Oil market में भूचाल, अमेरिका-ईरान तनाव से कीमतों में भारी उछाल

New Delhi नई दिल्ली : वैश्विक बाजार में बुधवार को कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ गया है। इस घटनाक्रम के बाद कच्चे तेल के प्रमुख बेंचमार्क में 6 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई।अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत में 6.52 प्रतिशत यानी करीब 4.69 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी हुई। इसके साथ ही ब्रेंट क्रूड का भाव लगभग 80 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। वहीं, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड की कीमत में भी करीब 6 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और इसका भाव बढ़कर लगभग 75 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में यह तेजी अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की वजह से आई है। निवेशकों को आशंका है कि यदि दोनों देशों के बीच हालात और बिगड़ते हैं तो वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसी चिंता के कारण तेल बाजार में खरीदारी बढ़ी और कीमतों में तेजी देखने को मिली।रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए नए हमलों के बाद दोनों देशों के बीच सीजफायर खत्म हो गया है। ट्रंप के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई और इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा।
नाटो समिट के दौरान अंकारा में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने बताया कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ रात में नए हमले किए हैं। इस बयान के बाद निवेशकों में चिंता बढ़ गई कि मध्य-पूर्व क्षेत्र में तनाव बढ़ने से तेल उत्पादन और सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है।मध्य-पूर्व दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक क्षेत्रों में से एक है। यहां किसी भी तरह के संघर्ष या अस्थिरता का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ता है। यही वजह है कि भू-राजनीतिक तनाव बढ़ते ही कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ जाती है।
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों पर भी पड़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से कच्चा तेल खरीदता है। ऐसे में अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो इसका असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों और महंगाई पर भी पड़ सकता है।हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में कच्चे तेल की दिशा अमेरिका-ईरान तनाव और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। यदि स्थिति सामान्य होती है तो कीमतों में गिरावट आ सकती है, लेकिन तनाव बढ़ने पर तेल बाजार में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।





