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तलाक में Maintenance नहीं, सीधा करोड़ों की संपत्ति, जानें कैसे

Uma Verma
16 March 2025 12:33 PM IST
तलाक में Maintenance नहीं, सीधा करोड़ों की संपत्ति, जानें कैसे
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व्यापार | तलाक के मामलों में अक्सर पति को पत्नी को हर महीने मेंटेनेंस देना पड़ता है, लेकिन इस बार एक अलग मामला सामने आया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत एक महिला को तलाक के निपटारे में मेंटेनेंस की बजाय करोड़ों की संपत्ति दी गई, और खास बात ये रही कि उसे इस पर कोई स्टाम्प ड्यूटी भी नहीं चुकानी पड़ी।

क्या है मामला?

पति-पत्नी के बीच लंबे समय से तलाक का केस चल रहा था। आमतौर पर तलाक के बाद पत्नी को गुजारा भत्ता (मेंटेनेंस) देने का प्रावधान होता है, लेकिन इस केस में पत्नी ने हर महीने मिलने वाली मेंटेनेंस राशि को ठुकरा दिया और इसके बजाय अपने नाम पर संपत्ति ट्रांसफर करने की मांग की। कोर्ट ने इस मांग को स्वीकार कर लिया और पति को संपत्ति पत्नी के नाम पर ट्रांसफर करने का आदेश दिया।

स्टाम्प ड्यूटी से क्यों मिली छूट?

जब संपत्ति किसी के नाम ट्रांसफर होती है, तो आमतौर पर स्टाम्प ड्यूटी चुकानी पड़ती है, लेकिन इस केस में सुप्रीम कोर्ट ने पंजीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 17(2)(vi) लागू की। इस कानून के मुताबिक, अगर किसी संपत्ति का हस्तांतरण कोर्ट के आदेश से किया जाता है, तो उस पर स्टाम्प शुल्क नहीं लगता। इसी वजह से पत्नी को करोड़ों की संपत्ति बिना किसी अतिरिक्त खर्च के मिल गई।

क्या कहती है यह मिसाल?

यह मामला तलाक के मामलों में एक नई मिसाल बन सकता है। कई बार मेंटेनेंस की रकम सालों तक मिलती रहती है, लेकिन यह एक अस्थायी समाधान होता है। इस केस में पत्नी ने मेंटेनेंस के बजाय स्थायी संपत्ति को चुना, जो लंबे समय तक उसकी वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।

क्या इसका असर अन्य मामलों पर होगा?

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से तलाक के मामलों में एक नई प्रवृत्ति देखने को मिल सकती है। कई महिलाएं मेंटेनेंस की जगह स्थायी संपत्ति की मांग कर सकती हैं, जिससे उन्हें एक बार में आर्थिक स्थिरता मिल जाएगी।

निष्कर्ष

इस केस ने तलाक के निपटारे के नए तरीके को दिखाया है, जहां पत्नी ने मासिक मेंटेनेंस को छोड़कर संपत्ति को चुना। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला तलाक से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण संदर्भ बन सकता है, जिससे भविष्य में कई और मामले प्रभावित हो सकते हैं।


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