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दिसंबर में तिलहन का निर्यात 67 प्रतिशत गिरकर 1.7 लाख टन

Neha Dani
18 Jan 2022 3:11 AM GMT
दिसंबर में तिलहन का निर्यात 67 प्रतिशत गिरकर 1.7 लाख टन
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निर्यात 29 प्रतिशत बढ़कर 4,22,624 टन हो गया जो पहले 3,28,680 टन था।

तेल उद्योग के प्रमुख संगठन एसईए ने सोमवार को कहा कि वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों के गैर-प्रतिस्पर्धी होने के कारण दिसंबर में तिलहन का निर्यात 67 प्रतिशत गिरकर 1.7 लाख टन रह गया। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) ने एक बयान में कहा कि दिसंबर 2021 में 1,70,338 टन तिलहन का निर्यात किया गया, जबकि एक साल पहले की समान अवधि में यह निर्यात 5,16,006 टन रहा था। निर्यात में गिरावट मुख्य रूप से सोयाबीन और रेपसीड खली के निर्यात में कमी आने से आई है।

अप्रैल-दिसंबर 2021 के दौरान, तेल खली का कुल निर्यात पिछले वर्ष की समान अवधि के 24,67,564 टन की तुलना में इस बार 28 प्रतिशत घटकर 17,66,687 टन रह गया।एसोसिएशन ने बताया कि भारत में खली की कीमतों पर दबाव होने के कारण सोयाबीन खली का मार्जिन कम हुआ है। यह बाकी देशों से कहीं महंगा है क्योंकि सोयाबीन के किसान सोयाबीन दाना के लिए बेहतर कीमत वसूलने की अपेक्षा कर रहे हैं जो भारत में फिलहाल करीब 6,300 रुपये क्विन्टल है।
एसोसिएशन ने कहा कि मौजूदा समय में सोयाबीन खली का भाव निर्यात के लिहाज से महंगा है। सोयाबीन खली की एक्स-कांडला कीमत 750 डॉलर प्रति टन है जबकि ब्राजील के खली की कीमत 535 डॉलर और अर्जेंटीना के 525 डॉलर प्रति टन है। एसईए ने कहा, ''घरेलू सोयाबीन दाना की ऊंची कीमत के कारण भारत के अगले दो से तीन महीनों में निर्यात के लिए प्रतिस्पर्धी होने की संभावना नहीं है।''
सोयाबीन की कम पेराई के कारण कच्चे सोयाबीन तेल का आयात भी अधिक हुआ है। एसईए ने कहा कि रेपसीड के मामले में, पेराई के लिए बीज उपलब्ध नहीं होने से पिछले दो महीनों में रेपसीड खली का निर्यात प्रभावित हुआ है। नई रेपसीड फसल फरवरी के अंत या मार्च की शुरुआत में पेराई के लिए उपलब्ध होगी।
अप्रैल-दिसंबर 2021 के दौरान दक्षिण कोरिया को तेल खली का निर्यात 32 प्रतिशत घटकर 4,65,699 टन रह गया, जो एक साल पहले की अवधि में 6,80,791 टन था। हालांकि, वियतनाम को निर्यात 29 प्रतिशत बढ़कर 4,22,624 टन हो गया जो पहले 3,28,680 टन था।

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