत कम होगी।
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विदेशी निवेश को बढ़ावा – इस कदम से वैश्विक टेक कंपनियों के लिए भारत और आकर्षक बाजार बन जाएगा।
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डिजिटल इकोनॉमी को मिलेगा बूस्ट – डिजिटल मार्केटिंग और ऑनलाइन बिजनेस में वृद्धि होगी, जिससे नए स्टार्टअप को भी फायदा होगा।
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उपभोक्ताओं को अप्रत्यक्ष लाभ – कम लागत के कारण कंपनियां विज्ञापन बजट बढ़ा सकेंगी, जिससे उपभोक्ताओं तक ज्यादा और सस्ती डिजिटल सेवाएं पहुंच सकेंगी।
सरकार की रणनीति
भारत सरकार का यह निर्णय अंतरराष्ट्रीय कर संधियों और डिजिटल अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। इससे भारतीय कंपनियों और वैश्विक डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बीच व्यापार को अधिक सुगम बनाने में मदद मिलेगी।
यह फैसला भारत के डिजिटल भविष्य की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिससे ऑनलाइन विज्ञापन बाजार को मजबूती मिलेगी और डिजिटल कारोबार को नई रफ्तार मिलेगी





