
नई दिल्ली। वैश्विक तेल बाजार में मंगलवार को कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली। पिछले कारोबारी सत्र में भारी गिरावट के बाद निवेशकों ने दोबारा खरीदारी शुरू की। बाजार की नजरें अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव और इसके वैश्विक क्रूड सप्लाई पर संभावित असर पर टिकी हुई हैं।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण तेल बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत की संभावनाएं बनी हुई हैं, लेकिन क्षेत्र के अहम शिपिंग रूट में संभावित बाधाओं को लेकर निवेशक सतर्क हैं। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को लेकर चिंता बनी हुई है, क्योंकि यहां किसी भी तरह की रुकावट वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है।
सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई थी। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड लगभग 7 प्रतिशत गिरकर तीन सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि मंगलवार को बाजार ने कुछ सुधार दर्ज किया और ब्रेंट क्रूड की कीमत में करीब 1.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसके साथ ही कीमतें 85 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं।
इसी तरह अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड में भी तेजी देखने को मिली। पिछले सत्र में WTI क्रूड में 5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई थी, लेकिन मंगलवार को इसमें लगभग 1.16 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और कीमतें 81 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गईं।
बाजार में यह तेजी ऐसे समय आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को लेकर निवेशकों की चिंता बनी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा था कि ईरान के खिलाफ आगे की सैन्य कार्रवाई में देरी की जाएगी, क्योंकि कूटनीतिक बातचीत के रास्ते अभी खुले हुए हैं।
ट्रंप के इस बयान के बाद बाजार में कुछ राहत देखने को मिली थी, लेकिन निवेशक अभी भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। उनका मानना है कि यदि बातचीत सफल नहीं होती और तनाव बढ़ता है, तो तेल आपूर्ति पर असर पड़ सकता है, जिससे कीमतों में फिर से उछाल आ सकता है।
तेल बाजार में भू-राजनीतिक घटनाओं का प्रभाव लंबे समय से देखा जाता रहा है। मध्य पूर्व दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक क्षेत्रों में से एक है और यहां किसी भी तरह की अस्थिरता वैश्विक बाजारों को प्रभावित कर सकती है।
विश्लेषकों के अनुसार, मौजूदा समय में तेल कीमतों को कई कारक प्रभावित कर रहे हैं। एक ओर जहां अमेरिका-ईरान तनाव और आपूर्ति बाधित होने की आशंका कीमतों को समर्थन दे रही है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक मांग, आर्थिक विकास की रफ्तार और प्रमुख देशों की ऊर्जा नीतियां भी बाजार की दिशा तय कर रही हैं।
सोमवार की गिरावट के बाद मंगलवार की तेजी को बाजार विशेषज्ञ तकनीकी सुधार के रूप में भी देख रहे हैं। उनका कहना है कि पिछले सत्र में कीमतों में तेज गिरावट के बाद निवेशकों ने निचले स्तर पर खरीदारी की, जिससे कच्चे तेल की कीमतों को सहारा मिला।
हालांकि, बाजार में अनिश्चितता अभी खत्म नहीं हुई है। निवेशक अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली आगे की बातचीत, मध्य पूर्व की स्थिति और प्रमुख तेल उत्पादक देशों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखेंगे।
तेल की कीमतों में बदलाव का असर दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ता है। कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से ईंधन महंगा हो सकता है, जिसका असर परिवहन लागत, महंगाई और उपभोक्ता खर्च पर पड़ सकता है। वहीं कीमतों में गिरावट से आयात करने वाले देशों को राहत मिलती है।
भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें महत्वपूर्ण होती हैं। घरेलू ईंधन कीमतों और अर्थव्यवस्था पर इसका सीधा या अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है।
फिलहाल वैश्विक तेल बाजार में निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं। अमेरिका-ईरान संबंधों में आगे क्या बदलाव आता है और मध्य पूर्व की स्थिति किस दिशा में जाती है, यह आने वाले दिनों में तेल कीमतों की चाल के लिए सबसे बड़ा कारक साबित हो सकता है।
मंगलवार की तेजी ने बाजार को कुछ राहत जरूर दी है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि भू-राजनीतिक जोखिम बने रहने तक तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।





