
Business बिजनेस: सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई, जिसमें तेल लगभग 6% गिरकर पिछले दो हफ्तों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। यह गिरावट अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की बढ़ती उम्मीदों के बीच देखी गई, हालांकि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दोनों देशों के बीच अब भी कुछ अहम मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं।
ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0343 GMT तक 5.85 डॉलर यानी 5.7% गिरकर 97.69 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 5.75 डॉलर यानी 6% गिरकर 90.85 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। दोनों बेंचमार्क शुरुआती कारोबार में 7 मई के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे।
तेल की कीमतों में यह गिरावट ऐसे समय आई है जब वैश्विक बाजार पहले से ही भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और सप्लाई को लेकर चिंताओं से जूझ रहा है। निवेशकों की नजर अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत पर टिकी हुई है, क्योंकि किसी भी सकारात्मक समझौते से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में स्थिरता आने की उम्मीद है।
इस बीच, शनिवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वॉशिंगटन और ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर “काफी हद तक बातचीत” हो चुकी है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि समझौता होने पर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जा सकता है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल और तरल प्राकृतिक गैस (LNG) का परिवहन होता है। ऐसे में इस मार्ग को लेकर किसी भी तरह की अनिश्चितता या तनाव सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार को प्रभावित करता है।
हालिया गिरावट को बाजार में अस्थायी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि जब तक अमेरिका और ईरान के बीच कोई अंतिम समझौता नहीं होता, तब तक तेल बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।





